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Shamli News: चक्की चलाई, पंक्चर लगाया, बेटे को बुलंदियों तक पहुंचाया

Sun, 15 Jun 2025 01:23 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Sun, 15 Jun 2025 01:23 AM IST
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He operated a mill, repaired punctures and helped his son reach great heights
शामली। मां घर का आंगन होती है तो पिता उसकी छत। बच्चों को कामयाब बनाने का सपना हर पिता का होता है। कुड़ाना के हरपाल ने भी यह सपना देखा। संषर्ष की आंधियों में हौंसले की दीवार बनकर खड़े रहे। जीवन में तमाम मुसीबतें झेंली लेकिन बच्चों का सपना पूरा करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। कभी चक्की चलाई तो कभी वाहनों में पंक्चर लगाए और बेटे को शिक्षित कर शिक्षक बनाया।
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गांव कुड़ाना निवासी हरपाल पुत्र हरदास की पत्नी पुष्पा का वर्ष 1997 में देहांत हो गया था। जब उनका पुत्र विकास केवल दो वर्ष का ही था। पिता हरपाल गांव में ही पहले आटा चक्की चलाकर गुजारा करते थे। उसके बाद उन्होंने टायर पंक्चर की दुकान करते हुए मजदूरी की। पिता ने बेटे विकास को कामयाब करने और मां की याद न आने को लेकर अच्छी शिक्षा दिलाते हुए शिक्षक पद तक पहुंचाया। विकास ने गांव में हाईस्कूल व शामली के वीवी इंटर से इंटर करने के बाद बीकॉम की पढ़ाई बड़ौत से करते हुए बीएड की डिग्री लेते हुए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की। पिता ने उनकी शिक्षा के लिए मजदूरी करते हुए उन्हें कोई कमी महसूस नहीं होने दी। इसके बाद बेटा विकास रेलवे ग्रुप डी की भर्ती में चयनित हो गया। एक वर्ष नौकरी करने के बाद विकास का शिक्षक पद के लिए चयन हो गया। अब वह शामली के गांव मतनावली के प्राथमिक स्कूल में शिक्षक हैं।
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राकेश की प्रेरणा से बेटे ने किया जिला टाॅप, आईएएस बनने का सपना
शामली के मोेहल्ला दयानंदनगर निवासी राकेश कुमार एक कंपनी में एकाउंटेंट के पद पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि जब उनका बेटा कन्हैया मंगल चार वर्ष का था तो उनकी पत्नी की मृत्यु हो गई थी। उनकी पत्नी का सपना था कि उनका बेटा बड़ा होकर आईएएस अधिकारी बनकर समाज सेवा करें। उन्होंने बेटे को कभी भी मां की कमी महसूस नहीं होने दी। पढ़ाई में उन्होंने बेटे को किसी भी वस्तु की कमी नहीं होने दी। इस बार बेटे कन्हैया मंगल ने सरस्वती इंटर कॉलेज से इंटर की पढ़ाई करते हुए यूपी बोर्ड में 89.80 प्रतिशत अंक लाकर जिला टॉप किया और अपनी माता का सपना पूरा करने के लिए आगे की पढ़ाई करेगा।
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पिता के संघर्ष से प्रेरणा लेकर छू ली कामयाबी की मंजिल

शामली की सुखबीर कॉलोनी के रहने वाले चंद्रसेन मलिक ने बच्चों को कामयाब करने के लिए दिन रात मेहनत की। उन्होंने अपने सामने कभी भी आर्थिक तंगी को आडे आने नहीं दिया। चाहे वह कितनी भी मुसीबत में रहे, लेकिन बच्चों को खबर तक नहीं हुई। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। चंद्रसेन मलिक के तीनों बच्चे शिक्षक हैं। बेटी नीशु मलिक ने बताया कि पिता का संघर्ष जीवन भर नहीं बुलाया जा सकता। शुरुआती दौर में आर्थिक तंगी का भी सामना पिता चंद्रसैन मलिक ने किया। पिता के संघर्ष से प्रेरणा लेकर कामयाबी हासिल की। आज पिता की बदौलत नीशु मलिक शिक्षिका हैं। उनकी दूसरी बहन नेहा भी शिक्षिका है और भाई गौरव भी शिक्षक हैं।
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