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पांच मिनट में कोयला बने चारों शरीर
ब्यूरो/अमर उजाला, शामली
Updated Sat, 16 Apr 2016 01:03 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जलालाबाद/शामली। महज पांच मिनट के अंदर चारों शरीर कोयला बन गए। छप्पर में आग लगने पर किसी को बचने का मौका तक नहीं मिला। महिला ने बच्चों को बचाने का प्रयास तो किया, मगर वह खुद को भी नहीं बचा सकी।
जलालाबाद के मोहल्ला शाहगाजीपुरा में जिसने भी बबलू और पाला के मकान का मंजर देखा, उसकी आंखें भर आईं। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि सुबह जब लक्ष्मी छप्पर के नीचे चूल्हे पर चाय बना रही थी, तभी अचानक एक चिंगारी से छप्पर में आग लग गई। हवा भी चल रही थी, जिस कारण आग बढ़ती चली गई। जैसे ही छप्पर में आग लगने का पता चला, तो वह खुद को बचाने की बजाए, बच्चों को बचाने में लग गई।
बच्चे चारपाई पर लेटे हुए थे। लक्ष्मी ने बच्चों को एक साथ ही वहां से निकालने का प्रयास किया, लेकिन बच्चों को बचाने के प्रयास में वह भी आग में घिर गई। पूरा ही छप्पर एकदम से धराशायी हो गया और बच्चों सहित महिला को भी आगोश में ले लिया। इसके बाद जब तक मोहल्ले वालों को आग का पता चला, तो तीनों बच्चे और महिला जलते छप्पर के नीचे दबे हुए थे। मोहल्ले वालों ने किसी तरह आग बुझाकर चारों को वहां से निकाला, तब तक महिला लक्ष्मी और दो बच्चों का शरीर कोयला बन चुका था।
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वहीं, तीसरे बच्चा दीपक गंभीर रूप से झुलसा हुआ था। उसे अस्पताल भिजवाया गया, मगर जिंदगी नहीं बच सकी। मोहल्ले वालों का कहना था कि यदि कुछ देर पहले आग का पता चल जाता, तो आग में घिरे परिवार को बचाया जा सकता था। घटना से परिजनों में कोहराम मचा था, रो रोकर सभी का हाल बुरा था।
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जलालाबाद के मोहल्ला शाहगाजीपुरा में जिसने भी बबलू और पाला के मकान का मंजर देखा, उसकी आंखें भर आईं। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि सुबह जब लक्ष्मी छप्पर के नीचे चूल्हे पर चाय बना रही थी, तभी अचानक एक चिंगारी से छप्पर में आग लग गई। हवा भी चल रही थी, जिस कारण आग बढ़ती चली गई। जैसे ही छप्पर में आग लगने का पता चला, तो वह खुद को बचाने की बजाए, बच्चों को बचाने में लग गई।
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बच्चे चारपाई पर लेटे हुए थे। लक्ष्मी ने बच्चों को एक साथ ही वहां से निकालने का प्रयास किया, लेकिन बच्चों को बचाने के प्रयास में वह भी आग में घिर गई। पूरा ही छप्पर एकदम से धराशायी हो गया और बच्चों सहित महिला को भी आगोश में ले लिया। इसके बाद जब तक मोहल्ले वालों को आग का पता चला, तो तीनों बच्चे और महिला जलते छप्पर के नीचे दबे हुए थे। मोहल्ले वालों ने किसी तरह आग बुझाकर चारों को वहां से निकाला, तब तक महिला लक्ष्मी और दो बच्चों का शरीर कोयला बन चुका था।
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वहीं, तीसरे बच्चा दीपक गंभीर रूप से झुलसा हुआ था। उसे अस्पताल भिजवाया गया, मगर जिंदगी नहीं बच सकी। मोहल्ले वालों का कहना था कि यदि कुछ देर पहले आग का पता चल जाता, तो आग में घिरे परिवार को बचाया जा सकता था। घटना से परिजनों में कोहराम मचा था, रो रोकर सभी का हाल बुरा था।