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आयात शुल्क हटा, किसानों में रोष

Sun, 11 Dec 2016 12:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली Updated Sun, 11 Dec 2016 12:05 AM IST
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Import duties removed, farmers fury
शामली। केंद्र सरकार द्वारा गेहूं पर आयात शुल्क हटाने  की जानकारी होने पर किसानों में रोष बन गया है। किसानों का कहना है कि इस तरह तो देश का किसान बर्बाद ही जाएगा। क्योंकि विदेशी गेहूं ज्यादा आएगा, तो बाजार में गेहूं की कीमत घटेगी, जिसका खामियाजा भारत के किसान को भुगतना पड़ेगा। 
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पिछले दिनों ही संसद में केंद्रीय कृषि मंत्री ने गेहूं से आयात शुल्क हटाने की बात कही, जिसको लेकर बहस छिड़ गई है। रालोद नेताओं ने जहां केंद्र सरकार को किसान विरोधी बताते हुए आंदोलन की रणनीति बना ली है। वहीं, स्थानीय स्तर पर किसान भी गेहूं से आयात शुल्क हटाने के निर्णय को खराब बता रहे हैं।
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किसानों का मानना है कि जिस तरह विदेशों से रॉ शुगर का आयात करके गन्ना किसानों पर चोट की गई थी, उसी तरह गेहूं आयात शुल्क हटाकर किसानों के खिलाफ नीति बनाई गई है। 
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किसान जितेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि गेहूं पर आयात शुल्क हटाकर केंद्र सरकार ने देश के किसानों पर कुठाराघात किया है। किसान पहले ही ओलावृष्टि और अन्य कारणों से फसल बर्बाद होने से दुखी है। साथ ही नोटबंदी के कारण भी किसानों के सामने दुविधा बनी हुई है। यदि विदेश का गेहूं ज्यादा मात्रा में भारत आएगा, तो यहां के गेहूं उत्पादक किसान को उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा। 

गांव भैंसवाल के पूर्व प्रधान उमेश कुमार और योगेंद्र पंवार का कहना है कि अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य से ज्यादा कीमत पर बाजार में गेहूं बेच दिया जाता था, लेकिन आयात शुल्क हटने पर विदेश से ज्यादा गेहूं आने पर बाजार में गेहूं की कीमत कम हो जाएगी। ऐसे में किसान अपना गेहूं बाजार में उचित मूल्य पर नहीं बेच पाएंगे।


 प्रभावित हो रही बुवाई 
गेहूं की बुवाई 25 दिसंबर तक हो जाती है। इस सीजन में गेहूं की बुवाई पूरी तरह नहीं हो पाई है। कृषि विभाग के पास 1634 क्विंटल गेहूं का बीज आया था, जिसमें से सिर्फ एक हजार क्विंटल बीज ही बिक सका है। इसके पीछे नोटबंदी को जिम्मेदार माना जा रहा है। उधर, बुवाई का सीजन धीरे धीरे समाप्त होने वाला है। जिला कृषि अधिकारी आनंद त्रिपाठी का कहना है कि जिले में गेहूं का रकबा करीब 54 हजार हैक्टेयर है। काफी किसानों ने अभी गेहूं का बीज नहीं खरीदा है। उम्मीद है कि इस बार जनवरी के प्रथम सप्ताह तक गेहूं की बुवाई होगी।
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