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Shamli News: सर्द मौसम में आंखों में हो रही ड्राइनेस, एलर्जी कर रही परेशान
Fri, 12 Jan 2024 12:25 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Fri, 12 Jan 2024 12:25 AM IST
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शामली। सर्दी में खांसी और बुखार के साथ-साथ लोग ड्राइनेस, एलर्जी की चपेट में आ रहे हैं। सीएचसी और जिला अस्पताल में मरीज पहुंच रहे हैं। दोनों स्थानों पर प्रतिदिन 140 से अधिक बच्चे और बड़े उपचार कराने के लिए पहुंच रहे हैं। नेत्र रोग विशेषज्ञ लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
नेत्र परीक्षण अधिकारी राजकुमार ने बताया कि हर रोज 30 से चालीस मरीज ड्राइनेस और एलर्जी के पहुंच रहे हैं। ठंड के मौसम में हवा में नमी कम हो जाती है। इसके चलते आंखें सूख जाती हैं और इनमें खुजली होने लगती है। जब हम खुजली करने के लिए अंगुली आदि का आंख में प्रयोग करते हैं तो इनमें चिपके बैक्टीरिया आंखों में संक्रमण पैदा कर देते हैं। यही नहीं अधिकांश लोग ठंड से बचने के लिए हीटर चलाते हैं। अलाव सेका जाता है। जबकि इस मौसम में हवा में नमी का स्तर कम होता है। हीटर और अलाव इस नमी के स्तर को और कम कर देता है। इससे आंखों की नमी कम हो जाती है। अलाव का धुआं आंखों और फेफड़े दोनों को प्रभावित करता है तथा आंखों में जलन पैदा करता है। इससे आंखों में खुजली बढ़ती है और आंखें लाल रहने लगती हैं।
इस समय हवा में घुली धूल व धुएं की परतें आंखों में सूखापन, जलन के साथ पानी गिरने, खुजली, कीचड़ जैसी समस्याओं को उत्पन्न कर रही हैं। इसलिए इस मौसम में भी आंखों की देखभाल अधिक जरूरी है। हम कुछ सावधानी बरत कर इस मौसम में भी आंखों को स्वस्थ रख सकते हैं।
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सुरक्षा उपायों को साथ लेकर चलें
नेत्र रोग विशेषज्ञ ने बताया कि सर्द मौसम में आंखों को सबसे अधिक खतरा बाहर निकलने पर होता है। क्योंकि ठंडी हवा सीधे आंखों में घुसती है और उस हवा में घुले-मिले धूल कण और धुआं व्यक्ति को प्रभावित करते हैं। इसकी वजह से आंखों की तकलीफ अधिक बढ़ जाती है। बचने के लिए जरूरी है कि जब घर से बाहर निकलें तो आंखों पर चश्मा जरूर पहनें। महिलाओं को शृंगार करते समय ध्यान रखना चाहिए कि इन दिनों वे आंखों में काजल, मस्कारा आदि का इस्तेमाल करने से बचें। इन सौंदर्य प्रसाधनों में बाहर के धूल कण और उनमें शामिल बैक्टीरिया आदि के चिपक कर आंखों में परेशानी पैदा करने का खतरा अधिक रहता है। थोड़ी-थोड़ी देर में गुनगुना पानी पीते रहें। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती और गले में बैक्टीरिया आदि का संक्रमण होने की आशंका समाप्त हो जाती है। जिला अस्पताल की सीएमएस डाॅ. अंजू जोधा का कहना है कि ड्राइनेस के मरीज बढ़े हैं। 100 से अधिक मरीज जिला अस्पताल में पहुंच रहे हैं।
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नेत्र परीक्षण अधिकारी राजकुमार ने बताया कि हर रोज 30 से चालीस मरीज ड्राइनेस और एलर्जी के पहुंच रहे हैं। ठंड के मौसम में हवा में नमी कम हो जाती है। इसके चलते आंखें सूख जाती हैं और इनमें खुजली होने लगती है। जब हम खुजली करने के लिए अंगुली आदि का आंख में प्रयोग करते हैं तो इनमें चिपके बैक्टीरिया आंखों में संक्रमण पैदा कर देते हैं। यही नहीं अधिकांश लोग ठंड से बचने के लिए हीटर चलाते हैं। अलाव सेका जाता है। जबकि इस मौसम में हवा में नमी का स्तर कम होता है। हीटर और अलाव इस नमी के स्तर को और कम कर देता है। इससे आंखों की नमी कम हो जाती है। अलाव का धुआं आंखों और फेफड़े दोनों को प्रभावित करता है तथा आंखों में जलन पैदा करता है। इससे आंखों में खुजली बढ़ती है और आंखें लाल रहने लगती हैं।
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इस समय हवा में घुली धूल व धुएं की परतें आंखों में सूखापन, जलन के साथ पानी गिरने, खुजली, कीचड़ जैसी समस्याओं को उत्पन्न कर रही हैं। इसलिए इस मौसम में भी आंखों की देखभाल अधिक जरूरी है। हम कुछ सावधानी बरत कर इस मौसम में भी आंखों को स्वस्थ रख सकते हैं।
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सुरक्षा उपायों को साथ लेकर चलें
नेत्र रोग विशेषज्ञ ने बताया कि सर्द मौसम में आंखों को सबसे अधिक खतरा बाहर निकलने पर होता है। क्योंकि ठंडी हवा सीधे आंखों में घुसती है और उस हवा में घुले-मिले धूल कण और धुआं व्यक्ति को प्रभावित करते हैं। इसकी वजह से आंखों की तकलीफ अधिक बढ़ जाती है। बचने के लिए जरूरी है कि जब घर से बाहर निकलें तो आंखों पर चश्मा जरूर पहनें। महिलाओं को शृंगार करते समय ध्यान रखना चाहिए कि इन दिनों वे आंखों में काजल, मस्कारा आदि का इस्तेमाल करने से बचें। इन सौंदर्य प्रसाधनों में बाहर के धूल कण और उनमें शामिल बैक्टीरिया आदि के चिपक कर आंखों में परेशानी पैदा करने का खतरा अधिक रहता है। थोड़ी-थोड़ी देर में गुनगुना पानी पीते रहें। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती और गले में बैक्टीरिया आदि का संक्रमण होने की आशंका समाप्त हो जाती है। जिला अस्पताल की सीएमएस डाॅ. अंजू जोधा का कहना है कि ड्राइनेस के मरीज बढ़े हैं। 100 से अधिक मरीज जिला अस्पताल में पहुंच रहे हैं।