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Shamli News: लोक अदालत में पिघलीं रिश्तों की दूरियां, वर्षों पुराने विवादों का हुआ समाधान
Sun, 10 May 2026 01:11 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sun, 10 May 2026 01:11 AM IST
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कैराना। शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आई। वर्षों से अदालतों के चक्कर काट रहे लोगों के मामलों का आपसी सहमति से समाधान कराया गया। कहीं बिखरते रिश्ते फिर जुड़ गए तो कहीं पुराने बैंक ऋण के मामलों का निस्तारण होने से लोगों ने राहत की सांस ली।
शामली के मोहल्ला बड़ी आल निवासी श्रुति और बुलंदशहर निवासी शुभम सिंघल के बीच लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था। मामला परिवार न्यायालय में विचाराधीन था, लेकिन राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। समझौते के बाद पति-पत्नी दोबारा साथ रहने को तैयार हो गए। शामली निवासी सोनिया और उनके पति हिमांशु के बीच भी वर्ष 2024 से विवाद चल रहा था। लोक अदालत में समझाइश और बातचीत के बाद दोनों ने मनमुटाव भुलाकर फिर से साथ रहने की सहमति दे दी।
गांव रंगाना निवासी किसान पर बैंक ऑफ बड़ौदा का सात लाख रुपये का ऋण बकाया था। पिछले पांच वर्षों से बैंक वसूली का प्रयास कर रहा था। लोक अदालत में किसान ने साढ़े तीन लाख रुपये जमा कर मामला समाप्त करा लिया। गांव बरनावी निवासी किसान पर दस वर्षों से 1.35 लाख रुपये का बैंक ऋण बकाया था। किसान ने लोक अदालत में 70 हजार रुपये जमा कर समझौते के तहत मामले का निस्तारण कराया। गांव टिटौली निवासी एक ग्रामीण ने भी छह वर्षों से लंबित 27 हजार रुपये के बैंक ऋण मामले में पांच हजार रुपये जमा कर राहत पा ली।
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अधिकारियों का कहना है कि लोक अदालत के माध्यम से कम समय में आपसी सहमति से विवादों का समाधान होने से लोगों को आर्थिक और मानसिक राहत मिलती है।
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शामली के मोहल्ला बड़ी आल निवासी श्रुति और बुलंदशहर निवासी शुभम सिंघल के बीच लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था। मामला परिवार न्यायालय में विचाराधीन था, लेकिन राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। समझौते के बाद पति-पत्नी दोबारा साथ रहने को तैयार हो गए। शामली निवासी सोनिया और उनके पति हिमांशु के बीच भी वर्ष 2024 से विवाद चल रहा था। लोक अदालत में समझाइश और बातचीत के बाद दोनों ने मनमुटाव भुलाकर फिर से साथ रहने की सहमति दे दी।
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गांव रंगाना निवासी किसान पर बैंक ऑफ बड़ौदा का सात लाख रुपये का ऋण बकाया था। पिछले पांच वर्षों से बैंक वसूली का प्रयास कर रहा था। लोक अदालत में किसान ने साढ़े तीन लाख रुपये जमा कर मामला समाप्त करा लिया। गांव बरनावी निवासी किसान पर दस वर्षों से 1.35 लाख रुपये का बैंक ऋण बकाया था। किसान ने लोक अदालत में 70 हजार रुपये जमा कर समझौते के तहत मामले का निस्तारण कराया। गांव टिटौली निवासी एक ग्रामीण ने भी छह वर्षों से लंबित 27 हजार रुपये के बैंक ऋण मामले में पांच हजार रुपये जमा कर राहत पा ली।
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अधिकारियों का कहना है कि लोक अदालत के माध्यम से कम समय में आपसी सहमति से विवादों का समाधान होने से लोगों को आर्थिक और मानसिक राहत मिलती है।