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प्रभारी मंत्री की ‘डोज’ पर भी चिकित्सक हैं बेपरवाह
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शामली सीएचसी में पर्ची बनवाने के लिये लगी भीड
- फोटो : SHAMLI
शामली। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामली में जिले के प्रभारी मंत्री अजीत सिंह पाल के दौरे के बाद भी बाहर की दवाएं लिखने का खेल बंद नहीं हुआ है। प्रभारी मंत्री के सामने मरीजों ने बाहर की दवा लिखने की शिकायत की थी। इसके बाद भी अस्पताल की व्यवस्थाओं में कोई सुधार दिखाई नहीं दिया।
दो दिन पहले मंगलवार को जिले के प्रभारी मंत्री प्रदेश के इलेक्ट्रानिक सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री अजीत सिंह पाल ने सीएचसी शामली का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान मरीजों ने मंत्री के सामने खुलकर बाहर की दवा लिखने की शिकायत करते हुए डाक्टरों की अलग से लिखी गई छोटी पर्ची भी दिखाई थी। मंत्री ने शिकायतों पर संज्ञान लेने की बात कही थी। मंत्री के दौरे के दो दिन बाद अमर उजाला ने अस्पताल की पड़ताल की तो पहले की तरह मरीजों को बाहर की दवा लिखी जा रही थी। यहां तक कि खांसी, खुजली और एलर्जी तक की दवाएं बाहर भी बाहर की लिखी गई थी। करीब दो माह पहले 19 जून को शासन के प्रमुख सचिव कृषि अमित मोहन प्रसाद के निरीक्षण के दौरान भी सीएचसी में बाहर की दवा लिखने की मरीजों ने शिकायत की थी, लेकिन बाहर की दवा लिखने के पीछे का कमीशनबाजी का खेल बंद नहीं हो सका।
केस एक
गांव मुंडभर निवासी वंश ने बताया कि वह फुंसी और खुजली की दवा लेने अस्पताल आए हैं। डॉक्टरों ने छोटी पर्ची पर बाहर की दवा लिख दी है। डॉक्टर ने उनसे कहा कि बाहर की दवा से जल्दी ठीक हो जाओगे। वे तो यह सोचकर आए थे कि अस्पताल से दवा मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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केस दो
गांव ब्रह्मखेड़ा निवासी सौरभ सीएचसी में खुजली की दवा लेने पहुंचे। सौरभ ने बताया कि उन्हें कुछ दवा अस्पताल से दी गई जबकि दूसरी सफेद रंग की छोटी पर्ची पर बाहर की महंगी दवा लिखी हैै।
केस तीन
शहर के मोहल्ला बड़ी आल निवासी महिला अपने छह साल के बच्चे शगुन का उपचार कराने के लिए आई थी। महिला ने बताया कि डाक्टर ने कहा कि अस्पताल में दवा हल्की है। बाहर की अच्छी दवा से जल्दी ठीक हो जाएगा। डाक्टर ने बाहर की दवा लिख दी है। वह जन औषधि केंद्र पर गई तो बताया कि बाहर के मेडिकल स्टोर की दवा लिखी है।
केस चार
गांव सिक्का निवासी रामनिवास अपने चार साल के बेटे आशीष और दो साल की बेटी आयुषी को खांसी जुकाम होने पर उपचार के लिए आया। रामनिवास ने बताया कि कुछ दवा तो अस्पताल से मिल गई, लेकिन पीने की दवा बाहर से लिखी गई है। इसके अलावा गांव कंजरहेड़ी निवासी मुनेश ने बताया कि डाक्टर ने पर्चे पर दवा लिख दी है, लेकिन अस्पताल में खांसी की दवा खत्म होना बताया है। उसने पूछा कब तक मिलेगी, तो कुछ नहीं बताया। वह कई बार अस्पताल आ चुकी है, लेकिन दवा नहीं मिली।
नया तरीका : सरकारी पर्ची पर डबल राइट का निशान
सीएचसी में डाक्टरों ने बाहर की दवा लिखने का नया तरीका निकाला है। सरकारी पर्ची पर ही बाहर की दवा लिखने के भी कई मामले सामने आए। सरकारी पर्ची पर जो बाहर की दवा लिखी गई थी, उस पर डबल राइट का निशान लगाया गया था। डबल राइट के निशान से शायद कोई अलग पहचान बनाई गई थी।
कोट
