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स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में सुधार की उम्मीद बेमानी
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शामली। नगरपालिका शामली द्वारा स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 में उतरने की तैयारी चल रही है। 2020 में स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ने के बाद नए साल में अच्छी रैंकिंग पाने के लिए स्वच्छता संबंधी कार्य करने के दावे किए गए थे, लेकिन उन पर अमल होता नहीं दिख रहा है।
इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 एक मार्च से शुरू हो रहा है। इसके लिए निकायों में तैयारी चल रही है। शामली नगरपालिका पिछली बार स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ गई थी। 2020 में पालिका को रैंकिंग 296 मिली थी जबकि 2019 में पालिका की रैंकिंग 211 थी। रैंकिंग में पिछड़ने के बाद पालिका ने स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छी रैंकिंग पाने के लिए स्वच्छता संबंधी कार्य करने के दावे किए थे। इसके बावजूद पालिका ने ऐसा कोई कार्य नहीं किया, जिससे रैंकिंग में सुधार की उम्मीद की जा सके। न तो कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था हो सकी है और न ही शहर के किसी वार्ड में एमआरएफ सेंटर बन पाया। शहर में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम चल रहा है, लेकिन सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग नहीं किया जा रहा है। शहर में सूखा-गीला कूड़ा डालने के लिए डस्टबिन नहीं लगे हैं और न ही घरों में अलग-अलग डस्टबिन रखे गए हैं। शहर के सामुदायिक शौचालयों की स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं है। ऐसी स्थिति में नगरपालिका को अच्छी रैंकिंग पाना बेमानी है।
कोट
स्वच्छता सर्वेक्षण में रैंकिंग में सुधार के लिए नगर निकायों में कार्य चल रहा है। सिटीजन फीड बैक और वॉल पेंटिंग कराई जा रही है। सामुदायिक शौचालयों के निरीक्षण में जो कमियां मिली है, उनमें सुधार कराया जा रहा है। कूड़ा निस्तारण प्लांट के निर्माण और एमआरएफ सेंटर बनाने की प्रक्रिया चल रही है।
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- उत्तम पूनिया, जिला समन्वयक स्वच्छ भारत मिशन।
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इस बार स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 एक मार्च से शुरू हो रहा है। इसके लिए निकायों में तैयारी चल रही है। शामली नगरपालिका पिछली बार स्वच्छता रैंकिंग में पिछड़ गई थी। 2020 में पालिका को रैंकिंग 296 मिली थी जबकि 2019 में पालिका की रैंकिंग 211 थी। रैंकिंग में पिछड़ने के बाद पालिका ने स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छी रैंकिंग पाने के लिए स्वच्छता संबंधी कार्य करने के दावे किए थे। इसके बावजूद पालिका ने ऐसा कोई कार्य नहीं किया, जिससे रैंकिंग में सुधार की उम्मीद की जा सके। न तो कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था हो सकी है और न ही शहर के किसी वार्ड में एमआरएफ सेंटर बन पाया। शहर में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम चल रहा है, लेकिन सूखा और गीला कूड़ा अलग-अलग नहीं किया जा रहा है। शहर में सूखा-गीला कूड़ा डालने के लिए डस्टबिन नहीं लगे हैं और न ही घरों में अलग-अलग डस्टबिन रखे गए हैं। शहर के सामुदायिक शौचालयों की स्थिति भी ज्यादा अच्छी नहीं है। ऐसी स्थिति में नगरपालिका को अच्छी रैंकिंग पाना बेमानी है।
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कोट
स्वच्छता सर्वेक्षण में रैंकिंग में सुधार के लिए नगर निकायों में कार्य चल रहा है। सिटीजन फीड बैक और वॉल पेंटिंग कराई जा रही है। सामुदायिक शौचालयों के निरीक्षण में जो कमियां मिली है, उनमें सुधार कराया जा रहा है। कूड़ा निस्तारण प्लांट के निर्माण और एमआरएफ सेंटर बनाने की प्रक्रिया चल रही है।
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- उत्तम पूनिया, जिला समन्वयक स्वच्छ भारत मिशन।