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दूसरे प्रदेशों में करना पड़ता है इंजीनियरिंग की पढ़ाई

Wed, 15 Sep 2021 12:26 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 15 Sep 2021 12:26 AM IST
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Engineering studies have to be done in other states
दूसरे प्रदेशों में करना पड़ता है इंजीनियरिंग की पढ़ाई
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शामली। जिले के युवाओं में इंजीनियर बनने की तरफ रुझान बढ़ रहा है, लेकिन जनपद में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए यहां पर संसाधन और सुविधाओं का अभाव है। आईआईटी करने का सपना संजोने वाले छात्रों को इंटर करने के बाद हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल आदि दूरदराज के राज्यों या बड़े शहरों की तरफ रुख करना मजबूरी बना हुआ है।
दोनों निजी इंजीनियरिंग कॉलेज हुए बंद
शामली जिले में पूर्व में दो निजी इंजीनियरिंग कॉलेज खुले थे। इन कॉलेजों के खुलने से युवाओं को इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन कुछ साल चलने के बाद दोनों निजी दो इंजीनियरिंग कॉलेज बंद हो चुके हैं। 2008 में सिल्वर बेल्स ग्रुप द्वारा झिंझाना में शामली इंस्टीट्यूट के नाम से इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू किया था। इस संस्थान में इलेक्ट्रानिक्स, कंप्यूटर साइंस, आईटी, मेकेनिकल इंजीनियरिंग के कोर्स उपलब्ध थे। वर्ष 2015 में यह कॉलेज बंद हो गया। इस कॉलेज के डायरेक्टर अतुल बंसल का कहना है कि शुरूआत में कॉलेज में छात्रों के एडमिशन हुए, लेकिन बाद में छात्रों की संख्या कम होती चली गई, जिस कारण कॉलेज बंद हो गया। 2008 में ही कैराना रोड पर रुड़की इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट टेक्नालाजी इंस्टीट्यूट (रेमटेक) खुला था, लेकिन यह कॉलेज भी 2019 में बंद हो गया। इस कालेज में कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रिकल, सिविल, मेकेनिकल, पॉलीटेक्निक आदि कोर्स थे। संस्थान में जनसंपर्क अधिकारी के पद पर रहे रविकांत शर्मा ने बताया कि छात्रों के एडमिशन कम होने की वजह से कालेज बंद हुआ था।
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सिंचाई विभाग से सेवानिवृत्त इंजीनियर रामौतार तायल का कहना है कि सरकार ने निजी इंजीनियरिंग कालेज खोलने को मंजूरी तो दी, लेकिन एक इंजीनियर बनने के लिए जो जरूरी संसाधन और सुविधाएं होनी चाहिए, उन पर ध्यान नहीं दिया जाता। जिले में पूर्व में जो कॉलेज खुले थे, उनमें वह क्वालिटी नहीं मिल पाई, जो इंजीनियरिंग के लिए होनी चाहिए। सरकार को कालेजों में संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए। इंजीनियर बनने के लिए क्वालिटी होना जरूरी है।
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ये बोले विद्यार्थी-
मोहल्ला काका नगर निवासी अमितेष वशिष्ठ चंडीगढ़ में रहकर इलेक्ट्रिक ब्रांच से बीटेक कर रहे हैं। उनका कहना है कि शामली में इंजीनियरिंग कालेज न होने के कारण उन्हें दूसरे राज्य में जाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। सरकार को चाहिए कि युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इंजीनियरिंग कालेज खोला जाए।
शहर के बुढ़ाना रोड निवासी अमन वर्मा ने यमुनानगर से बीटेक की है। साफ्टेवयर इंजीनियर अमन का कहना हैं कि जिले में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की सुविधा नहीं है और न ही कोचिंग है। इसलिए छात्रों को मजबूरी में बाहर दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। छात्रों की शिक्षा के लिए जिले में संसाधान और सुविधाएं मुहैया करानी चाहिए।
शहर के बड़ा बाजार निवासी सागर मित्तल सोलन हिमाचल प्रदेश में बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि बाहर दूर दूसरे राज्य में जाकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। जिले में छात्रों के लिए इस तरह की सुविधा नहीं है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।

मोहल्ला कौशांबी विहार निवासी आशी अग्रवाल गाजियाबाद में ईसीई ब्रांच से बीटेक कर रही हैं। उसका वहां पर तीसरा साल है। वह कहती हैं कि जिले में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की सुविधा न होने के कारण घर से दूर रहकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। अगर जिले में ही यह सुविधा मिले तो कम खर्च में अच्छी शिक्षा प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए सरकार को ध्यान देना चाहिए।
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