सरकारी अस्पताल में खांसी, जुकाम, एलर्जी, खुजली समेत लगभग सभी दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। डाक्टरों को बाहर की दवा लिखने के लिए मना किया गया है। इसके बाद भी अगर बाहर की दवा लिखी जा रही है तो इसकी जांच कराई जाएगी। जो दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं है, उसे जन औषधि केंद्र से खरीदने के लिए लिखा जा सकता है। - डॉ. संजय भटनागर, सीएमओ।
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दो दिन पहले मंगलवार को जिले के प्रभारी मंत्री प्रदेश के इलेक्ट्रानिक सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री अजीत सिंह पाल ने सीएचसी शामली का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान मरीजों ने मंत्री के सामने खुलकर बाहर की दवा लिखने की शिकायत करते हुए डाक्टरों की अलग से लिखी गई छोटी पर्ची भी दिखाई थी। मंत्री ने शिकायतों पर संज्ञान लेने की बात कही थी। मंत्री के दौरे के दो दिन बाद अमर उजाला ने अस्पताल की पड़ताल की तो पहले की तरह मरीजों को बाहर की दवा लिखी जा रही थी। यहां तक कि खांसी, खुजली और एलर्जी तक की दवाएं बाहर भी बाहर की लिखी गई थी। करीब दो माह पहले 19 जून को शासन के प्रमुख सचिव कृषि अमित मोहन प्रसाद के निरीक्षण के दौरान भी सीएचसी में बाहर की दवा लिखने की मरीजों ने शिकायत की थी, लेकिन बाहर की दवा लिखने के पीछे का कमीशनबाजी का खेल बंद नहीं हो सका।
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केस एक
गांव मुंडभर निवासी वंश ने बताया कि वह फुंसी और खुजली की दवा लेने अस्पताल आए हैं। डॉक्टरों ने छोटी पर्ची पर बाहर की दवा लिख दी है। डॉक्टर ने उनसे कहा कि बाहर की दवा से जल्दी ठीक हो जाओगे। वे तो यह सोचकर आए थे कि अस्पताल से दवा मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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केस दो
गांव ब्रह्मखेड़ा निवासी सौरभ सीएचसी में खुजली की दवा लेने पहुंचे। सौरभ ने बताया कि उन्हें कुछ दवा अस्पताल से दी गई जबकि दूसरी सफेद रंग की छोटी पर्ची पर बाहर की महंगी दवा लिखी हैै।
केस तीन
शहर के मोहल्ला बड़ी आल निवासी महिला अपने छह साल के बच्चे शगुन का उपचार कराने के लिए आई थी। महिला ने बताया कि डाक्टर ने कहा कि अस्पताल में दवा हल्की है। बाहर की अच्छी दवा से जल्दी ठीक हो जाएगा। डाक्टर ने बाहर की दवा लिख दी है। वह जन औषधि केंद्र पर गई तो बताया कि बाहर के मेडिकल स्टोर की दवा लिखी है।
केस चार
गांव सिक्का निवासी रामनिवास अपने चार साल के बेटे आशीष और दो साल की बेटी आयुषी को खांसी जुकाम होने पर उपचार के लिए आया। रामनिवास ने बताया कि कुछ दवा तो अस्पताल से मिल गई, लेकिन पीने की दवा बाहर से लिखी गई है। इसके अलावा गांव कंजरहेड़ी निवासी मुनेश ने बताया कि डाक्टर ने पर्चे पर दवा लिख दी है, लेकिन अस्पताल में खांसी की दवा खत्म होना बताया है। उसने पूछा कब तक मिलेगी, तो कुछ नहीं बताया। वह कई बार अस्पताल आ चुकी है, लेकिन दवा नहीं मिली।
नया तरीका : सरकारी पर्ची पर डबल राइट का निशान
सीएचसी में डाक्टरों ने बाहर की दवा लिखने का नया तरीका निकाला है। सरकारी पर्ची पर ही बाहर की दवा लिखने के भी कई मामले सामने आए। सरकारी पर्ची पर जो बाहर की दवा लिखी गई थी, उस पर डबल राइट का निशान लगाया गया था। डबल राइट के निशान से शायद कोई अलग पहचान बनाई गई थी।
कोट
सरकारी अस्पताल में खांसी, जुकाम, एलर्जी, खुजली समेत लगभग सभी दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। डाक्टरों को बाहर की दवा लिखने के लिए मना किया गया है। इसके बाद भी अगर बाहर की दवा लिखी जा रही है तो इसकी जांच कराई जाएगी। जो दवा अस्पताल में उपलब्ध नहीं है, उसे जन औषधि केंद्र से खरीदने के लिए लिखा जा सकता है। - डॉ. संजय भटनागर, सीएमओ।