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फसल बीमा से किसानों ने खींचे हाथ
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फसल बीमा से किसानों ने खींचे हाथ
शामली। प्रधानमंत्री फसल बीमा से किसानों ने हाथ खींच लिए है। इस योजना के स्वैच्छिक होते ही 1982 किसानों ने बैंकों को लिखकर दे दिया है कि वे अपनी फसल का बीमा नहीं कराना चाहते जबकि मात्र 287 किसानों ने बीमे के लिए सहमति जताई है।
जिले में एक लाख 23 हजार 103 किसान क्रेडिट धारक हैं। गत वर्ष प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में जिले के 1758 किसानों का धान की फसल का बीमा प्रीमियम काटा गया था। कृषि कार्ड धारकों के लिए इस योजना में प्रीमियम जमा करना अनिवार्य था। सरकार ने फसल बीमा योजना को अब स्वैच्छिक कर दिया है। डीएम जसजीत कौर ने सभी बैंकों के समन्वयकों को निर्देश दिए गए थे कि जो किसान फसल बीमा नहीं कराना चाहते हैं, उनसे लिखित में लिया जाए। किसानों से 27 जुलाई तक प्रार्थना पत्र प्राप्त किए गए। 31 जुलाई तक ऋणी कृषकों के प्रीमियम की धनराशि किसान क्रेडिट खाते से 1510 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से कटौती करते हुए तथा गैर ऋणी कृषकों से नकद प्राप्त कर 15 अगस्त तक एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (एआईसी) के पोर्टल पर भेजने के निर्देश दिए गए थे। फसल बीमा योजना के स्वैच्छिक होने के बाद किसानों ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। मात्र 287 किसान ही प्रीमियम कटवाने के लिए सहमत हैं। अग्रणी जिला प्रबंधक शैलेष कुमार ने बताया कि जनपद में गन्ने की खेती ज्यादा होती है। यहां किसान गेहूं धान की फसल से ज्यादा गन्ने की फसल को महत्व देते हैं। 27 जुलाई तक 1982 किसानों ने बैंकों को लिखित में देकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रीमियम कटवाने से इंकार कर दिया।
बैंकों से नहीं मिल पाया डाटा
शामली। जिला कृषि अधिकारी डा. हरिशंकर सिंह के मुताबिक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में वित्तीय वर्ष 2020-21 में जनपद में खरीफ में केवल धान फसल बीमा हेतु अधिसूचित है। प्रति हेक्टेयर बीमित धनराशि 75517 है। प्रीमियम की धनराशि 1510 रुपए प्रति हेक्टेयर है। फसल बीमा योजना का लाभ लेने वाले, योजना से इंकार करने वाले किसानों का डाटा कृषि विभाग को उपलब्ध नहीं हो पाया है। फसल बीमा कराने वाले किसानों की फसलों को कोई क्षति पहुंचती है, तो उसकी शिकायत दर्ज टोल फ्री नंबर 1800166515 पर दर्ज कराएं, जिससे किसानों को योजना का लाभ दिलाया जा सके।
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शामली। प्रधानमंत्री फसल बीमा से किसानों ने हाथ खींच लिए है। इस योजना के स्वैच्छिक होते ही 1982 किसानों ने बैंकों को लिखकर दे दिया है कि वे अपनी फसल का बीमा नहीं कराना चाहते जबकि मात्र 287 किसानों ने बीमे के लिए सहमति जताई है।
जिले में एक लाख 23 हजार 103 किसान क्रेडिट धारक हैं। गत वर्ष प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में जिले के 1758 किसानों का धान की फसल का बीमा प्रीमियम काटा गया था। कृषि कार्ड धारकों के लिए इस योजना में प्रीमियम जमा करना अनिवार्य था। सरकार ने फसल बीमा योजना को अब स्वैच्छिक कर दिया है। डीएम जसजीत कौर ने सभी बैंकों के समन्वयकों को निर्देश दिए गए थे कि जो किसान फसल बीमा नहीं कराना चाहते हैं, उनसे लिखित में लिया जाए। किसानों से 27 जुलाई तक प्रार्थना पत्र प्राप्त किए गए। 31 जुलाई तक ऋणी कृषकों के प्रीमियम की धनराशि किसान क्रेडिट खाते से 1510 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से कटौती करते हुए तथा गैर ऋणी कृषकों से नकद प्राप्त कर 15 अगस्त तक एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (एआईसी) के पोर्टल पर भेजने के निर्देश दिए गए थे। फसल बीमा योजना के स्वैच्छिक होने के बाद किसानों ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। मात्र 287 किसान ही प्रीमियम कटवाने के लिए सहमत हैं। अग्रणी जिला प्रबंधक शैलेष कुमार ने बताया कि जनपद में गन्ने की खेती ज्यादा होती है। यहां किसान गेहूं धान की फसल से ज्यादा गन्ने की फसल को महत्व देते हैं। 27 जुलाई तक 1982 किसानों ने बैंकों को लिखित में देकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रीमियम कटवाने से इंकार कर दिया।
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बैंकों से नहीं मिल पाया डाटा
शामली। जिला कृषि अधिकारी डा. हरिशंकर सिंह के मुताबिक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में वित्तीय वर्ष 2020-21 में जनपद में खरीफ में केवल धान फसल बीमा हेतु अधिसूचित है। प्रति हेक्टेयर बीमित धनराशि 75517 है। प्रीमियम की धनराशि 1510 रुपए प्रति हेक्टेयर है। फसल बीमा योजना का लाभ लेने वाले, योजना से इंकार करने वाले किसानों का डाटा कृषि विभाग को उपलब्ध नहीं हो पाया है। फसल बीमा कराने वाले किसानों की फसलों को कोई क्षति पहुंचती है, तो उसकी शिकायत दर्ज टोल फ्री नंबर 1800166515 पर दर्ज कराएं, जिससे किसानों को योजना का लाभ दिलाया जा सके।
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