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चंदेनामाल और खेड़ीकरमू में विकसित होगा घना जंगल

Sat, 18 Jul 2020 11:34 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jul 2020 11:34 PM IST
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Dense forest will develop in Chandenamal and Khedikarmu
गिरिराज सिंह
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शामली। लगातार प्रदूषित होते जा रहे वातावरण को सुधारने के लिए पौधरोपण ही एकमात्र तरीका है, लेकिन कम होती जा रही जमीन के चलते वन क्षेत्र बढ़ाने को जगह नहीं बची। जमीन के इस संकट के बीच पौधरोपण की जापानी तकनीक मिया बाकी बहुत अहम साबित होगी। इसी तकनीक पर जिले के दो गांवों में घने जंगल विकसित किए जाएंगे। यह एक तरह से आक्सीजन बैंक होंगे। 15 अगस्त तक इन दोनों स्थानों पर पौधरोपण का कार्य पूरा करने का लक्ष्य है।
सहारनपुर मंडलायुक्त संजय कुमार के निर्देश पर मंडल के जिलों में घने जंगलों को विकसित करने की कवायद शुरू हुई है। ये जंगल आक्सीजन बैंक के रूप में काम करेंगे। शामली जिले में खेड़ीकरमू और सहारनपुर बॉर्डर के गांव चंदेनामाल में एक-एक एकड़ भूमि को चिह्नित किया गया है। जापान के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् मिया बाकी की तकनीक पर पौधे लगाए जाएंगे। दो पौधों के बीच बहुत मामूली दूरी रखी जाती है और जब ये पौधे विकसित हो जाते हैं तो जंगल बेहद घना हो जाता है। इसमें प्रवेश कर पाना भी आसान नहीं होता। सीडीओ शंभूनाथ तिवारी ने बताया कि 15 अगस्त तक दोनों स्थानों पर पौधरोपण करना है। यह जंगल बहुत तेजी से बढ़ता है और करीब छह माह में ही काफी घना हो जाता है।
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एक एकड़ में लगेंगे 12 हजार पौधे
मिया बाकी तकनीक से एक एकड़ क्षेत्रफल में 10 से 12 हजार तक पौधे लगाए जा सकते हैं। एक एकड़ में जंगल विकसित करने में आठ से दस लाख रुपये खर्च होंगे। सीडीओ ने बताया कि चिह्नित किए गए स्थानों पर राज्यवित्त, 15वें वित्त तथा मनरेगा से जंगल का विकास किया जाएगा।
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स्थानीय पेड़ ही लगाए जाएंगे
खेड़ीकरमू और चंदेनामाल में विकसित किए जाने वाले जंगल में स्थानीय पेड़ ही उगाए जाएंगे। इनमें जामुन, अर्जुन, शीशम, पीपल, बरगद समेत अन्य प्रजातियों के पेड़ों को शामिल किया जाएगा।
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तीन परतों में लगाए जाएंगे पौधे
डीएफओ संजीव कुमार ने बताया कि मिया बाकी तकनीक में तीन स्तर पर पौधरोपण किया जाता है। इसमें अपर, मिडिल एवं लोअर कैनोपी होती है। इससे पहले मिट्टी एवं गोबर आदि की आधा मीटर की परत बनाई जाती है। उसके बाद पौधे, झाड़ियां और लताओं का रोपण किया जाता है। छह महीने में ही जंगल काफी घना हो जाता है। कम क्षेत्र में अधिक पौधे लगाने का यह बहुत अच्छा तरीका है।

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इन्होंने कहा...
खेड़ीकरमू और चंदेनामाल में घना जंगल विकसित करने के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। ग्राम पंचायतों के माध्यम से इनका विकास किया जाएगा। - शंभूनाथ तिवारी, सीडीओ।

थानाभवन चंदेनामाल गांव में कृष्णा नदी किनारे पौधारोपण के लिए चुनी गई भूमि

थानाभवन चंदेनामाल गांव में कृष्णा नदी किनारे पौधारोपण के लिए चुनी गई भूमि- फोटो : SHAMLI

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