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सरक ारी खजाने पर बढ़ रहा बोझ, जनता भी परेशान
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली।
Updated Sat, 21 Apr 2018 12:17 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। कभी समय पर बजट जारी नहीं हुआ तो कभी एनओसी के फेर में निर्माण लटक गया। विभागों, जिला प्रशासन, निर्माण एजेंसियों और शासन में बैठे अधिकारियों की बीच समन्वय की कमी। समय पर निर्माण परियोजनाएं पूरी नहीं हुई और उनकी निर्माण लागत बढ़ती गई, साथ ही सरकार के खजाने पर बोझ बढ़ता गया। दिल्ली सहारनपुर हाइवे का काम पेड़ काटने के लिए पर्यावरण संबंधित एनओसी नहीं मिलने के कारण शुुरू नहीं हो पाया, जब कार्य शुरू हो पाया तो तब तक इसकी लागत दोगुनी हो गई।
वर्ष 2011 में दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन परियोजना स्वीकृति की गई थी। उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण की देखरेख में पीपी माडल में यह कार्य होना था और इस परियोजना की लागत 1500 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से दिल्ली- शामली, सहारनपुर मार्ग के किनारे के पेड़ काटने अनुमति नहीं मिल पाई। 1500 से बढ़कर 2200 करोड़ लागत हुई और अब यह 3100 करोड़ पर पहुंच गई है। अभी भी कार्य अधूरा है और लागत में और भी वृद्धि की संभावना है। सवाल है यदि मंत्रालयों और विभागों के बीच तालमेल होता, प्रदेश और केंद्रीय वन मंत्रालय के अधिकारी जन हित में निर्णय लेते तो समय पर कार्य शुरू हो सकता था। लागत दोगुनी नहीं होती और इस बढ़ी लागत की कीमत पर अतिरिक्त सड़क का निर्माण किया जा सकता था।
बोले अफसर, महंगाई और जीएसटी ने बढ़ाई लागत
शामली। अधिकारी परियोजनाओं की लागत में वृद्धि होने का ठीकरा निर्माण सामग्रियों की कीमतों में वृद्धि और जीएसटी पर फोड़ रहे हैं। अधिकांश अधिकारियों का कहना है कि पुराने स्टीमेट के आधार पर निर्माण कार्य शुरू हुए थे। समय के अनुरूप परिस्थितियां बदलती गई और लागत बढ़ती गई। डीआरडीए के सहायक अभियंता दिनेश सिंघल का कहना है कि जिला मुख्यालय भवनों का पांच -छह साल पुराना स्टीमेट भेजा गया था। पुराने स्टीमेट के कारण विकास परियोजनाओं का रिवाइज इस्टीमेट भेजा गया है। कलक्ट्रेट- विकास भवन कार्यालय में एक-एक फ्लोर का निर्माण बढ़ गया है। दोनों कार्यालयों में कंप्यूटर व वीडियो कांफ्रेंसिंग रूम का स्टीमेट बढ़ गया है। रेत, सीमेंट, बजरी रोड़ी के दामों में हुई बढ़ोत्तरी और जीएसटी लागू होना भी इसकी वजह है।
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लागत बढ़ती गई परियोजनाएं नहीं हुई पूरी
निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन को निर्माण की जिम्मेदारी दी गई थी। मई 2016 में दो करोड़ 84 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था और 50 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त की गई। तीन अप्रैल 2017 तक निर्माण पूरा होना था। नोडल अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की एक करोड़ रुपये की अवशेष धनराशि आने के बाद कार्य पूरा हो पाएगा।
विकास परियोजनाओं के लिए धनराशि जारी की- तेजेंद्र निर्वाल
भाजपा विधायक तेजेंद्र निर्वाल का कहना है कि सपा सरकार के समय जिला मुख्यालय की विकास परियोजनाएं शुरू तो हुई लेकिन समय से धनराशि नहीं भेजी। भाजपा सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर पहले किसानों की फसली ऋण माफी व सातवें वेतनमान के लिए धनराशि दी गई है। इस वित्तीय वर्ष में जिला मुख्यालय की विकास की परियोजनाओं के लिए धनराशि जारी की गई हैं।
गलत नीति से बढ़े रोड़ी-बजरी, रेत के दाम:पंवार
योजना आयोग के सदस्य रहे सपा के वरिष्ठ नेता सुधीर पंवार का कहना है कि परियोजनाओं की लागत बढ़ने का कारण रोड़ी- बजरी व रेत के दाम बढ़ना है और इसके लिए भाजपा सरकार की गलत नीतियां जिम्मेदार है। उनकी सरकार में परियोजनाओं की धनराशि नहीं रोकी गई है। भाजपा सरकार के समय जिले की विकास परियोजनाओं धनराशि रोकी गई है।
प्राथमिकता के आधार पर कर रहे हैं धनराशि जारी: सुरेश राणा
उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सुरेश राणा का कहना है कि सपा सरकार के समय विकास परियोजनाओं को लागू करते समय ध्यान नहीं दिया जाता था। ध्यान नहीं दिए जाने से 90 प्रतिशत परियोजना अधर में लटकी है और उनकी लागत बढ़ गई हैं। भाजपा सरकार ने परियोजनाओं को ध्यान देकर उनका समय निर्धारित किया है। समय पर परियोजनाओं का कार्य पूरा नहीं करने वाली निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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वर्ष 2011 में दिल्ली-यमुनोत्री फोरलेन परियोजना स्वीकृति की गई थी। उत्तर प्रदेश राज्य राजमार्ग प्राधिकरण की देखरेख में पीपी माडल में यह कार्य होना था और इस परियोजना की लागत 1500 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से दिल्ली- शामली, सहारनपुर मार्ग के किनारे के पेड़ काटने अनुमति नहीं मिल पाई। 1500 से बढ़कर 2200 करोड़ लागत हुई और अब यह 3100 करोड़ पर पहुंच गई है। अभी भी कार्य अधूरा है और लागत में और भी वृद्धि की संभावना है। सवाल है यदि मंत्रालयों और विभागों के बीच तालमेल होता, प्रदेश और केंद्रीय वन मंत्रालय के अधिकारी जन हित में निर्णय लेते तो समय पर कार्य शुरू हो सकता था। लागत दोगुनी नहीं होती और इस बढ़ी लागत की कीमत पर अतिरिक्त सड़क का निर्माण किया जा सकता था।
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बोले अफसर, महंगाई और जीएसटी ने बढ़ाई लागत
शामली। अधिकारी परियोजनाओं की लागत में वृद्धि होने का ठीकरा निर्माण सामग्रियों की कीमतों में वृद्धि और जीएसटी पर फोड़ रहे हैं। अधिकांश अधिकारियों का कहना है कि पुराने स्टीमेट के आधार पर निर्माण कार्य शुरू हुए थे। समय के अनुरूप परिस्थितियां बदलती गई और लागत बढ़ती गई। डीआरडीए के सहायक अभियंता दिनेश सिंघल का कहना है कि जिला मुख्यालय भवनों का पांच -छह साल पुराना स्टीमेट भेजा गया था। पुराने स्टीमेट के कारण विकास परियोजनाओं का रिवाइज इस्टीमेट भेजा गया है। कलक्ट्रेट- विकास भवन कार्यालय में एक-एक फ्लोर का निर्माण बढ़ गया है। दोनों कार्यालयों में कंप्यूटर व वीडियो कांफ्रेंसिंग रूम का स्टीमेट बढ़ गया है। रेत, सीमेंट, बजरी रोड़ी के दामों में हुई बढ़ोत्तरी और जीएसटी लागू होना भी इसकी वजह है।
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लागत बढ़ती गई परियोजनाएं नहीं हुई पूरी
निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन को निर्माण की जिम्मेदारी दी गई थी। मई 2016 में दो करोड़ 84 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था और 50 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त की गई। तीन अप्रैल 2017 तक निर्माण पूरा होना था। नोडल अधिकारी संजय कुमार ने बताया कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की एक करोड़ रुपये की अवशेष धनराशि आने के बाद कार्य पूरा हो पाएगा।
विकास परियोजनाओं के लिए धनराशि जारी की- तेजेंद्र निर्वाल
भाजपा विधायक तेजेंद्र निर्वाल का कहना है कि सपा सरकार के समय जिला मुख्यालय की विकास परियोजनाएं शुरू तो हुई लेकिन समय से धनराशि नहीं भेजी। भाजपा सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर पहले किसानों की फसली ऋण माफी व सातवें वेतनमान के लिए धनराशि दी गई है। इस वित्तीय वर्ष में जिला मुख्यालय की विकास की परियोजनाओं के लिए धनराशि जारी की गई हैं।
गलत नीति से बढ़े रोड़ी-बजरी, रेत के दाम:पंवार
योजना आयोग के सदस्य रहे सपा के वरिष्ठ नेता सुधीर पंवार का कहना है कि परियोजनाओं की लागत बढ़ने का कारण रोड़ी- बजरी व रेत के दाम बढ़ना है और इसके लिए भाजपा सरकार की गलत नीतियां जिम्मेदार है। उनकी सरकार में परियोजनाओं की धनराशि नहीं रोकी गई है। भाजपा सरकार के समय जिले की विकास परियोजनाओं धनराशि रोकी गई है।
प्राथमिकता के आधार पर कर रहे हैं धनराशि जारी: सुरेश राणा
उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सुरेश राणा का कहना है कि सपा सरकार के समय विकास परियोजनाओं को लागू करते समय ध्यान नहीं दिया जाता था। ध्यान नहीं दिए जाने से 90 प्रतिशत परियोजना अधर में लटकी है और उनकी लागत बढ़ गई हैं। भाजपा सरकार ने परियोजनाओं को ध्यान देकर उनका समय निर्धारित किया है। समय पर परियोजनाओं का कार्य पूरा नहीं करने वाली निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।