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Shamli News: बाढ़ की देकर दुहाई, बेटी की शादी पीछे हटाई
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- हर किसी की जुबां पर बाढ़ का दर्द, आंखों में अधूरे सपनों को पूरा करने की आस
- यमुना के पानी से फसलें जलमग्न होने के बाद जुबां पर आ रहा भड़ी गांव के ग्रामीणों का दर्द
उदयवीर चौधरी
चौसाना(शामली)। बाढ़ का दर्द, बांध पर बीत रही पीढ़ियां, लेकिन फिर भी उम्मीदों व आस पर जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं भड़ी गांव के ग्रामीण। भडी में यमुना के उफान में कई परिवारों की भूमि पर खड़ी फसल तेज बहाव में बह गईं। उनमें से कई परिवारों को अपनी अपनी बेटियों की आगामी कुछ दिनों के भीतर शादियां करनी थी, लेकिन अब टालना पड़ रहा है। ऐसे परिवारों का दर्द आंसुओं में बयां हो रहा है।
किसान कहते हैं कि वक्त सारे घाव भर देता हैं, पर सच तो यही है कि हम समय के साथ जीना सीख जाते हैं। जी हां, यही हाल होता है बांध के किनारे रहकर जीवन यापन करने वाले परिवारों का। पहाड़ी व मैदानी इलाकों में पिछले दिनों हुई लगातार बारिश के बाद यमुना नदी का जलस्तर उफान पर आ गया। जिसमें यमुना किनारे खेती करने वाले गांव भडी के किसानों की भी सैकड़ों बीघा फसल यमुना के तेज बहाव में बह गई। जिसमें कुछ ऐसे भी परिवार हैं जिनके पास पांच-छह बीघा कृषि भूमि है और उन्हें बेटियाें की शादी भी करनी थी।
इनमें इकबाल पुत्र जफरू की पांच संतान हैं और खेती ही परिवार को चलाने का एकमात्र साधन है। बेटी सब्बी की शादी भी 15 दिनों के बाद करनी थी। सबिला पत्नी अनवर के पास पांच बीघा भूमि है, जिस पर धान की फसल थी और अब घर चलाने में भी दिक्कतें आ रही हैं। यासीन पुत्र नूसा के पास पांच बीघा भूमि हैं, जिस पर धान की फसल खड़ी थी, लेकिन जल प्रलय में सब बह गया। यासीन को अपनी बेटी इमराना की शादी करनी थी और रिश्ता भी तय हो चुका था। सकील पुत्र नूरा की छह बीघा भूमि पर धान की फसल पैदा की थी, लेकिन यमुना में बहने के कारण बेटी की शादी को टालना पड़ा। फजरा पुत्र सफिया के पास 6 बीघा भूमि पर धान की फसल खड़ी थी। फसल पकने के बाद बेटी हसरून की शादी होनी थी, लेकिन पैसे के अभाव में शादी के समय को बदलने की बातें दोनों परिवारों में हो रही है।
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- यमुना के पानी से फसलें जलमग्न होने के बाद जुबां पर आ रहा भड़ी गांव के ग्रामीणों का दर्द
उदयवीर चौधरी
चौसाना(शामली)। बाढ़ का दर्द, बांध पर बीत रही पीढ़ियां, लेकिन फिर भी उम्मीदों व आस पर जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं भड़ी गांव के ग्रामीण। भडी में यमुना के उफान में कई परिवारों की भूमि पर खड़ी फसल तेज बहाव में बह गईं। उनमें से कई परिवारों को अपनी अपनी बेटियों की आगामी कुछ दिनों के भीतर शादियां करनी थी, लेकिन अब टालना पड़ रहा है। ऐसे परिवारों का दर्द आंसुओं में बयां हो रहा है।
किसान कहते हैं कि वक्त सारे घाव भर देता हैं, पर सच तो यही है कि हम समय के साथ जीना सीख जाते हैं। जी हां, यही हाल होता है बांध के किनारे रहकर जीवन यापन करने वाले परिवारों का। पहाड़ी व मैदानी इलाकों में पिछले दिनों हुई लगातार बारिश के बाद यमुना नदी का जलस्तर उफान पर आ गया। जिसमें यमुना किनारे खेती करने वाले गांव भडी के किसानों की भी सैकड़ों बीघा फसल यमुना के तेज बहाव में बह गई। जिसमें कुछ ऐसे भी परिवार हैं जिनके पास पांच-छह बीघा कृषि भूमि है और उन्हें बेटियाें की शादी भी करनी थी।
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इनमें इकबाल पुत्र जफरू की पांच संतान हैं और खेती ही परिवार को चलाने का एकमात्र साधन है। बेटी सब्बी की शादी भी 15 दिनों के बाद करनी थी। सबिला पत्नी अनवर के पास पांच बीघा भूमि है, जिस पर धान की फसल थी और अब घर चलाने में भी दिक्कतें आ रही हैं। यासीन पुत्र नूसा के पास पांच बीघा भूमि हैं, जिस पर धान की फसल खड़ी थी, लेकिन जल प्रलय में सब बह गया। यासीन को अपनी बेटी इमराना की शादी करनी थी और रिश्ता भी तय हो चुका था। सकील पुत्र नूरा की छह बीघा भूमि पर धान की फसल पैदा की थी, लेकिन यमुना में बहने के कारण बेटी की शादी को टालना पड़ा। फजरा पुत्र सफिया के पास 6 बीघा भूमि पर धान की फसल खड़ी थी। फसल पकने के बाद बेटी हसरून की शादी होनी थी, लेकिन पैसे के अभाव में शादी के समय को बदलने की बातें दोनों परिवारों में हो रही है।
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