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Shamli News: डिजिटल दौर में इबादत को मिला तकनीक का सहारा

Sun, 08 Mar 2026 12:23 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Sun, 08 Mar 2026 12:23 AM IST
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In the digital era, worship is supported by technology
शामली। रमजान माह में इबादत को आधुनिक तकनीक का सहारा मिला है। पहले जहां रमजान में सहरी के समय टोलियों में शामिल अकीदतमंद घर-घर जाकर रोजेदारों को जगाते थे, वहीं अब मोबाइल एप्लीकेशन यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं। नमाज का समय होते ही मोबाइल फोन में अलार्म के साथ अजान की आवाज सुनाई देने लगती है, जिससे रोजेदारों को समय की जानकारी तुरंत मिल जाती है। मोबाइल एप के माध्यम से लोग कुरआन-ए-पाक की तिलावत कर रहे हैं और नमाज, दुआ, कलमा तथा रोजा रखने-खोलने की नियत से जुड़ी जानकारी भी प्राप्त कर रहे हैं। वहीं सहरी और इफ्तार के सही समय की जानकारी भी एप के माध्यम से मिल रही है।
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तुरंत मिल रही जानकारी
कैराना निवासी जिशान का कहना है कि इंटरनेट के माध्यम से रमजान से जुड़ी हर जरूरी जानकारी तुरंत मिल जाती है। जिन स्थानों पर अजान या अन्य व्यवस्था नहीं होती, वहां मोबाइल एप रोजेदारों के लिए काफी मददगार साबित हो रहे हैं।
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ऑनलाइन सुन रहें तकरीर
साजिद का कहना है कि अब बीमार या बुजुर्ग लोग भी घर बैठे मोबाइल पर उलमाओं की तकरीरें सुन रहे हैं। इसके साथ ही उन्हें कुरआन की आयतें हिंदी अनुवाद के साथ पढ़ने और समझने का अवसर भी मिल रहा है।
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इन एप का कर रहे अधिक प्रयोग
मुस्लिम प्रो, रमजान, रमजान मुबारक, आई-प्रे जैसे मोबाइल एप पर हिंदी, अरबी और उर्दू में कलमा, नमाज पढ़ने के तरीके, रोजा रखने और खोलने की नियत तथा कुरआन शरीफ से जुड़ी जानकारी उपलब्ध है।

वुजू के साथ मोबाइल पर करें कुरआन की तिलावत
कारी शमशाद का कहना है कि बदलते दौर में तिलावत का माध्यम बदल गया है, लेकिन इबादत की पवित्रता बनाए रखना जरूरी है। मोबाइल फोन में कुरआन-ए-पाक की तिलावत की जा सकती है, मगर वुजू करने के बाद ही तिलावत करनी चाहिए और सिर पर टोपी होना बेहतर माना जाता है।


नमाज के समय खुद जगा देते हैं एप
मुस्लिमों के लिए फज्र, जौहर, असर, मगरिब और इशा की नमाज अदा करना जरूरी होता है। मोबाइल एप में नमाज का समय होते ही अलार्म बजने लगता है और कई एप में अजान भी सुनाई देती है। इसके साथ ही सहरी और इफ्तार के समय की जानकारी भी एप के माध्यम से स्वतः मिल जाती है।
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