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जीवाणु पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा का प्रयोग करें किसान
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पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा का प्रयोग करें किसान
शामली। जिले में बासमती धान की फसल में जीवाणु झुलसा रोग लगने से किसानों को नुकसान हो रहा है। जीवाणु झुलसा रोग से किसानों को अपनी फसल को बचाना होगा। किसानों को पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा का प्रयोग कर फसल को इस रोग से बचा सकते हैं।
जिले में किसान ज्यादातर बासमती धान की फसल की रोपाई करते हैं। धान की रोपाई का समय गुजर चुका है। पिछले कई दिनों से जिले में बासमती धान की फसल में जीवाणु झुलसा रोग फैलता जा रहा है। शामली कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डाक्टर शीशपाल सिंह बताते हैं कि जलालपुर- हाथी करौंदा, समसपुर के किसान उनके यहां आकर बासमती धान की फसल में जीवाणु झुलसा रोग आने की शिकायत कर रहे हैं। जीवाणु अधिकतर इस रोग से संक्रमित खरपतवार, फसल अवशेष, सिंचाई जल, मानव, कीट और पक्षियों आदि के द्वारा स्वस्थ पौधों तक फैलता है। इस रोग को फैलने के लिए तापमान 25-34 डिग्री सेंटीग्रेड व 70 प्रतिशत से अधिक आपेक्षित आद्रता अनुकूल होती है। इस रोग के कारण लगभग 70 प्रतिशत तक उपज में कमी आ सकती है।
उधर, इस रोग के कारण धान के पौधे पीले होकर झुलस जाते। हैं। पौधे की पत्तियां उपर से नीचे की ओर झुलस जाती है। अधिक प्रकोप होने पर खेत झुलसे से नजर आते हैं। किसान को बासमती धान की फसल को बचाने के लिए रोग प्रबंधन के उपाय करने होंगे। पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा का प्रयोग करें। खेतों को खरपतवारों से मुक्त रखें। खेत का पानी निकाल कर 15 ग्राम स्टरेप्टोसाइक्लीन व 500 ग्राम कॉपर आंक्सी क्लोराइड को 500 लीटर पानी में घोलकर 2-3 छिड़काव करना चाहिए।
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शामली। जिले में बासमती धान की फसल में जीवाणु झुलसा रोग लगने से किसानों को नुकसान हो रहा है। जीवाणु झुलसा रोग से किसानों को अपनी फसल को बचाना होगा। किसानों को पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा का प्रयोग कर फसल को इस रोग से बचा सकते हैं।
जिले में किसान ज्यादातर बासमती धान की फसल की रोपाई करते हैं। धान की रोपाई का समय गुजर चुका है। पिछले कई दिनों से जिले में बासमती धान की फसल में जीवाणु झुलसा रोग फैलता जा रहा है। शामली कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डाक्टर शीशपाल सिंह बताते हैं कि जलालपुर- हाथी करौंदा, समसपुर के किसान उनके यहां आकर बासमती धान की फसल में जीवाणु झुलसा रोग आने की शिकायत कर रहे हैं। जीवाणु अधिकतर इस रोग से संक्रमित खरपतवार, फसल अवशेष, सिंचाई जल, मानव, कीट और पक्षियों आदि के द्वारा स्वस्थ पौधों तक फैलता है। इस रोग को फैलने के लिए तापमान 25-34 डिग्री सेंटीग्रेड व 70 प्रतिशत से अधिक आपेक्षित आद्रता अनुकूल होती है। इस रोग के कारण लगभग 70 प्रतिशत तक उपज में कमी आ सकती है।
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उधर, इस रोग के कारण धान के पौधे पीले होकर झुलस जाते। हैं। पौधे की पत्तियां उपर से नीचे की ओर झुलस जाती है। अधिक प्रकोप होने पर खेत झुलसे से नजर आते हैं। किसान को बासमती धान की फसल को बचाने के लिए रोग प्रबंधन के उपाय करने होंगे। पोषक तत्वों की संतुलित मात्रा का प्रयोग करें। खेतों को खरपतवारों से मुक्त रखें। खेत का पानी निकाल कर 15 ग्राम स्टरेप्टोसाइक्लीन व 500 ग्राम कॉपर आंक्सी क्लोराइड को 500 लीटर पानी में घोलकर 2-3 छिड़काव करना चाहिए।
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