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ठंड की चपेट में आ रहे मासूम, रखें ख्याल

Thu, 17 Dec 2020 12:20 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 17 Dec 2020 12:20 AM IST
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Innocents are coming in the grip of cold, take care
शामली। ठंड का असर छोटे बच्चों पर अधिक पड़ रहा है। ठंडा मौसम मासूमों को डायरिया, सर्दी, जुकाम और खांसी चपेट में ले रहा है। जिस कारण अस्पतालों में इन बीमारियों से पीड़ित बच्चे अधिक पहुंच रहे हैं। ऐसे मौसम में लापरवाही बच्चों की सेहत पर भारी पड़ सकती है।
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पिछले तीन दिन से अचानक ठंड बढ़ गई और शीत लहर चल रही है। चिकित्सकों के मुताबिक ठंड का असर बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा होता है। विंटर डायरिया के साथ सर्दी, जुकाम, खांसी की चपेट में मासूम बच्चे आ रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अकबर खान ने बताया कि वैसे तो सर्दी का मौसम हेल्दी सीजन होता है, लेकिन बच्चों ठंड से बचाने के लिए एहतियात बरतनी जरूरी है। उनके यहां अधिकतर मरीज विंटर डायरिया, सर्दी, जुकाम, खांसी के आ रहे हैं।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वेदभानू मलिक ने बताया कि ठंड का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। बच्चों में ठंड बढ़ने के साथ डायरिया, जुकाम, खांसी, सर्दी के केस बढ़े हैं। सामान्य हल्के बुखार के भी केस आ रहे हैं। इन बीमारियों से बचाव के लिए सावधानी बरतनी जरूरी है। ठंड की वजह से 60 से 70 प्रतिशत बच्चे डायरिया, ब्रेन्कोलाइटिस (निमोनिया), खांसी, जुकाम के आ रहे हैं। सीएचसी के अधीक्षक डॉ. रमेश चंद्रा का कहना है कि ठंड का असर बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा होता है। इसलिए उन्हें ठंड से बचने के उपाय करने चाहिए।
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बच्चों के कमरे में हीटर न जलाएं
आइएमए के अध्यक्ष एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अकबर खान का कहना है कि बच्चों के कमरे में हीटर, ब्लोअर नहीं चलान चाहिए। इससे कमरा गर्म तो हो जाएगा, लेकिन हवा में जो नमी होती है, वह खत्म होने से सूखापन आता है। इससे बच्चों की सांस की नली में सूजन आती है और निमोनिया और सांस लेने में परेशानी होती है। कोशिश करें की गरम कपड़ों से ही ठंड से बच्चों का बचाव करें।
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ठंड लगने के लक्षण
सर्दी, जुकाम, खांसी होना
गले का दुखना या खरास होना
हल्का बुखार होना।
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ऐसे करें ठंड से बचाव
सुबह-शाम घर के अंदर रहें।
सर्दी से बचने के गरम ऊनी कपड़े पहनें।
ठंडी हवा से बचाव करें।
नजला-जुकाम वाले मरीजों से बच्चों को दूर रखें।
गुनगुना तरल पदार्थ पिलाएं।
बाहर की खाने पीने की चीजों का सेवन न करें।
दो साल तक के बच्चों को मां का दूध ज्यादा पिलाएं।
डायरिया होने पर ओआरएस का घोल पिलाएं।
एक साल तक के बच्चों को रोटा वायरस के टीके लगवाएं।
खाने पीने की चीजों में साफ-सफाई का ध्यान रखें।
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