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Shamli News: हांगकांग का गुलीफी गिरोह का सरगना दुबई में दिलाता है साइबर ठगी की ट्रेनिंग
Mon, 16 Feb 2026 12:35 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Mon, 16 Feb 2026 12:35 AM IST
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शामली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के युवाओं को विदेश भेजकर ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के बारे में पुलिस की जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच में पता चला है कि चीन के हांगकांग का गुलीफी उर्फ चुनीजी इस गिरोह का सरगना है। उसके संपर्क में दुबई और कनाड़ा के कई लोग हैं।
गुलीफी अपने टेलीग्राम ग्रुप और वंदड्रैगन गेम्स के जरिए पश्चिमी यूपी, दिल्ली, हरियाणा के युवाओं को प्रभावित कर दुबई में साइबर क्राइम की ट्रेनिंग भी देता है। पुलिस के अनुसार इस गिरोह में शामिल एजेंटों को उनके निवेश के अनुसार इंस्पेक्टर या सीओ के नाम से बुलाया जाता है और इनके नीचे 50 से 100 सदस्य तक जुड़े होते हैं। पश्चिमी यूपी के लगभग 200 एजेंटों से इस गिरोह का संपर्क जुड़ा हुआ पाया गया है।
एक साल में दो बार वेस्ट यूपी के शामली, बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर के गिरोह से जुड़े एजेंटों को दुबई में ट्रेनिंग दिलाने की बात सामने आई है। पुलिस इन एजेंटों का ब्योरा तैयार कर रही है। शामली पुलिस ने गिरोह के सरगना और अन्य सदस्यों की जानकारी जुटाने के लिए टेलीग्राम के दुबई मुख्यालय को पत्र भेजा है। एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि गुलीफी के नाम बदलकर भी सदस्यों से बात करने का पता चला है। एसपी ने कहा कि पुलिस ठगी के मामलों में सख्ती से कार्रवाई कर रही है और गिरोह को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा।
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नोएडा के सिम विक्रेताओं के जरिए ठगी
शामली। जांच में सामने आया कि गिरोह ने नोएडा के तीन सिम विक्रेताओं से सिम खरीदे, जिनका उपयोग पश्चिमी यूपी और अन्य जिलों के लोगों से पैसे ठगने में किया गया। एक सिम के बदले विक्रेताओं को 1,000 से 2,000 रुपये दिए गए। कुछ मामलों में ग्राहक की एक आईडी पर दो सिम जारी किए गए।
तीन सदस्य हो चुके गिरफ्तार
30 जनवरी को पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह के तीन सदस्यों राहुल (काशीनगर), धर्मेंद्र (हापुड़) और अमन (लखीमपुर खीरी) को गिरफ्तार किया था। आरोपियों ने ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट के नाम पर 20 करोड़ रुपये से अधिक ठगी के रूप में इकट्ठा किए। इस ठगी में कुल 34 बैंक खाते और 78 मोबाइल सिम इस्तेमाल किए गए थे। वांछित सदस्यों की तलाश अभी जारी है।
रुपयों को चंद मिनटों में पचास से अधिक खातों में भेज देते हें
एसपी ने बताया कि खाते में पैसा आने के बाद साइबर ठग चीनी डिवाइस और एप्स का उपयोग कर रकम को मिनटों में क्रिप्टोकरेंसी और डॉलर में बदलकर 40–50 म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर कर देते हैं। इस वजह से पुलिस को सीधे असली आरोपी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
साइबर ठगी से बचाव के उपाय
अनजान नंबर या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नौकरी का झांसा मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।
सिम खरीदते समय यह जांच लें कि किसी एक आईडी पर दो सिम जारी न किए गए हों।
ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें।
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गुलीफी अपने टेलीग्राम ग्रुप और वंदड्रैगन गेम्स के जरिए पश्चिमी यूपी, दिल्ली, हरियाणा के युवाओं को प्रभावित कर दुबई में साइबर क्राइम की ट्रेनिंग भी देता है। पुलिस के अनुसार इस गिरोह में शामिल एजेंटों को उनके निवेश के अनुसार इंस्पेक्टर या सीओ के नाम से बुलाया जाता है और इनके नीचे 50 से 100 सदस्य तक जुड़े होते हैं। पश्चिमी यूपी के लगभग 200 एजेंटों से इस गिरोह का संपर्क जुड़ा हुआ पाया गया है।
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एक साल में दो बार वेस्ट यूपी के शामली, बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर के गिरोह से जुड़े एजेंटों को दुबई में ट्रेनिंग दिलाने की बात सामने आई है। पुलिस इन एजेंटों का ब्योरा तैयार कर रही है। शामली पुलिस ने गिरोह के सरगना और अन्य सदस्यों की जानकारी जुटाने के लिए टेलीग्राम के दुबई मुख्यालय को पत्र भेजा है। एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि गुलीफी के नाम बदलकर भी सदस्यों से बात करने का पता चला है। एसपी ने कहा कि पुलिस ठगी के मामलों में सख्ती से कार्रवाई कर रही है और गिरोह को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा।
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नोएडा के सिम विक्रेताओं के जरिए ठगी
शामली। जांच में सामने आया कि गिरोह ने नोएडा के तीन सिम विक्रेताओं से सिम खरीदे, जिनका उपयोग पश्चिमी यूपी और अन्य जिलों के लोगों से पैसे ठगने में किया गया। एक सिम के बदले विक्रेताओं को 1,000 से 2,000 रुपये दिए गए। कुछ मामलों में ग्राहक की एक आईडी पर दो सिम जारी किए गए।
तीन सदस्य हो चुके गिरफ्तार
30 जनवरी को पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह के तीन सदस्यों राहुल (काशीनगर), धर्मेंद्र (हापुड़) और अमन (लखीमपुर खीरी) को गिरफ्तार किया था। आरोपियों ने ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट के नाम पर 20 करोड़ रुपये से अधिक ठगी के रूप में इकट्ठा किए। इस ठगी में कुल 34 बैंक खाते और 78 मोबाइल सिम इस्तेमाल किए गए थे। वांछित सदस्यों की तलाश अभी जारी है।
रुपयों को चंद मिनटों में पचास से अधिक खातों में भेज देते हें
एसपी ने बताया कि खाते में पैसा आने के बाद साइबर ठग चीनी डिवाइस और एप्स का उपयोग कर रकम को मिनटों में क्रिप्टोकरेंसी और डॉलर में बदलकर 40–50 म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर कर देते हैं। इस वजह से पुलिस को सीधे असली आरोपी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
साइबर ठगी से बचाव के उपाय
अनजान नंबर या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नौकरी का झांसा मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।
सिम खरीदते समय यह जांच लें कि किसी एक आईडी पर दो सिम जारी न किए गए हों।
ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें।