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नीलामी निरस्त के बाद भी मुनाफा कमाया
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Wed, 25 Oct 2017 12:48 AM IST
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Auction aborted
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। बिड़ौली की 400 बीघा निष्क्रांत भूमि (शत्रु संपत्ति) की सिर्फ नीलामी ही नहीं की गई थी, बल्कि आनन फानन में बैनामे भी करा दिए गए थे। इसके अलावा इसको नीलाम करने का विवाद हाईकोर्ट में लंबित है, बावजूद इसके नीलामी छुड़ाने वाले लोगों ने उक्त भूमि को ठेके पर दे दिया। कई साल से इस भूमि पर खेती करते रहे और मुनाफा कमाते रहे।
दरअसल, बिड़ौली स्थित करीब 400 बीघा निष्क्रांत भूमि को 2012 में नीलाम किया गया था। तब बिड़ौली और आसपास के लोगों ने नीलामी प्रक्रिया का विरोध भी किया था। बावजूद इसके तत्कालीन एडीएम रणधीर सिंह दुहण और अन्य अधिकारियों ने नीलामी करा दी थी। सोमवार को ही शासन ने उस मामले में उनको बर्खास्त कर दिया, जिससे एक बार फिर निष्क्रांत भूमि का जिन्न बोतल से बाहर निकल आया है।
अब जिला प्रशासन भी इसकी परतें उधेड़ने में लगा हुआ है। मंगलवार को अपर जिलाधिकारी शिव बहादुर सिंह ने इस प्रकरण की फाइल खंगाली। ताकि शासन द्वारा इस संबंध में जानकारी मांगने पर जवाब भेजा जा सके।
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वहीं, जांच में ये भी पता चला कि कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद भी यह भूमि ठेके पर दे दी गई। मंगलवार को बिड़ौली क्षेत्र के उस इलाके में पड़ताल की गई, तो पता चला कि 135 बीघा भूमि पर हरियाणा के सिंभालका निवासी परमेंद्र खेती कर रहा है। परमेंद्र का कहना है कि उन्होंने तो सुरेशपाल से उक्त भूमि 16 हजार रुपये प्रति किल्ला के हिसाब से ठेके पर ले रखा है।
एडीएम के नाम से खोले खाते में डाले थे 4.85 करोड़ रुपये
निष्क्रांत भूमि (शत्रु संपत्ति) को नीलाम करने पर प्राप्त धनराशि चार करोड़ 85 लाख रुपये सरकारी कोष में जमा नहीं कराए गए थे, बल्कि अपर जिला मजिस्ट्रेट (पदेन) के नाम से ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स शाखा में खोले गए खाते में जमा कराए गए थे। अब वह धनराशि ब्याज सहित बढ़कर पांच करोड़ 63 लाख रुपये हो गई है। सवाल उठता है कि नीलामी की रकम जमा करने के लिए नया खाता ही क्यों खुलवाया गया। इस धनराशि को सरकारी कोष में जमा क्यों नहीं कराया गया।
इन लोगों के नाम हुई थी बिड़ौली की 400 बीघ्ाा भूमि
बिड़ौली की करीब 400 बीघा (27.11 हेक्टेयर) निष्क्रांत भूमि के तीन बैनामे किए गए थे। इनमें पहला बैनामा 15.6800 हेक्टेयर भूमि जयपाल निर्वाल रोहतक, पवन कुमार दिल्ली, संजीव रोहतक और सुरेश कुमार रोहतक के नाम हुई, जो 2,66,60,000 रुपये में हुआ।
दूसरा बैनामा 8.8200 हेक्टेयर का बागपत के गांव बावली निवासी धर्मपाल, सुखबीर सिंह बड़ौत, हर्ष बड़ौत, ऋषिपाल बड़ौत, सुनील तोमर बड़ौत और सतेंद्र मलिक बड़ौत के नाम 1,50,00000 रुपये में हुआ। वहीं, तीसरा बैनामा 2.6100 हेक्टेयर भूमि का सुनील तोमर बावली, सतेंद्र मलिक बड़ौत, जगबीर सिंह फूसगढ़ करनाल और वेदपाल निवासी फूसगढ़ करनाल के नाम किया गया था।
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दरअसल, बिड़ौली स्थित करीब 400 बीघा निष्क्रांत भूमि को 2012 में नीलाम किया गया था। तब बिड़ौली और आसपास के लोगों ने नीलामी प्रक्रिया का विरोध भी किया था। बावजूद इसके तत्कालीन एडीएम रणधीर सिंह दुहण और अन्य अधिकारियों ने नीलामी करा दी थी। सोमवार को ही शासन ने उस मामले में उनको बर्खास्त कर दिया, जिससे एक बार फिर निष्क्रांत भूमि का जिन्न बोतल से बाहर निकल आया है।
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अब जिला प्रशासन भी इसकी परतें उधेड़ने में लगा हुआ है। मंगलवार को अपर जिलाधिकारी शिव बहादुर सिंह ने इस प्रकरण की फाइल खंगाली। ताकि शासन द्वारा इस संबंध में जानकारी मांगने पर जवाब भेजा जा सके।
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वहीं, जांच में ये भी पता चला कि कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद भी यह भूमि ठेके पर दे दी गई। मंगलवार को बिड़ौली क्षेत्र के उस इलाके में पड़ताल की गई, तो पता चला कि 135 बीघा भूमि पर हरियाणा के सिंभालका निवासी परमेंद्र खेती कर रहा है। परमेंद्र का कहना है कि उन्होंने तो सुरेशपाल से उक्त भूमि 16 हजार रुपये प्रति किल्ला के हिसाब से ठेके पर ले रखा है।
एडीएम के नाम से खोले खाते में डाले थे 4.85 करोड़ रुपये
निष्क्रांत भूमि (शत्रु संपत्ति) को नीलाम करने पर प्राप्त धनराशि चार करोड़ 85 लाख रुपये सरकारी कोष में जमा नहीं कराए गए थे, बल्कि अपर जिला मजिस्ट्रेट (पदेन) के नाम से ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स शाखा में खोले गए खाते में जमा कराए गए थे। अब वह धनराशि ब्याज सहित बढ़कर पांच करोड़ 63 लाख रुपये हो गई है। सवाल उठता है कि नीलामी की रकम जमा करने के लिए नया खाता ही क्यों खुलवाया गया। इस धनराशि को सरकारी कोष में जमा क्यों नहीं कराया गया।
इन लोगों के नाम हुई थी बिड़ौली की 400 बीघ्ाा भूमि
बिड़ौली की करीब 400 बीघा (27.11 हेक्टेयर) निष्क्रांत भूमि के तीन बैनामे किए गए थे। इनमें पहला बैनामा 15.6800 हेक्टेयर भूमि जयपाल निर्वाल रोहतक, पवन कुमार दिल्ली, संजीव रोहतक और सुरेश कुमार रोहतक के नाम हुई, जो 2,66,60,000 रुपये में हुआ।
दूसरा बैनामा 8.8200 हेक्टेयर का बागपत के गांव बावली निवासी धर्मपाल, सुखबीर सिंह बड़ौत, हर्ष बड़ौत, ऋषिपाल बड़ौत, सुनील तोमर बड़ौत और सतेंद्र मलिक बड़ौत के नाम 1,50,00000 रुपये में हुआ। वहीं, तीसरा बैनामा 2.6100 हेक्टेयर भूमि का सुनील तोमर बावली, सतेंद्र मलिक बड़ौत, जगबीर सिंह फूसगढ़ करनाल और वेदपाल निवासी फूसगढ़ करनाल के नाम किया गया था।