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Shamli News: नेत्र सर्जन नियुक्त, ऑपरेशन के लिए मेरठ रेफर हो रहे मरीज

Fri, 16 Jun 2023 06:12 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 16 Jun 2023 06:12 PM IST
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Eye surgeon appointed, patients being referred to Meerut for operation
=जिला अस्पताल व सीएचसी में माइक्रोस्कोप न होने से ऑपरेशन की नहीं मिल रही सुविधा
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=आंखों की जांच में रोजाना सामने आ रहे मोतियाबिंद के मरीज
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिला संयुक्त चिकित्सालय में नेत्र सर्जन की नियुक्ति होने के बाद भी आंख के मरीजों को मोतियाबिंद के ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल रही है। इसकी वजह यह है कि जिला अस्पताल व सीएचसी में ऑपरेशन के लिए माइक्रोस्कोप मशीन उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में आने वाले मरीजों की आंखों की जांच में रोजाना मोतियाबिंद के केस सामने आ रहे हैं, जिन्हें मेरठ रेफर किया जाता है।

पूर्वी यमुना नहर पटरी पर स्थित जिला संयुक्त चिकित्सालय में एक साल से अधिक समय पहले नेत्र सर्जन की नियुक्ति हो चुकी है, लेकिन मरीजों को मोतियाबिंद के ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल रही है। मरीजों की आंखों की जांच के लिए सीएचसी में तैनात नेत्र परीक्षण अधिकारी राजकुमार सप्ताह के पहले तीन दिन जिला अस्पताल और बाद के तीन दिन सीएचसी शामली में मरीजों की आंखों की जांच करते हैं। इस तरह से जिला अस्पताल में सिर्फ तीन दिन ही आंखों की जांच हो पाती है। आंखों की जांच में रोजाना 15 से 20 केस मोतियाबिंद के सामने आते हैं। सीएचसी में भी लगभग इतने ही केस मोतियाबिंद के मिल रहे हैं। इन सभी मरीजों को ऑपरेशन के लिए मेरठ मेडिकल रेफर किया जाता है। इसकी वजह ये है कि ऑपरेशन के लिए माइक्रोस्कोप न जिला अस्पताल में है और न ही सीएचसी में है। सीएचसी में दो साल पहले तक मोतियाबिंद के ऑपरेशन होते थे, लेकिन माइक्रोस्कोप मशीन निष्प्रयोज्य घोषित होने के बाद नई मशीन नहीं मिल सकी है। नेत्र परीक्षण अधिकारी राजकुमार ने बताया कि सीएचसी व जिला अस्पताल में रोजाना एक सौ से अधिक मरीजों की आंखों की जांच होती है। इनमें 15 से 20 मरीज मोतियाबिंद के पाए जाते हैं, जिन्हें मेरठ मेडिकल रेफर किया जाता है। सीएचसी में शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक 102 मरीजों की आंखों की जांच में 11 मोतियाबिंद के पाए गए। अन्य दिनों में भी मरीजों की स्थिति लगभग यही रहती है।
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मेरठ जाने में समय व धन होता है खर्च
शामली। जिन मरीजों को मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए मेरठ मेडिकल रेफर किया जाता है, उनमें अधिकांश मरीज मेरठ नहीं जा पाते। इसकी वजह ये है कि मेरठ जाने के लिए समय व धन दोनों खर्च होता है, जो मरीजों के लिए मुश्किल होता है। इनमें बहुत कम मरीज ही मेरठ जा पाते हैं। कुछ मरीज तो सामाजिक संस्थाओं के द्वारा लगाए जाने वाले शिविर में जाकर ऑपरेशन कराते हैं तो कुछ मरीज प्राइवेट अस्पतालों में महंगा शुल्क देकर अपना ऑपरेशन कराने को मजबूर रहते हैं।
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कोट
जिला अस्पताल में नेत्र सर्जन की तैनाती है, लेकिन आंखों के ऑपरेशन के लिए माइक्रोस्कॉप नहीं है। माइक्रोस्कोप के लिए शासन को कई बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन अभी तक मशीन नहीं मिली है।
- डॉ. अंजू जोधा, सीएमएस जिला अस्पताल।
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