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अवमानना पर तहसीलदार अौर डीएम से जवाब-तलब
शामली/ ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Sat, 28 Nov 2015 11:51 PM IST
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कैराना । ऊन तहसील के सरकारी आवासों के लिए प्रशासन द्वारा अधिगृहीत दलित बस्ती के लिए पहले से ही आरक्षित साढ़े दस बीघा जमीन पर स्टे के बाद भी निर्माण कार्य नहीं रुका। पीड़ित ने हाईकोर्ट में अवमानना की याचिका डाली, जिसे स्वीकार करते हुए डीएम व तहसीलदार ऊन को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब मांगा है।
नवसृजित तहसील ऊन के सरकारी आवासों के लिए प्रशासन ने खसरा नंबर 1205 की साढ़े 10 बीघा जमीन अधिगृहीत की थी। मामले में वादी के अधिवक्ता सत्यपाल ने बताया कि जमीन पर काबिज वीरेंद्र सिंह आदि ने हाईकोर्ट के अधिवक्ता बीएस यादव के माध्यम से स्टे के लिए याचिका डाली थी। मामले की सुनवाई कोर्ट नंबर तीस में चली।
लंबी बहस के बाद सात अक्तूबर को जस्टिस सुनीता अग्रवाल ने स्टे जारी कर दिया। इसके लिए यूपी सरकार, कमिश्नर सहारनपुर, डीएम शामली व तहसीलदार ऊन को नोटिस जारी किया गया। स्टे आर्डर के बाद भी उक्त जमीन पर निर्माण कार्य जारी रहा, जिस पर वादी वीरेंद्र ने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में 16 नवंबर को अवमानना याचिका दाखिल की।
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दो दिन की सुनवाई के बाद 18 नवंबर को कोर्ट नंबर पांच के जस्टिस विवेक कुमार बिरला ने याचिका स्वीकार करते हुए डीएम ओपी वर्मा व तहसीलदार ऊन मदन लाल राठौर को नोटिस जारी किया है, जिसमें एक माह में स्टे का पालन न करने पर जवाब मांगा गया है।
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नवसृजित तहसील ऊन के सरकारी आवासों के लिए प्रशासन ने खसरा नंबर 1205 की साढ़े 10 बीघा जमीन अधिगृहीत की थी। मामले में वादी के अधिवक्ता सत्यपाल ने बताया कि जमीन पर काबिज वीरेंद्र सिंह आदि ने हाईकोर्ट के अधिवक्ता बीएस यादव के माध्यम से स्टे के लिए याचिका डाली थी। मामले की सुनवाई कोर्ट नंबर तीस में चली।
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लंबी बहस के बाद सात अक्तूबर को जस्टिस सुनीता अग्रवाल ने स्टे जारी कर दिया। इसके लिए यूपी सरकार, कमिश्नर सहारनपुर, डीएम शामली व तहसीलदार ऊन को नोटिस जारी किया गया। स्टे आर्डर के बाद भी उक्त जमीन पर निर्माण कार्य जारी रहा, जिस पर वादी वीरेंद्र ने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में 16 नवंबर को अवमानना याचिका दाखिल की।
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दो दिन की सुनवाई के बाद 18 नवंबर को कोर्ट नंबर पांच के जस्टिस विवेक कुमार बिरला ने याचिका स्वीकार करते हुए डीएम ओपी वर्मा व तहसीलदार ऊन मदन लाल राठौर को नोटिस जारी किया है, जिसमें एक माह में स्टे का पालन न करने पर जवाब मांगा गया है।