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Shamli News: बेर की मिठास पर बीमारी का ग्रहण
Wed, 06 Mar 2024 12:49 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Wed, 06 Mar 2024 12:49 AM IST
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जलालाबाद। क्षेत्र ही नहीं देश-विदेशों तक मशहूर हसनपुर लुहारी के लड्डू बेरों की मिठास इस साल फीकी पड़ती नजर आ रही है। स्थिति ये है मौसम की मार के कारण बेरी को फंगस और फ्रूट फ्लाई नामक कीट ने अपने चंगुल में फंसा लिया है। जिस कारण कई ठेकेदारों ने अपने बाग बीच में ही छोड़ दिए हैं।
हसनपुर लुहारी के बेरों को गांव के साथ दूर दराज के इलाकों में भी लड्डू बेर लुहारी के नाम से बेचा जाता है। सिर्फ यहीं नहीं बल्कि कई लोग विदेशों में रह रहे अपने रिश्तेदारों के यहां भी लुहारी की इस मिठास को पहुंचाते हैं। लेकिन इस साल कम ही लोग लुहारी के बेरों की मिठास का आनंद ले सकेंगे। इस सीजन में अत्यधिक ठंड पड़ने के कारण बेर में फंगस की मार पड़ी। इससे काफी हद तक बेर का फल खराब होना शुरू हो गया। इसके बाद तापमान के परिवर्तन व वैज्ञानिक जानकारी के अभाव में ठेकेदार आधुनिक तरीके से बेरों की देखभाल नहीं कर सके। इस कारण बेर की पैदावार में तो इस बार कमी आई ही है साथ ही फ्रूट फ्लाई नाम कीट ने भी बेरी के बाग में अपने पांव पसार लिए हैं।
अब कम कोर आने ओर ऊपर से फल खराब होने के कारण बेरी की पैदावार में भारी गिरावट आई है। जिससे कई ठेकेदारों ने तो बीच सीजन में ही अपने बेरी के बाग छोड़ दिए हैं। बेर ठेकेदार वकील, मंगता, इस्लाम, मंजूर आदि का कहना है कि ऐसा पहले कभी नहीं देखा। फसल में इस बार 40 फीसदी या यूं कहें इससे भी अधिक पैदावार की गिरावट आई है। इस बार फायदा तो दूर की बात लागत भी वसूल नहीं हो पा रही। संवाद
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थोक में 45, फुटकर में 70 रुपये किलो
बेर की फसल बाजार में उपलब्ध है। ग्रामीण सुमित सैनी ने बताया कि आढ़त पर बेर का दाम 45 से 50 रुपये प्रति किलो का है। जबकि फुटकर में यह फल 65 से 70 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है।
होली व महाशिवरात्रि पर अहम
वर्तमान में बेर के फल का काफी महत्व होता है। स्वाद के लिए इस्तेमाल करने के साथ लोग महाशिवरात्रि व होली के पर्व पर पूजा में बेर का इस्तेमाल करते हैं।
बेर को रोग से बचाने के लिए कीटनाशक का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन कीटनाशक का प्रयोग करने के बाद करीब 25 दिन तक उन्हें नहीं तोड़ना चाहिए। इसके अलावा बेर वाले बाग में फ्रूट प्लाई ट्रैप लगाया जा सकता है। इससे बीमारी से निजात मिल सकती है।
-डॉ. संदीप चौधरी, प्रभारी केवीके शामली
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हसनपुर लुहारी के बेरों को गांव के साथ दूर दराज के इलाकों में भी लड्डू बेर लुहारी के नाम से बेचा जाता है। सिर्फ यहीं नहीं बल्कि कई लोग विदेशों में रह रहे अपने रिश्तेदारों के यहां भी लुहारी की इस मिठास को पहुंचाते हैं। लेकिन इस साल कम ही लोग लुहारी के बेरों की मिठास का आनंद ले सकेंगे। इस सीजन में अत्यधिक ठंड पड़ने के कारण बेर में फंगस की मार पड़ी। इससे काफी हद तक बेर का फल खराब होना शुरू हो गया। इसके बाद तापमान के परिवर्तन व वैज्ञानिक जानकारी के अभाव में ठेकेदार आधुनिक तरीके से बेरों की देखभाल नहीं कर सके। इस कारण बेर की पैदावार में तो इस बार कमी आई ही है साथ ही फ्रूट फ्लाई नाम कीट ने भी बेरी के बाग में अपने पांव पसार लिए हैं।
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अब कम कोर आने ओर ऊपर से फल खराब होने के कारण बेरी की पैदावार में भारी गिरावट आई है। जिससे कई ठेकेदारों ने तो बीच सीजन में ही अपने बेरी के बाग छोड़ दिए हैं। बेर ठेकेदार वकील, मंगता, इस्लाम, मंजूर आदि का कहना है कि ऐसा पहले कभी नहीं देखा। फसल में इस बार 40 फीसदी या यूं कहें इससे भी अधिक पैदावार की गिरावट आई है। इस बार फायदा तो दूर की बात लागत भी वसूल नहीं हो पा रही। संवाद
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थोक में 45, फुटकर में 70 रुपये किलो
बेर की फसल बाजार में उपलब्ध है। ग्रामीण सुमित सैनी ने बताया कि आढ़त पर बेर का दाम 45 से 50 रुपये प्रति किलो का है। जबकि फुटकर में यह फल 65 से 70 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है।
होली व महाशिवरात्रि पर अहम
वर्तमान में बेर के फल का काफी महत्व होता है। स्वाद के लिए इस्तेमाल करने के साथ लोग महाशिवरात्रि व होली के पर्व पर पूजा में बेर का इस्तेमाल करते हैं।
बेर को रोग से बचाने के लिए कीटनाशक का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन कीटनाशक का प्रयोग करने के बाद करीब 25 दिन तक उन्हें नहीं तोड़ना चाहिए। इसके अलावा बेर वाले बाग में फ्रूट प्लाई ट्रैप लगाया जा सकता है। इससे बीमारी से निजात मिल सकती है।
-डॉ. संदीप चौधरी, प्रभारी केवीके शामली