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Shamli News: आधार-खतौनी में अंतर बना बाधा, शामली में अटकी फार्मर रजिस्ट्री
Fri, 26 Dec 2025 12:30 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Fri, 26 Dec 2025 12:30 AM IST
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शामली। किसानों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिलाने के लिए शुरू किए गए फार्मर रजिस्ट्री अभियान में शामली जिला लक्ष्य से काफी पीछे चल रहा है। करीब 11 माह बीतने के बाद भी जिले में केवल 59.71 प्रतिशत किसानों की ही फार्मर रजिस्ट्री हो सकी है। आधार कार्ड, बैंक खाते और खतौनी में नाम का मिलान न होना, ओटीपी न आना और तकनीकी खामियां इसकी बड़ी वजह बन रही हैं, जिससे किसान और सीएससी संचालक दोनों परेशान हैं।
उत्तर प्रदेश में एग्री स्टैक योजना के तहत फार्मर रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत 18 नवंबर 2024 को की गई थी। इसका उद्देश्य किसानों का डिजिटल डाटाबेस तैयार करना है, ताकि उन्हें पीएम किसान सम्मान निधि, केसीसी, फसल बीमा, एमएसपी समेत अन्य योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से मिल सके।
जिले में 1.31 लाख किसानों की होनी है रजिस्ट्री
जिले में केवाईसी धारक कुल 1,31,584 किसान हैं, जिनमें से अब तक सिर्फ 84,535 किसानों की ही फार्मर रजिस्ट्री हो पाई है। हाल ही में जारी प्रदेश स्तरीय रैंकिंग में शामली को 36वां स्थान मिला है। वहीं बस्ती जिले ने 80.36 प्रतिशत रजिस्ट्री के साथ पहला, गाजियाबाद ने 79.85 प्रतिशत के साथ दूसरा और सीतापुर ने 79.39 प्रतिशत के साथ तीसरा स्थान हासिल किया है।
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सीएससी संचालक भी परेशान
सीएससी संचालक याकूब खान और कैराना के जिशान ने बताया कि अधूरी रजिस्ट्री की सूची में कई ऐसे नाम हैं, जो मृतक हैं या जिनके आधार कार्ड और खतौनी में नाम मेल नहीं खाते। कई किसान यह समझ रहे हैं कि उनकी रजिस्ट्री पहले ही हो चुकी है, जबकि वास्तव में प्रक्रिया अधूरी है। इससे बार-बार बुलाने पर भी वे नहीं आ रहे हैं।
योजनाओं का मिलेगा सीधा लाभ
कृषि अधिकारी प्रदीप यादव ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री होने के बाद किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि, केसीसी, फसल बीमा, एमएसपी जैसी योजनाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। किसान जन सेवा केंद्रों पर जाकर या मोबाइल में फार्मर रजिस्ट्री एप के माध्यम से खुद भी पंजीकरण करा सकते हैं।
रजिस्ट्री के लिए देनी होगी यह जानकारी
फार्मर रजिस्ट्री में किसान का नाम, पिता का नाम, सभी गाटा संख्या, सह खातेदार की स्थिति में अंश, मोबाइल नंबर, आधार संख्या और ई-केवाईसी का विवरण देना अनिवार्य है।
बोले किसान
किसान सुधीर शर्मा ने बताया कि कृषि विभाग के पोर्टल पर उनकी ई-केवाईसी पूरी है, लेकिन जमीन के कागजातों में नाम अलग होने से राजस्व विभाग के पोर्टल पर भूमि का ब्यौरा अपलोड नहीं हो पा रहा है।
वहीं किसान मो. आकिल का कहना है कि वे कई बार सीएससी और तहसील के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन आधार और खतौनी में नाम अलग होने से फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है।
लेखपाल मुजक्किर खान ने बताया कि यदि जमीन की नकल में पूर्वजों का नाम दर्ज है तो उप जिलाधिकारी स्तर से नाम दुरुस्त कराने की प्रक्रिया होती है। वहीं विरासत या पिता के नाम में त्रुटि होने पर तहसीलदार द्वारा सुधार कराया जा सकता है।
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उत्तर प्रदेश में एग्री स्टैक योजना के तहत फार्मर रजिस्ट्री अभियान की शुरुआत 18 नवंबर 2024 को की गई थी। इसका उद्देश्य किसानों का डिजिटल डाटाबेस तैयार करना है, ताकि उन्हें पीएम किसान सम्मान निधि, केसीसी, फसल बीमा, एमएसपी समेत अन्य योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से मिल सके।
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जिले में 1.31 लाख किसानों की होनी है रजिस्ट्री
जिले में केवाईसी धारक कुल 1,31,584 किसान हैं, जिनमें से अब तक सिर्फ 84,535 किसानों की ही फार्मर रजिस्ट्री हो पाई है। हाल ही में जारी प्रदेश स्तरीय रैंकिंग में शामली को 36वां स्थान मिला है। वहीं बस्ती जिले ने 80.36 प्रतिशत रजिस्ट्री के साथ पहला, गाजियाबाद ने 79.85 प्रतिशत के साथ दूसरा और सीतापुर ने 79.39 प्रतिशत के साथ तीसरा स्थान हासिल किया है।
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सीएससी संचालक भी परेशान
सीएससी संचालक याकूब खान और कैराना के जिशान ने बताया कि अधूरी रजिस्ट्री की सूची में कई ऐसे नाम हैं, जो मृतक हैं या जिनके आधार कार्ड और खतौनी में नाम मेल नहीं खाते। कई किसान यह समझ रहे हैं कि उनकी रजिस्ट्री पहले ही हो चुकी है, जबकि वास्तव में प्रक्रिया अधूरी है। इससे बार-बार बुलाने पर भी वे नहीं आ रहे हैं।
योजनाओं का मिलेगा सीधा लाभ
कृषि अधिकारी प्रदीप यादव ने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री होने के बाद किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि, केसीसी, फसल बीमा, एमएसपी जैसी योजनाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। किसान जन सेवा केंद्रों पर जाकर या मोबाइल में फार्मर रजिस्ट्री एप के माध्यम से खुद भी पंजीकरण करा सकते हैं।
रजिस्ट्री के लिए देनी होगी यह जानकारी
फार्मर रजिस्ट्री में किसान का नाम, पिता का नाम, सभी गाटा संख्या, सह खातेदार की स्थिति में अंश, मोबाइल नंबर, आधार संख्या और ई-केवाईसी का विवरण देना अनिवार्य है।
बोले किसान
किसान सुधीर शर्मा ने बताया कि कृषि विभाग के पोर्टल पर उनकी ई-केवाईसी पूरी है, लेकिन जमीन के कागजातों में नाम अलग होने से राजस्व विभाग के पोर्टल पर भूमि का ब्यौरा अपलोड नहीं हो पा रहा है।
वहीं किसान मो. आकिल का कहना है कि वे कई बार सीएससी और तहसील के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन आधार और खतौनी में नाम अलग होने से फार्मर आईडी नहीं बन पा रही है।
लेखपाल मुजक्किर खान ने बताया कि यदि जमीन की नकल में पूर्वजों का नाम दर्ज है तो उप जिलाधिकारी स्तर से नाम दुरुस्त कराने की प्रक्रिया होती है। वहीं विरासत या पिता के नाम में त्रुटि होने पर तहसीलदार द्वारा सुधार कराया जा सकता है।