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...मर्यादा की भूमि में, मंदिर बनेगा राम का
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शामली। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पूजन की खुशी को व्हाट्सएप के आओ गुनगुना लें गीत समूह पर आनलाइन कवि सम्मेलन में कवियों ने एक से बढ़कर एक कविता सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। मुख्य अतिथि गुरुग्राम की निवेदिता चक्रवर्ती ने अपनी कविता को यूं पढ़ा कि राम जीवन का अमिट पहलू है, शाश्वत सच है, राम कठिनाइयों के समक्ष सुदृढ़ कवच हैं।
ऑनलाइन कवि सम्मेलन में पटल के संरक्षक राष्ट्रीय गीतकार डॉ. जयसिंह आर्य दिल्ली ने सभी कवि और शायरों का स्वागत किया। पानीपत से कवयित्री आराधना सिंह अनु ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। हरिद्वार के प्रसिद्ध छंद शिल्पी बृजेंद्र हर्ष ने श्रीराम मंदिर पर अपनी कविता प्रस्तुत की। कहा कि कर गुजरने की घड़ी है, वक्त कब विश्राम का, जाप जपना ही पड़ेगा, सबको उसके नाम का। सज चुकी मन की अयोध्या, सद्गुण का संयोग है, मर्यादा की भूमि में, मंदिर बनेगा राम का। राष्ट्रीय गीतकार डॉ जयसिंह आर्य ने कहा कि झूठे बेर खिलाए शबरी, राम प्रेम से खाए। आदर्शों के शिखर पुरुष बनकर वह जग पर छाए। पानीपत के कवि केसर कमल ने कहा कि झूठ कपट का लिया सहारा, राम नाम से किया किनारा, जहर लिया तूने घोल, रे बंदे ! राम नाम बोल। महेंद्र माही ने कहा कि चोट लगती है तो इंसान राम-राम कहे, रूबरू होते ही पहचान राम-राम कहे। जन्म हो, मौत हो या हो कोई भी शुभ मंगल, होंठ चुप भी हो तो दालान राम-राम कहे।
करनाल के कवि भारत भूषण वर्मा ने कहा कि असुर संहारक राम प्रभु नवशक्ति का संचार करो, सूर्यवंशी रघुकुल भूषण, भारत का उद्धार करो। शामली कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने कहा कि भारतीय जनता के नायक हैं राम, भारत अखंडता के दायक हैं राम। कवि सम्मेलन में शामली से अनिल पोपट कामचोर, बृजेश सैनी, दिल्ली से श्रीकृष्ण निर्मल, कृष्णगोपाल सोलंकी, सुरेंद्र खास, कलकत्ता से सूरजपाल सिंह, बहादुरगढृ से राजकुमार अरोड़ा गाइड, इंदौर से संतोष त्रिपाठी, पटना से डॉ. पंकज वासिनी और हरिद्वार से पूनम रजा ने भी बेहतरीन कविताएं सुनाईं ।
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ऑनलाइन कवि सम्मेलन में पटल के संरक्षक राष्ट्रीय गीतकार डॉ. जयसिंह आर्य दिल्ली ने सभी कवि और शायरों का स्वागत किया। पानीपत से कवयित्री आराधना सिंह अनु ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। हरिद्वार के प्रसिद्ध छंद शिल्पी बृजेंद्र हर्ष ने श्रीराम मंदिर पर अपनी कविता प्रस्तुत की। कहा कि कर गुजरने की घड़ी है, वक्त कब विश्राम का, जाप जपना ही पड़ेगा, सबको उसके नाम का। सज चुकी मन की अयोध्या, सद्गुण का संयोग है, मर्यादा की भूमि में, मंदिर बनेगा राम का। राष्ट्रीय गीतकार डॉ जयसिंह आर्य ने कहा कि झूठे बेर खिलाए शबरी, राम प्रेम से खाए। आदर्शों के शिखर पुरुष बनकर वह जग पर छाए। पानीपत के कवि केसर कमल ने कहा कि झूठ कपट का लिया सहारा, राम नाम से किया किनारा, जहर लिया तूने घोल, रे बंदे ! राम नाम बोल। महेंद्र माही ने कहा कि चोट लगती है तो इंसान राम-राम कहे, रूबरू होते ही पहचान राम-राम कहे। जन्म हो, मौत हो या हो कोई भी शुभ मंगल, होंठ चुप भी हो तो दालान राम-राम कहे।
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करनाल के कवि भारत भूषण वर्मा ने कहा कि असुर संहारक राम प्रभु नवशक्ति का संचार करो, सूर्यवंशी रघुकुल भूषण, भारत का उद्धार करो। शामली कवि प्रीतम सिंह प्रीतम ने कहा कि भारतीय जनता के नायक हैं राम, भारत अखंडता के दायक हैं राम। कवि सम्मेलन में शामली से अनिल पोपट कामचोर, बृजेश सैनी, दिल्ली से श्रीकृष्ण निर्मल, कृष्णगोपाल सोलंकी, सुरेंद्र खास, कलकत्ता से सूरजपाल सिंह, बहादुरगढृ से राजकुमार अरोड़ा गाइड, इंदौर से संतोष त्रिपाठी, पटना से डॉ. पंकज वासिनी और हरिद्वार से पूनम रजा ने भी बेहतरीन कविताएं सुनाईं ।
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