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प्रदूषण से खराब होने लगी जिले की हवा
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शामली क्षेत्र के गांव टिटौली में कूडे के ढेर पर जलती पुराली
- फोटो : SHAMLI
शामली। मौसम में ठंडक बढ़ने के साथ ही प्रदूषण का स्तर भी बढ़ने लगा है। सुबह आसमान में धुंध छाने लगी है और एयर क्वालिटी इंडेक्स बहुत खराब स्तर के पास पहुंच रहा है। यदि स्थिति पर जल्द नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और ज्यादा खराब होने लगेगी।
बीते वर्ष की तरह इस बार भी सर्दी के मौसम की शुरुआत से ही वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है। पिछले वर्ष दिवाली के बाद स्मॉग गहराया था, लेकिन इस बार अभी से सुबह के समय धुंध छाने लगी है। जनपद में एयर क्वालिटी इंडेक्स 290 से ऊपर जा रहा है। इसका अर्थ है कि जिले में वायु प्रदूषण खराब स्तर पर है। प्रदूषण का स्तर बहुत खराब होने पर एक्यूआई 300 या उससे ऊपर पहुंच जाता है। इन दिनों खेतों में पराली जलाने की घटनाएं भी बढ़ी हैं। जनपद में चार किसानों पर पराली जलाने पर जुर्माना भी लगाया जा चुका है। इसके बावजूद पराली जलाने की घटनाओं पर रोक नहीं लग रही। साथ ही जहां-तहां लोग कूड़े के ढेर में भी आग लगा रहे हैं।
उप निदेशक कृषि डॉ. शिव कुमार केसरी ने बताया कि खेतों में फसल अवशेष जलाने पर पूरी तरह पाबंदी है। जिले में संबंधित एसडीएम की अध्यक्षता में मोबाइल स्क्वॉड टीम बनी हुई है। राजस्व, कृषि एवं गन्ना विभाग के अधिकारी और कर्मचारी फसल अवशेष जलाने की घटनाओं की निगरानी कर रहे हैं। यदि कहीं पर फसल अवशेष जलाए जाते हैं, तो जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
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कुछ कोल्हू संचालक ईंधन के रूप में जला रहे पराली
शामली। पराली के खेतों में जलाने पर रोक है, लेकिन कुछ कोल्हू संचालकों ने ईंधन के रूप में पराली जलानी शुरू कर दी है।
गांव कंडेला के पास कुछ कोल्हुओं में पराली जलाई जा रही है। हरियाणा और यमुना खादर क्षेत्र के इलाकों में बड़े किसान कंबाइन मशीन से धान की कटाई कराते हैं। इससे पराली काफी बारीक हो जाती है। इसे कोल्हू संचालक उठाकर कोल्हुओं में ईंधन के रूप में प्रयोग कर रहे हैं। कोल्हू संचालकों का कहना है कि वह हरियाणा से पराली लेकर आते हैं और इसका प्रयोग ईंधन के रूप में करते हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जेई विपुल कुमार ने बताया कि कोल्हू में ईंधन के रूप में पराली का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन खेत में पराली जलाने पर प्रतिबंध है।
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किसानों पर जुर्माना लगाने का किया विरोध
शामली। गांव डांगरोल में आयोजित किसानों की बैठक में किसान नेता राजन जावला ने किसानों पर पराली जलाने पर जुर्माना लगाने का विरोध किया। कहा कि किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए यंत्र नहीं मिल पाते। ऐसे में किसान मजबूरी में पराली जलाते हैं। किसानों की फसलों में होने वाला नुकसान तो शासन-प्रशासन को सेटेलाइट से नजर नहीं आता, जबकि फसल अवशेष जलाना एकदम दिख जाता है। प्रदूषण फैलाने पर जब मिल मालिकों पर कार्रवाई नहीं की जाती तो फिर किसानों पर क्यों की जा रही है। इस संबंध में एक ज्ञापन अधिकारियों को दिया जाएगा।
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लेखपालों को दिए कार्रवाई के निर्देश
ऊन। तहसीलदार रणवीर सिंह ने सभी लेखपालों को अपने-अपने क्षेत्रों में फसल अवशेष जलाने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। बताया कि एनजीटी ने फसलों के अवशेष जलाने पर रोक लगा रखी है। पराली और पत्ती जलाने पर दो एकड़ से कम भूमि पर 2500 रुपये, दो से पांच एकड़ भूमि पर 5000 तथा पांच एकड़ से ज्यादा भूमि पर प्रत्येक घटना में 15000 का जुर्माना लगाया जाएगा।
