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Shamli News: दांतों को रोगों से बचाव के लिए सोने से पहले न खाएं मीठा
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-स्काॅटिश इंटरनेशनल में स्वास्थ्य शिविर का दूसरा दिन
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। स्कॉटिश इंटरनेशनल स्कूल में दूसरे दिन भी विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की जांच के लिए शिविर लगाया गया। इस अवसर पर चिकित्सकों ने विद्यार्थियों को दांतों को रोगों से बचाने के लिए रात को सोने से पहले मीठा न खाने की सलाह दी।
प्रधानाचार्या आशु त्यागी ने बताया मंगलवार को दूसरे दिन भी नौ सदस्यीय चिकित्सकों की टीम ने विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की जांच की। जांच में चिकित्सक टीम ने पाया कि अधिकांश विद्यार्थी टॉफी या अन्य मीठा खाकर ब्रश नहीं करते या रात को सोने से पहले खाते हैं और फिर सो जाते हैं। इससे उनके दांतों में कैविटी, सड़न, सांस में दुर्गंध और अन्य बीमारियां पनपने लगती हैं। चिकित्सकों ने विद्यार्थियों को रात को सोने से पहले कुछ भी मीठा खाने या पीने से परहेज करने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल का अधिक प्रयोग न करने की सलाह देते हुए बताया कि इससे नेत्र संबंधी रोगों में वृद्धि हो रही है। उनकी आंखों से चिपचिपाहट के साथ जलन व रोशनी पर दुष्प्रभाव बढ़ रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की सलाह दी। शिविर के अंतिम दिन स्कूल के डायरेक्टर राजीव गर्ग और रितेश गर्ग ने चिकित्सकों का आभार जताते हुए कहा कि भविष्य में भी प्रत्येक छह माह के अंतराल पर इसी तरह के शिविरों का आयोजन करना हमारी प्राथमिकता में रहेगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। स्कॉटिश इंटरनेशनल स्कूल में दूसरे दिन भी विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की जांच के लिए शिविर लगाया गया। इस अवसर पर चिकित्सकों ने विद्यार्थियों को दांतों को रोगों से बचाने के लिए रात को सोने से पहले मीठा न खाने की सलाह दी।
प्रधानाचार्या आशु त्यागी ने बताया मंगलवार को दूसरे दिन भी नौ सदस्यीय चिकित्सकों की टीम ने विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की जांच की। जांच में चिकित्सक टीम ने पाया कि अधिकांश विद्यार्थी टॉफी या अन्य मीठा खाकर ब्रश नहीं करते या रात को सोने से पहले खाते हैं और फिर सो जाते हैं। इससे उनके दांतों में कैविटी, सड़न, सांस में दुर्गंध और अन्य बीमारियां पनपने लगती हैं। चिकित्सकों ने विद्यार्थियों को रात को सोने से पहले कुछ भी मीठा खाने या पीने से परहेज करने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल का अधिक प्रयोग न करने की सलाह देते हुए बताया कि इससे नेत्र संबंधी रोगों में वृद्धि हो रही है। उनकी आंखों से चिपचिपाहट के साथ जलन व रोशनी पर दुष्प्रभाव बढ़ रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने की सलाह दी। शिविर के अंतिम दिन स्कूल के डायरेक्टर राजीव गर्ग और रितेश गर्ग ने चिकित्सकों का आभार जताते हुए कहा कि भविष्य में भी प्रत्येक छह माह के अंतराल पर इसी तरह के शिविरों का आयोजन करना हमारी प्राथमिकता में रहेगा।
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