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Shamli News: बुजुर्गों के वचन अच्छे लगने लगे तो समझो कल्याण का मार्ग खुल गया

Sat, 09 Nov 2024 12:50 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Sat, 09 Nov 2024 12:50 AM IST
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If you start liking the words of elders then understand that the path to welfare has opened.
शामली में कैराना रोड पर श्री राम कथा करते विजय कौशल महाराज । संवाद
शामली। संत प्रवर विजय कौशल महाराज ने कहा जीवन का सिद्धांत है कि जब बुजुर्गों के वचन अच्छे लगने लगे तो समझो कल्याण का मार्ग खुल गया। उन्होंने कहा बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए और उनकी कही हुई बातों पर अमल करना चाहिए। कैराना रोड स्थित जेजे फार्म में चल रही श्रीराम कथा के छठे दिन शुक्रवार को विजय कौशल महाराज ने कहा कि सीता की खोज में सभी वानर दक्षिण में समुद्र के किनारे चिंताग्रस्त हैं। तभी जामवंत ने हनुमान को उनके बल को याद दिलाया।
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हनुमान छलांग लगाकर समुद्र को पार करने के लिए उड़ने लगे तो उनके मार्ग में कई बाधाएं आई, लेकिन उन्होंने सभी बाधाओं को बल और बुद्धि कौशल से पार किया। लंका में प्रवेश करने पर विभीषण को उनके घर पहुंचकर जगाया।
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उन्होंने कहा जब संत द्वार पर आता है तो वह जागृति का संकेत है और जो सोते को जगाए उसी को संत कहते हैं। विभीषण को हनुमान ने समझाया कि वह रावण का साथ छोड़कर श्रीराम की शरण में चले जाएं। विभीषण से जानकी का पता पूछकर हनुमान अशोक वाटिका में पहुंचते हैं और राम की मुद्रिका दिखाकर अपना परिचय देते हैं। हनुमान ने जानकी को श्रीराम कथा सुनाई तो उनका दुख हल्का हो गया। सुख जाग गया यही राम कथा का प्रभाव है।
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इसके बाद हनुमान ने सारी लंका को जला दिया। केवल विभीषण का घर जलने से बचा। इसका कारण यह था कि हनुमान ने विभीषण को अपना भाई कहा था और त्रेता युग में भाई-भाई का घर नहीं उजाड़ता। यह काम तो कलयुग का भाई ही कर सकता है। हनुमान से जानकी की करुण कथा सुनकर श्रीराम बहुत दुखी हुए और उन्होंने लंका पर चढ़ाई का आदेश सेना को दिया।
उधर, लंका में विभीषण ने रावण के समक्ष सीता को प्रभु श्रीराम के चरणों में समर्पित करने का प्रस्ताव रखा तो रावण ने उन्हें लात मारकर विभीषण को राज्यसभा से निकाल दिया और विभीषण श्रीराम की शरण में पहुंच गए। भगवान राम ने समुद्र के जल से विभीषण का लंका के राजा के रूप में राज्याभिषेक कर दिया और उसे लंकेश कहकर संबोधित किया।

कथा के मुख्य यजमान अखिल बंसल तथा यजमान सत्यभामा बंसल सपरिवार रहे। इस अवसर पर राजेश्वर बंसल, अंजना बंसल, सारिका बंसल, रोबिन गर्ग, डॉ. अनुराग शर्मा, प्रदीप मंगल, विनय बंसल, अशोक बंसल, विजय गर्ग आदि मौजूद रहे।
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