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बीते वर्ष की तरह इस बार भी सर्दी के मौसम की शुरुआत से ही वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है। पिछले वर्ष दिवाली के बाद स्मॉग गहराया था, लेकिन इस बार अभी से सुबह के समय धुंध छाने लगी है। जनपद में एयर क्वालिटी इंडेक्स 290 से ऊपर जा रहा है। इसका अर्थ है कि जिले में वायु प्रदूषण खराब स्तर पर है। प्रदूषण का स्तर बहुत खराब होने पर एक्यूआई 300 या उससे ऊपर पहुंच जाता है। इन दिनों खेतों में पराली जलाने की घटनाएं भी बढ़ी हैं। जनपद में चार किसानों पर पराली जलाने पर जुर्माना भी लगाया जा चुका है। इसके बावजूद पराली जलाने की घटनाओं पर रोक नहीं लग रही। साथ ही जहां-तहां लोग कूड़े के ढेर में भी आग लगा रहे हैं।
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उप निदेशक कृषि डॉ. शिव कुमार केसरी ने बताया कि खेतों में फसल अवशेष जलाने पर पूरी तरह पाबंदी है। जिले में संबंधित एसडीएम की अध्यक्षता में मोबाइल स्क्वॉड टीम बनी हुई है। राजस्व, कृषि एवं गन्ना विभाग के अधिकारी और कर्मचारी फसल अवशेष जलाने की घटनाओं की निगरानी कर रहे हैं। यदि कहीं पर फसल अवशेष जलाए जाते हैं, तो जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी।
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कुछ कोल्हू संचालक ईंधन के रूप में जला रहे पराली
शामली। पराली के खेतों में जलाने पर रोक है, लेकिन कुछ कोल्हू संचालकों ने ईंधन के रूप में पराली जलानी शुरू कर दी है।
गांव कंडेला के पास कुछ कोल्हुओं में पराली जलाई जा रही है। हरियाणा और यमुना खादर क्षेत्र के इलाकों में बड़े किसान कंबाइन मशीन से धान की कटाई कराते हैं। इससे पराली काफी बारीक हो जाती है। इसे कोल्हू संचालक उठाकर कोल्हुओं में ईंधन के रूप में प्रयोग कर रहे हैं। कोल्हू संचालकों का कहना है कि वह हरियाणा से पराली लेकर आते हैं और इसका प्रयोग ईंधन के रूप में करते हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जेई विपुल कुमार ने बताया कि कोल्हू में ईंधन के रूप में पराली का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन खेत में पराली जलाने पर प्रतिबंध है।
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किसानों पर जुर्माना लगाने का किया विरोध
शामली। गांव डांगरोल में आयोजित किसानों की बैठक में किसान नेता राजन जावला ने किसानों पर पराली जलाने पर जुर्माना लगाने का विरोध किया। कहा कि किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए यंत्र नहीं मिल पाते। ऐसे में किसान मजबूरी में पराली जलाते हैं। किसानों की फसलों में होने वाला नुकसान तो शासन-प्रशासन को सेटेलाइट से नजर नहीं आता, जबकि फसल अवशेष जलाना एकदम दिख जाता है। प्रदूषण फैलाने पर जब मिल मालिकों पर कार्रवाई नहीं की जाती तो फिर किसानों पर क्यों की जा रही है। इस संबंध में एक ज्ञापन अधिकारियों को दिया जाएगा।
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लेखपालों को दिए कार्रवाई के निर्देश
ऊन। तहसीलदार रणवीर सिंह ने सभी लेखपालों को अपने-अपने क्षेत्रों में फसल अवशेष जलाने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। बताया कि एनजीटी ने फसलों के अवशेष जलाने पर रोक लगा रखी है। पराली और पत्ती जलाने पर दो एकड़ से कम भूमि पर 2500 रुपये, दो से पांच एकड़ भूमि पर 5000 तथा पांच एकड़ से ज्यादा भूमि पर प्रत्येक घटना में 15000 का जुर्माना लगाया जाएगा।

शामली के गांव कंडेला कोल्हू में पराली जलाता किसान।- फोटो : SHAMLI