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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   Shamli: Former MLA Rao Warish mother Mussarat Begum passes away, she was ill for a long time

Shamli: पूर्व विधायक राव वारिस की माता मुसर्रत बेगम का इंतकाल, लंबे समय से चल रही थीं बीमार

Mon, 29 Jan 2024 01:30 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 29 Jan 2024 01:30 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश के शामली में पूर्व विधायकराव वारिस की माता मुसर्रत बेगम का सोमवार सुबह निधन हो गया। उन्होंने अपने मुजफ्फरनगर स्थित आवास पर अंतिम सांस ली।

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Shamli: Former MLA Rao Warish mother Mussarat Begum passes away, she was ill for a long time
मुसर्रत बेगम का फाइल फोटो - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

उत्तर प्रदेश के शामली में पूर्व विधायक राव वारिस की माता मुसर्रत बेगम के निधन से शोक की लहर दौड़ गई। बाबरी के कैडी गांव की रहने वाली मुसर्रत बेगम ने सोमवार सुबह अंतिम सांस ली। 

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मुसर्रत बेगम के पति राव राफे खान भी पूर्व में विधायक रहे हैं। मुसर्रत बेगम के पुत्र राव अब्दुल वारिस भी वर्ष 2007 में रालोद से विधायक रहे हैं।

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मुसर्रत बेगम की मौत से परिवार में मातम छाया हुआ है। राजनैतिक दलों के अलावा सामाजिक संगठनों के लोगों ने भी पीड़ित परिवार को सांत्वना दी।

बताया गया कि मुसर्रत बेगम इन दिनों अपने मुजफ्फरनगर आवास में ही थीं। जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।

बीमारी के चलते हुए पूर्व विधायक राव वारिस की माता राव मुसर्रत के निधन से कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई । लोगों का कहना है कि राव मुर्सरत एक साहसी महिला थीं। जिन्होंने अपने पति की मौत के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को न सिर्फ संभाला बल्कि अपने बेटे को विधायक बनाने में अहम भूमिका निभाई। लोगों का कहना है कि समाज में सदियों तक राव मुसर्रत बेगम को याद किया जाएगा।

वर्ष 2007 में हुए विधानसभा चुनाव में विधायक बने राव वारिस की माता राव मुसर्रत बेगम का बीमारी के चलते निधन हो गया। बता दें कि राव वारिस को राजनीति उनके माता-पिता की विरासत में मिली थी। वर्ष 1969 में उनके पिता राव राफे खां चुनाव जीतकर विधायक बने।

इसके बाद 90 के दशक में उनकी मृत्यु हो गई। मौत के बाद परिवार में सिर्फ उनकी पत्नी ही राजनीति की जिम्मेदारी निभा सकती थीं, क्योंकि उस समय उनका बेटा बहुत छोटा था। इस पर राव मुसर्रत बेगम ने जिम्मेदारी संभाली ओर विकास कार्यों में जुट गईं।

इस दौरान उन्होंने वर्ष 2000 में हुए उपचुनाव में रालोद के संबल पर चुनाव लड़ा, हालांकि इस दौरान वह भाजपा के जगत सिंह से चुनाव हार गईं। इसके बाद भी मुसर्रत बेगम ने हिम्मत नहीं हारी।

वर्ष 2007 में मुसर्रत बेगम की चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी थी लेकिन एन वक्त पर समर्थकों ने उनके स्थान पर बेटे राव वारिस को चुनाव लड़ाने का दबाव बनाया। हालांकि, उस समय राव वारिस पीसीएस जे की परीक्षा पास कर आगे की तैयारी कर रहे थे लेकिन समर्थकों ओर मां के कहने पर उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला लिया।

राव मुसर्रत बेगम की मेहनत का ही परिणाम था कि राव वारिस चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंच गए। आज उनके पैतृक गांव में गम का माहौल है। लेकिन हर किसी की जुबां पर सिर्फ मुसर्रत बेगम की तारीफ है। लोगों का कहना है कि वह मिलनसार थीं। हर किसी के सुख दुख में शामिल होती थीं।

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