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परिवार परामर्श केंद्र पर सुलहनामे से निस्तारित हो रहे विवाद
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शामली नगर पालिका में आयोजित एच्छिक ब्युरो में शिकायत करते सदस्य
- फोटो : SHAMLI
शामली। जनपद शामली में परिवार परामर्श केंद्र (ऐच्छिक ब्यूरो) का गठन हुए 10 साल पूरे होने पर सदस्यों ने खुशी मनाते हुए एक दूसरे को बधाई दी। ब्यूरो सदस्यों के प्रयास से पारिवारिक मामलों के विवाद का निस्तारण सुलहनामे के आधार पर कराया जा रहा है, जिससे टूटने के कगार पर पहुंच चुके घर फिर बसाने में सफलता मिली है। रविवार को केंद्र पर एक पारिवारिक विवाद का निस्तारण हुआ है।
28 सितंबर 2011 को मूल जनपद मुजफ्फरनगर से अलग कर शामली को जिला बनाया गया था। इसके बाद 16 अक्तूबर 2011 को पारिवारिक विवादों के निस्तारण के लिए परिवार परामर्श केंद्र (ऐच्छिक ब्यूरो) की कमेटी गठित की गई थी। रविवार को हुई ब्यूरो की बैठक में 22 मामलों की सुनवाई हुई, जिनमें एक मामले में सुलहनामा हुआ। ऐच्छिक ब्यूरो के संस्थापक सदस्य के रूप में वीना अग्रवाल, दीप शिखा चौधरी और डॉ. राजेंद्र गोयल आदि लगातार अपनी सेवा दे रहे हैं। समाजसेविका वीना अग्रवाल ने बताया कि प्रत्येक रविवार को 20 से 25 मामलों पर सुनवाई की जाती है। ब्यूरो सदस्यों द्वारा टूटने के कगार पर पहुंच चुके घरों को फिर बसाने की हर संभव कोशिश रहती है। इसके सकारात्मक परिणाम भी मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक साल में लगभग 200 मामले पारिवारिक विवाद के आते हैं, जिनमें लगातार प्रयास के बाद अधिकतर मामले आपसी सुलहनामे से निस्तारित होते हैं। पिछले कुछ समय से थानाभवन व कैराना में भी परिवार परामर्श केंद्रों पर पारिवारिक विवाद के मामलों का आपसी सुलहनामे से निस्तारण किया जाता है।
चार दंपती के बीच कराया समझौता
थानाभवन। परिवार समाधान केंद्र में समाज सेवियों की टीम ने चार दंपती के बीच टीम समझौता कराने में सफलता प्राप्त की। थाना परिसर में क्षेत्राधिकारी अमित सक्सेना के निर्देशन में प्रत्येक रविवार को होने वाले परिवार समाधान केंद्र का आयोजन किया गया। रविवार को विघटित परिवारों के समाधान के लिए 13 परिवारों को बुलाया गया। जिसमें समाजसेवियों की टीम ने परिवारों में समाधान का प्रयास किया। समाज सेवियों की टीम के प्रयास के बाद चार दंपती ने एक-दूसरे के साथ दोबारा नए जीवन की शुरूआत करने का निर्णय लिया। दंपती ने एक-दूसरे को माला पहनाकर व मिठाई खिलाई। इस दौरान दीवान रमा देवी, मास्टर रमेश चंद सैनी, डॉ. तौहिद हसन, फरजंद अली, हरीश प्रजापति आदि मौजूद रहे।
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28 सितंबर 2011 को मूल जनपद मुजफ्फरनगर से अलग कर शामली को जिला बनाया गया था। इसके बाद 16 अक्तूबर 2011 को पारिवारिक विवादों के निस्तारण के लिए परिवार परामर्श केंद्र (ऐच्छिक ब्यूरो) की कमेटी गठित की गई थी। रविवार को हुई ब्यूरो की बैठक में 22 मामलों की सुनवाई हुई, जिनमें एक मामले में सुलहनामा हुआ। ऐच्छिक ब्यूरो के संस्थापक सदस्य के रूप में वीना अग्रवाल, दीप शिखा चौधरी और डॉ. राजेंद्र गोयल आदि लगातार अपनी सेवा दे रहे हैं। समाजसेविका वीना अग्रवाल ने बताया कि प्रत्येक रविवार को 20 से 25 मामलों पर सुनवाई की जाती है। ब्यूरो सदस्यों द्वारा टूटने के कगार पर पहुंच चुके घरों को फिर बसाने की हर संभव कोशिश रहती है। इसके सकारात्मक परिणाम भी मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि एक साल में लगभग 200 मामले पारिवारिक विवाद के आते हैं, जिनमें लगातार प्रयास के बाद अधिकतर मामले आपसी सुलहनामे से निस्तारित होते हैं। पिछले कुछ समय से थानाभवन व कैराना में भी परिवार परामर्श केंद्रों पर पारिवारिक विवाद के मामलों का आपसी सुलहनामे से निस्तारण किया जाता है।
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चार दंपती के बीच कराया समझौता
थानाभवन। परिवार समाधान केंद्र में समाज सेवियों की टीम ने चार दंपती के बीच टीम समझौता कराने में सफलता प्राप्त की। थाना परिसर में क्षेत्राधिकारी अमित सक्सेना के निर्देशन में प्रत्येक रविवार को होने वाले परिवार समाधान केंद्र का आयोजन किया गया। रविवार को विघटित परिवारों के समाधान के लिए 13 परिवारों को बुलाया गया। जिसमें समाजसेवियों की टीम ने परिवारों में समाधान का प्रयास किया। समाज सेवियों की टीम के प्रयास के बाद चार दंपती ने एक-दूसरे के साथ दोबारा नए जीवन की शुरूआत करने का निर्णय लिया। दंपती ने एक-दूसरे को माला पहनाकर व मिठाई खिलाई। इस दौरान दीवान रमा देवी, मास्टर रमेश चंद सैनी, डॉ. तौहिद हसन, फरजंद अली, हरीश प्रजापति आदि मौजूद रहे।

शामली नगर पालिका में शिकायत सुनते ऐच्छिक ब्यूरो के सदस्य- फोटो : SHAMLI
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