{"_id":"5b672c9d4f1c1bb8538b7158","slug":"do-not-reach-the-state-school-how-do-you-study","type":"story","status":"publish","title_hn":"दथेड़ा राजकीय स्कूल में नहीं पहुंचते शिक्षक, कैसे हो पढ़ाई ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दथेड़ा राजकीय स्कूल में नहीं पहुंचते शिक्षक, कैसे हो पढ़ाई
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
Updated Sun, 05 Aug 2018 10:28 PM IST
विज्ञापन
दथेड़ा के हाईस्कूल में बिना शिक्षक के पढ़ाई करती छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शामली के चौसाना के दथेड़ा स्थित राजकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक स्कूल में छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। आरोप है कि यहां शिक्षक तो है लेकिन वे स्कूल नहीं आते। छात्राएं ही सुबह निर्धारित समय पर स्कूल खोलती है और बिना पढे़ ही खेलकूद कर घर लौट जाती है। शिक्षा विभाग की लापरवाही का आलम यह है कि कोई भी अधिकारी इस ओर ध्यान नही दे रहे है। यह स्थिति तब है जब स्कूल में कक्षा दस की करीब 40 छात्राएं पंजीकृत है।
विज्ञापन
चौसाना से सात किलोमीटर की दूर स्थित गांव दथेड़ा में राजकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक स्कूल है। ऊन तहसील के ग्रामीण क्षेत्र में कमालपुर खादर को छोड़कर केवल दथेड़ा में ही राजकीय कन्या हाईस्कूल है। करीब 20 गांवों की बालिकाओं के लिए शिक्षा पाने का यह एकमात्र स्थान है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग की लापरवाही से यहां पढ़ने वाली करीब 49 छात्राओं का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। स्कूल में कक्षा दस में 40 और कक्षा नौ में नौ छात्राओं के पंजीकरण है। कक्षा नौ की सभी छात्राओं का पंजीकरण भी इसी सत्र में हुआ है। इसके अलावा सबसे विकट स्थिति यह है कि इन छात्राओं को पढ़ाने के लिए कोई शिक्षक तैयार ही नहीं है। एकमात्र शिक्षिका सरिता तैनात है, लेकिन वह भी 27 जुलाई से दो माह के चिकित्सीय अवकाश पर चली गई है। वर्तमान हालात ऐसे है कि छात्राएं ही सुबह स्कूल खोलती है और शिक्षक नहीं होने से खेलकूद कर कुछ घंटे बाद घर लौट जाती है। इसके अलावा दुर्भाग्य की बात यह है कि पंजीकरण बढ़ाने के लिए सरकार लगातार सख्ती बरत रही है, लेकिन यहां पढ़ाई तक कराने वाला कोई नहीं है। पंजीकरण बढ़ाना तो दूर की बात है।
प्रधान का आरोप, गंभीर नहीं अधिकारी
ग्राम प्रधान रामपाल का कहना है कि स्कूल की एकमात्र शिक्षिका सरिता के छुट्टी पर चले जाने के बाद उन्होंने डीआईओएस अनुराधा से बात की थी। आरोप है कि डीआईओएस ने यह कहकर टरका दिया कि यह समस्या हमारी है कि स्कूल में बच्चों को कौन पढ़ाएगा। इसके बाद समय बीतने पर भी किसी भी शिक्षक की नियुक्ति स्कूल में नही की गई। इसकी वजह से बालिकाओं और उनके अभिभावकों में रोष बना हुआ है।
विज्ञापन
ड्यूटी पूरी करने आती है शिक्षिका
छात्राओं से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अकेली सरिता मैडम ही हमें पढ़ाती है। दस बजे से ग्यारह बजे की बीच वह आती है और लंच कर देती है। इसके बाद फिर से एक पीरियड लेकर छुट्टी करके घर चली जाती है। आरोप लगाया कि स्कूल भी हमें ही खोलना पड़ता है। पहले तो झाडू तक हमसे लगवाई जाती थी, लेकिन अब सफाई कर्मचारी लगाते है। छात्राओं के विरोध को सुनकर ग्राम प्रधान ने उन्हें चुप करा दिया। मगर, उन्होंने ग्राम प्रधान का भी विरोध किया और कहा कि अंकल पढ़ाई से हम पिछड़ रहे है। हम विरोध करेंगे।
राजनीति पढ़ रही शिक्षा पर भारी
डीआईओएस अनुराधा की माने तो क्षेत्र की राजनीति शिक्षा पर भारी पड़ रही है। डीआईओएस बताती है कि शिक्षिका सरिता के छुट्टी पर चले जाने के बाद एक शिक्षक की नियुक्ति की गई थी, लेकिन वो भी मेडिकल लगाकर छुट्टी पर चला गया। इसके बाद कई शिक्षकों की नियुक्ति की गई, लेकिन सभी ने राजनीतिक दबाव डलवाकर अपनी नियुक्ति को टलवा दिया। कोई अध्यापक वहां जाना नहीं चाहता है। वर्तमान में कमालपुर खादर इंटर कॉलेज में नियुक्त राहुल कुमार की नियुक्ति की गई है। उनको आज स्कूल में जाना था। अगर वह नहीं गए है, तो कारण पूछकर वहां शिक्षक की तैनाती की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन