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Shamli News: गाजर के दाम गिरे तो मायूस हुए किसान
Sun, 17 Dec 2023 12:37 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sun, 17 Dec 2023 12:37 AM IST
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जलालाबाद। गाजर के दाम गिरने पर किसान मायूस है। अब हजारों एकड़ में लगी गाजर की फसल किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। गाजर वर्तमान में पांच से लेकर आठ रुपये किलो किसानों से खरीदी जा रही है।
क्षेत्र के करीब दर्जनभर से अधिक गांवों में हजारों एकड़ में गाजर की फसल है। इस बार किसानों के लिए गाजर घाटे का सौदा बन रही है। बाहरी क्षेत्रों से मंडी में गाजर आने से दाम बेहद कम होने से किसान परेशान हैं। हाल ये है कि किसानों के खेतों में खड़ी गाजर फसल के खरीदार नहीं है। थोक मंडियों में मिलने वाले दामों से किसान और खरीदार लागत, खोदाई, पैकिंग और ट्रांसपोर्ट का खर्च भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
बताया गया कि राजस्थान में आने वाली गाजर के चलते यहां दाम पांच से आठ रुपये प्रति किलो रह गए हैं। जलालाबाद में अर्जुन रावड़ा, सोमपाल सैनी, सोहनलाल सैनी, आसिफ चौधरी, मुकेश आदि ने बताया की गाजर आठ से 10 हजार रुपये प्रति बीघा बिक रही है, जबकि 20 हजार रुपये प्रति बीघा फसल में खर्च आ रहा है। जिसमे बुआई, खाद, पानी, जुताई, लेबर आदि खर्च होता है। परंतु गाजर का भाव न मिलने से किसान परेशान है।
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बोले किसान
किसान अर्जुन रावड़ा ने बताया की 10 बीघा में गाजर की बुवाई की थी। जिसमे खरीदार को 12000 प्रति बीघा से पांच बीघा गाजर की फसल बेच दी थी, बाकी बची पांच बीघा फसल को भाव न मिलने व आगामी फसल लगाने के लिए फसल में ट्रैक्टर चला दिया। मंडियों में मंदा होने पर खरीदार रकम भी नहीं निकाल पा रहे हैं।
किसान अल्हारखा ने हम लोग आपस में मिलकर थोड़ी-थोड़ी रकम डालकर किसानों से खड़े खेत खरीद लेते हैं। इस बार 12 से 15 हजार रुपये प्रति बीघा से पांच बीघा गाजर के खेत खरीदा था परंतु मंडी में गाजर के दाम गिर गए है। जिसमे लेवर, गाजर की धुलाई, फटाई, ट्रांसपोर्ट आदि के खर्चे भी पूरे नही हो रहे हैं।
फसल खरीदार मतलूब ने बताया कि कई सालों से गाजर आदि की खड़ी फसल खरीद रहे हैं। थोक सब्जी मंडियों में दाम गिरने से खेत में खाद, दवाई के छिड़काव की रकम मिल पा रही है। परंतु खोदाई, धुलाई, ट्रांसपोर्ट का खर्च जेब से देना पड़ रहा है।
किसान सोमपाल सैनी ने बताया कि चांर बीघा गाजर की फसल लगाई थी, जिससे अच्छा भाव मिलने की उम्मीद थी, परंतु मंडी में बाहर से आई गाजर से मंडी में लोकल क्षेत्र की गाजर को अच्छा भाव नहीं मिला जिसमे फसल की लागत भी पूरी नहीं होती।
मंडी आढ़ती अशोक कोरी ने बताया कि मंडी में हरियाणा व लोकल से बहुत गाजर आ रही है जिसका भाव 250 से 300 रुपये 50 किलो का प्रति कट्टा बिक रहा है। दिसंबर के बाद भाव बढ़ने की उम्मीद है।
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क्षेत्र के करीब दर्जनभर से अधिक गांवों में हजारों एकड़ में गाजर की फसल है। इस बार किसानों के लिए गाजर घाटे का सौदा बन रही है। बाहरी क्षेत्रों से मंडी में गाजर आने से दाम बेहद कम होने से किसान परेशान हैं। हाल ये है कि किसानों के खेतों में खड़ी गाजर फसल के खरीदार नहीं है। थोक मंडियों में मिलने वाले दामों से किसान और खरीदार लागत, खोदाई, पैकिंग और ट्रांसपोर्ट का खर्च भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
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बताया गया कि राजस्थान में आने वाली गाजर के चलते यहां दाम पांच से आठ रुपये प्रति किलो रह गए हैं। जलालाबाद में अर्जुन रावड़ा, सोमपाल सैनी, सोहनलाल सैनी, आसिफ चौधरी, मुकेश आदि ने बताया की गाजर आठ से 10 हजार रुपये प्रति बीघा बिक रही है, जबकि 20 हजार रुपये प्रति बीघा फसल में खर्च आ रहा है। जिसमे बुआई, खाद, पानी, जुताई, लेबर आदि खर्च होता है। परंतु गाजर का भाव न मिलने से किसान परेशान है।
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बोले किसान
किसान अर्जुन रावड़ा ने बताया की 10 बीघा में गाजर की बुवाई की थी। जिसमे खरीदार को 12000 प्रति बीघा से पांच बीघा गाजर की फसल बेच दी थी, बाकी बची पांच बीघा फसल को भाव न मिलने व आगामी फसल लगाने के लिए फसल में ट्रैक्टर चला दिया। मंडियों में मंदा होने पर खरीदार रकम भी नहीं निकाल पा रहे हैं।
किसान अल्हारखा ने हम लोग आपस में मिलकर थोड़ी-थोड़ी रकम डालकर किसानों से खड़े खेत खरीद लेते हैं। इस बार 12 से 15 हजार रुपये प्रति बीघा से पांच बीघा गाजर के खेत खरीदा था परंतु मंडी में गाजर के दाम गिर गए है। जिसमे लेवर, गाजर की धुलाई, फटाई, ट्रांसपोर्ट आदि के खर्चे भी पूरे नही हो रहे हैं।
फसल खरीदार मतलूब ने बताया कि कई सालों से गाजर आदि की खड़ी फसल खरीद रहे हैं। थोक सब्जी मंडियों में दाम गिरने से खेत में खाद, दवाई के छिड़काव की रकम मिल पा रही है। परंतु खोदाई, धुलाई, ट्रांसपोर्ट का खर्च जेब से देना पड़ रहा है।
किसान सोमपाल सैनी ने बताया कि चांर बीघा गाजर की फसल लगाई थी, जिससे अच्छा भाव मिलने की उम्मीद थी, परंतु मंडी में बाहर से आई गाजर से मंडी में लोकल क्षेत्र की गाजर को अच्छा भाव नहीं मिला जिसमे फसल की लागत भी पूरी नहीं होती।
मंडी आढ़ती अशोक कोरी ने बताया कि मंडी में हरियाणा व लोकल से बहुत गाजर आ रही है जिसका भाव 250 से 300 रुपये 50 किलो का प्रति कट्टा बिक रहा है। दिसंबर के बाद भाव बढ़ने की उम्मीद है।