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दशहरा मेला हो सकता है बेरौनक
ब्यूरो/अमर उजाला, शामली
Updated Fri, 02 Jun 2017 12:06 AM IST
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शामली के गांव बिडोली में सूखी यमुना नदी।
- फोटो : amar ujala
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शामली। मोक्ष एवं जीवनदायिनी यमुना महीनों से सूखी हुई है। यमुना के सूख जाने से चार जून को लगने वाले दशहरा मेेेले पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक है। श्रद्धालुओं को स्नान करने से वंचित रहना पड़ सकता है। नतीजतन श्रद्धालु अन्यत्र स्नान करने के लिए जाने को विवश हो सकते हैं। ऐसे में मेले का रौनक फीका पड़ जाएगा। कारोबारियों का व्यापार भी प्रभावित होगा।
दशहरा मेले को लेकर आसपास के लोगों को काफी उत्सुकता रहती है। धार्मिक मान्यताओं के कारण भी इसका काफी महत्व है। इस दिन श्रद्धालु स्नान और दान कर पुण्य कमाने की चाहत रखते हैं। काफी अरसों से हथिनीकुंड बैराज से दिल्ली की ओर जाने वाली यमुना गर्मी में सूख जाती है। अप्रैल से लेकर जुलाई और अगस्त के महीने तक पानी का अकाल रहता है। पहाड़ों पर बारिश होने के बाद ही यमुना नदी में पानी आता है। यमुना नदी में पानी सर्दियों में ही बढ़ता है। पिछले एक महीने से यमुना नदी सूखी पड़ी है। सूखी यमुना में बालू उड़ रही है। दशहरा मेले में ज्यादातर हरियाणा के यमुनानगर और वेस्ट यूपी के सरसावा, बिड़ौली, कैराना, बागपत में यमुना नदी में स्नान होता है। प्रत्येक रविवार व अमावस्या, कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालु यहां स्नान करने के लिए आते हैं। यमुना सूख जाने से श्रद्धालुओं में मायूसी है कि यमुना में कैैसे स्नान होगा। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता शिवराज सिंह ने कहा कि यमुना नदी सूखी हुई है। ताजेवाला बांध पर मात्र 160 क्यूसेक पानी जीव-जंतु के जीवन के लिए बचा है। पहाड़ों पर बारिश होने के बाद यमुना नदी में पानी आ पाएगा। दशहरा मेले के दौरान यमुना में पानी आना संभव नहीं लग रहा है।
रोजी-रोटी पर पड़ेगा असर
पानी के अभाव में पूर्वी यमुना नहर भी पिछले एक सप्ताह से सूखी पड़ी है। यमुना नहर के किनारे मेरठ-करनाल मार्ग पर मुंडेटखुर्द पुल के पास दशहरे का तीन दिवसीय मेला लगता है। श्रद्धालु यमुना नहर में डुबकी लगाकर पुण्य कमाते हैं। दशहरे मेले के मद्देनजर मिट्टी के बर्तन बनाने वाले दुकानदार आ गए हैं। सिसौली के दुकानदार राजीव कहते हैं कि यमुना नहर में पानी नहीं से इस बार श्रद्धालुओं की कमी होगी, जिसका असर रोजी रोटी पर पड़ेगा। पूर्वी यमुना नहर के जिलेदार अंबुज कुमार ने कहा कि दशहरा मेले के मद्देनजर पूर्वी यामुना नहर में पानी छोड़ने की मांग की गई है। पिछले आठ दिन से नहर में पानी बंद है।
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पानी की व्यवस्था कराना सरकार की जिम्मेदारी
जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि यमुना लोगों के लिए आस्था और भावना का प्रतीक है। चार जून को होने वाले दशहरा मेले में केंद्र और प्रदेश सरकार को यमुना नदी में पानी की व्यवस्था करानी चाहिए।
टिहरी जैसे बांध बनाने के लिए होगी सिफारिश : बालियान
