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तीन डॉक्टरों के भरोसे सरकारी अस्पताल
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कैराना का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र
- फोटो : SHAMLI
कैराना। कस्बे में सरकारी अस्पताल तो बना है, लेकिन यहां डॉक्टरों की कमी के साथ ही मूलभूत सुविधाओं का पूरी तरह अभाव है। जिस कारण मरीजों को सही उपचार नहीं मिल पाता है।
शनिवार को कैराना के सरकारी अस्पताल की पड़ताल की गई तो पता चला कि यहां पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार, डॉ. भानू प्रकाश और दंत चिकित्सक डॉ. विनोद गर्ग की ही तैनाती है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 600 से लेकर 700 मरीजों का औसत है, ऐसे में एक तीन डॉक्टरों के हिस्से में करीब 225 से अधिक मरीज आते हैं। छह घंटे की ड्यूटी में प्रति घंटा करीब 35 मरीज बैठते हैं यानी एक मरीज को चेक करने पर दो मिनट से भी कम वक्त मिलता है। यहां पर महिला बच्चा चिकित्सक और सर्जन की आज तक तैनाती नहीं हुई। एक्सरे सहायक और सर्जन नहीं होने के कारण रोज दुर्घटना में घायल होने वालों को यहां के डॉक्टर थोड़ी सी ही चोट से रेफर कर देते हैं। अस्पताल में एक्सरे करने वाली डार्करूम असिस्टेंट ममता रानी की एक साल पहले बीमारी के कारण मौत हो गई थी। जिसके बाद से अस्पताल में किसी का भी एक्सरे नहीं हुआ। नेत्र सहायक भी यहां नहीं है। ऐसे में आंखों की जांच भी नहीं होती।
भीड़ अधिक, देर से आया नंबर
अस्पताल में दवाई लेने पहुंची खुरगान निवासी साजिदा ने बताया कि उसके 10 वर्षीय बेटे रिहान को बुुुखार है। पांच साल की बेटी अरमान और भतीजी आयशा को बुखार आया है। यहां एक ही डॉक्टर है, भीड़ अधिक है। डेढ़ घंटे में नंबर आया है।
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सवा घंटे में नंबर आया
पानीपत चुंगी निवासी वृद्धा वरीशा ने बताया कि उसको खुजली है। बहुत देर से खड़ी हूं अभी तक दवाई नहीं मिली। महमूद निवासी पंजीठ ने बताया कि उसे नजला, खांसी और बुखार है। डॉक्टर एक ही होने के कारण सवा घंटे बाद बाद नंबर आया।
कोट-
एक्सरे टेक्निशियन की मौत के बाद दूसरा टेक्निशियन नहीं आया, जिस कारण एक्सरे नहीं हो रहे। अस्पताल में तैनात तीन डाक्टरों के अलावा भूरा, ऊंचागांव स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर तैनात डॉ. विकास और डॉ. एजाजूद्दीन की भी कैराना अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी लगाई जाती है। - संजय भटनागर ,सीएमओ
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शनिवार को कैराना के सरकारी अस्पताल की पड़ताल की गई तो पता चला कि यहां पर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार, डॉ. भानू प्रकाश और दंत चिकित्सक डॉ. विनोद गर्ग की ही तैनाती है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 600 से लेकर 700 मरीजों का औसत है, ऐसे में एक तीन डॉक्टरों के हिस्से में करीब 225 से अधिक मरीज आते हैं। छह घंटे की ड्यूटी में प्रति घंटा करीब 35 मरीज बैठते हैं यानी एक मरीज को चेक करने पर दो मिनट से भी कम वक्त मिलता है। यहां पर महिला बच्चा चिकित्सक और सर्जन की आज तक तैनाती नहीं हुई। एक्सरे सहायक और सर्जन नहीं होने के कारण रोज दुर्घटना में घायल होने वालों को यहां के डॉक्टर थोड़ी सी ही चोट से रेफर कर देते हैं। अस्पताल में एक्सरे करने वाली डार्करूम असिस्टेंट ममता रानी की एक साल पहले बीमारी के कारण मौत हो गई थी। जिसके बाद से अस्पताल में किसी का भी एक्सरे नहीं हुआ। नेत्र सहायक भी यहां नहीं है। ऐसे में आंखों की जांच भी नहीं होती।
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भीड़ अधिक, देर से आया नंबर
अस्पताल में दवाई लेने पहुंची खुरगान निवासी साजिदा ने बताया कि उसके 10 वर्षीय बेटे रिहान को बुुुखार है। पांच साल की बेटी अरमान और भतीजी आयशा को बुखार आया है। यहां एक ही डॉक्टर है, भीड़ अधिक है। डेढ़ घंटे में नंबर आया है।
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सवा घंटे में नंबर आया
पानीपत चुंगी निवासी वृद्धा वरीशा ने बताया कि उसको खुजली है। बहुत देर से खड़ी हूं अभी तक दवाई नहीं मिली। महमूद निवासी पंजीठ ने बताया कि उसे नजला, खांसी और बुखार है। डॉक्टर एक ही होने के कारण सवा घंटे बाद बाद नंबर आया।
कोट-
एक्सरे टेक्निशियन की मौत के बाद दूसरा टेक्निशियन नहीं आया, जिस कारण एक्सरे नहीं हो रहे। अस्पताल में तैनात तीन डाक्टरों के अलावा भूरा, ऊंचागांव स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर तैनात डॉ. विकास और डॉ. एजाजूद्दीन की भी कैराना अस्पताल में इमरजेंसी ड्यूटी लगाई जाती है। - संजय भटनागर ,सीएमओ