केंद्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री संजीव बालियान ने कहा है कि यमुना का जल बंटवारे में कोई प्रदेश अपने हिस्से का पानी नहीं छोड़ना चाहता है। इस माह में पानी का अकाल रहता है। किसानों को पानी की कमी रहती है। फिर भी पानी की किल्लत दूर करने के लिए टिहरी जैसे बांध बनाए जाने की केंद्र सरकार से वकालत करेंगे। नदियों में पानी की व्यवस्था कराने की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की है।
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दशहरा मेले को लेकर आसपास के लोगों को काफी उत्सुकता रहती है। धार्मिक मान्यताओं के कारण भी इसका काफी महत्व है। इस दिन श्रद्धालु स्नान और दान कर पुण्य कमाने की चाहत रखते हैं। काफी अरसों से हथिनीकुंड बैराज से दिल्ली की ओर जाने वाली यमुना गर्मी में सूख जाती है। अप्रैल से लेकर जुलाई और अगस्त के महीने तक पानी का अकाल रहता है। पहाड़ों पर बारिश होने के बाद ही यमुना नदी में पानी आता है। यमुना नदी में पानी सर्दियों में ही बढ़ता है। पिछले एक महीने से यमुना नदी सूखी पड़ी है। सूखी यमुना में बालू उड़ रही है। दशहरा मेले में ज्यादातर हरियाणा के यमुनानगर और वेस्ट यूपी के सरसावा, बिड़ौली, कैराना, बागपत में यमुना नदी में स्नान होता है। प्रत्येक रविवार व अमावस्या, कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालु यहां स्नान करने के लिए आते हैं। यमुना सूख जाने से श्रद्धालुओं में मायूसी है कि यमुना में कैैसे स्नान होगा। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता शिवराज सिंह ने कहा कि यमुना नदी सूखी हुई है। ताजेवाला बांध पर मात्र 160 क्यूसेक पानी जीव-जंतु के जीवन के लिए बचा है। पहाड़ों पर बारिश होने के बाद यमुना नदी में पानी आ पाएगा। दशहरा मेले के दौरान यमुना में पानी आना संभव नहीं लग रहा है।
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रोजी-रोटी पर पड़ेगा असर
पानी के अभाव में पूर्वी यमुना नहर भी पिछले एक सप्ताह से सूखी पड़ी है। यमुना नहर के किनारे मेरठ-करनाल मार्ग पर मुंडेटखुर्द पुल के पास दशहरे का तीन दिवसीय मेला लगता है। श्रद्धालु यमुना नहर में डुबकी लगाकर पुण्य कमाते हैं। दशहरे मेले के मद्देनजर मिट्टी के बर्तन बनाने वाले दुकानदार आ गए हैं। सिसौली के दुकानदार राजीव कहते हैं कि यमुना नहर में पानी नहीं से इस बार श्रद्धालुओं की कमी होगी, जिसका असर रोजी रोटी पर पड़ेगा। पूर्वी यमुना नहर के जिलेदार अंबुज कुमार ने कहा कि दशहरा मेले के मद्देनजर पूर्वी यामुना नहर में पानी छोड़ने की मांग की गई है। पिछले आठ दिन से नहर में पानी बंद है।
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पानी की व्यवस्था कराना सरकार की जिम्मेदारी
जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि यमुना लोगों के लिए आस्था और भावना का प्रतीक है। चार जून को होने वाले दशहरा मेले में केंद्र और प्रदेश सरकार को यमुना नदी में पानी की व्यवस्था करानी चाहिए।
टिहरी जैसे बांध बनाने के लिए होगी सिफारिश : बालियान
केंद्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री संजीव बालियान ने कहा है कि यमुना का जल बंटवारे में कोई प्रदेश अपने हिस्से का पानी नहीं छोड़ना चाहता है। इस माह में पानी का अकाल रहता है। किसानों को पानी की कमी रहती है। फिर भी पानी की किल्लत दूर करने के लिए टिहरी जैसे बांध बनाए जाने की केंद्र सरकार से वकालत करेंगे। नदियों में पानी की व्यवस्था कराने की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की है।