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नहर सिंचाई पर निर्भर खेतों में घट रहा उत्पादन
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कांधला क्षेत्र के गांव जसाला में गन्ने की फसल देखते अधिकारी
- फोटो : SHAMLI
नहर सिंचाई पर निर्भर खेतों में घट रहा उत्पादन
शामली। नहर में समय पर पानी नहीं मिलने से फसल की उत्पादकता प्रभावित हो रही है। यदि किसानों की आय को बढ़ाना है तो सिंचाई के साधन सुधारने होंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) के पूर्व मुख्य तकनीकी अधिकारी एवं कृषि अर्थशास्त्री डा. बीरपाल सिंह के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जिन किसानों के पास बिजली के निजी नलकूप हैं वे खेतों में नमी बनाए रखते हैं इसलिए उन्होंने 6.35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गेहूं का अधिक उत्पादन लिया।
कृषि अर्थशास्त्री डॉ. बीरपाल सिंह ने पूर्वी यमुना नहर कमांड क्षेत्र (ताजेवाला से लोनी तक) में किए गए अध्ययन में पाया कि जिन खेतों की सिंचाई नहर से हो रही है, वहां उत्पादन कम हो रहा है। वह बताते हैं कि उत्पादन के अनेक निवेशों में जल प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण है। यदि खाद-उर्वरकों और अच्छे बीज के बावजूद पानी नहीं है तो अन्य निवेशों का कोई महत्व नहीं है। अध्ययन में पता लगा कि जिस साधन से किसान को सिंचाई जल समय पर मिलता है, उसी साधन से फसल अच्छी हो जाती है। नहर से सिंचाई करने वालों को समय पर पर्याप्त जल नहीं मिलता और खेतों में नमी नहीं रहती इसलिए फसल उत्पादन गिरता है। वह बताते हैं कि नहर से सींचे गए खेतों में गेहूं का उत्पादन 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हुआ, जबकि निजी बिजली नलकूप से सींचे जाने वाले खेतों में 46.35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि अध्ययन का उद्देश्य ‘सिंचाई जल उपयोग दक्षता’ का पता लगाना था। इसकी रिपोर्ट कमिश्नर कमांड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी को भेजी थी। इस अध्ययन को देशभर से प्राप्त रिपोर्टों में से प्रथम स्थान पर रखा गया है।
किराये पर कम गहरी सिंचाई करते हैं किसान
अध्ययन के मुताबिक खुद के बिजली के नलकूप वाले किसान अधिकतम उत्पादन करने के लिए खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखते हैं, जबकि जो किसान किराये पर सिंचाई करते हैं वे कम गहरी सिंचाई करते हैं, जिससे उत्पादन गिरता है। इसलिए फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए सतही जल संसाधनों (नहर, तालाब, पोखर आदि) में सुधार की जरूरत है।
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भूजल स्तर पर बढ़ रहा भार
सतही जल संसाधनों का बेहतर प्रबंध नहीं होने से इसका सीधा असर भूजल स्तर पर पड़ रहा है। सिंचाई एवं अन्य कार्यों के लिए भूजल का खूब दोहन हो रहा है। डॉ. बीरपाल सिंह के मुताबिक पृथ्वी पर कुल जल 146 करोड़ घन किलोमीटर के लगभग है, जो हमारे 70 प्रतिशत धरातल को ढके है। इसके बावजूद प्रति व्यक्ति पानी की मात्रा लगातार घट रही है। भारत में 1955 में प्रति व्यक्ति 5200 घनमीटर पानी उपलब्ध था, जो अब घटकर 2200 घन मीटर रह गया और अनुमान है कि वर्ष 2025 में केवल 1500 घनमीटर ही रह जाएगा। यदि सतही जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन नहीं हुआ तो भूजल का दोहन तेजी से बढ़ता जाएगा।
सिंचाई के साधनों से उत्पादन और शुद्ध आय
साधन उत्पादन क्विंटल प्रति हेक्टेयर शुद्ध आय प्रति हेक्टेयर
नहर 40 - 10625
किराया नलकूप 42.66 - 11500
डीजल नलकूप 44.34 - 11540
निजी बिजली नलकूप 46.35 - 13040
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शामली। नहर में समय पर पानी नहीं मिलने से फसल की उत्पादकता प्रभावित हो रही है। यदि किसानों की आय को बढ़ाना है तो सिंचाई के साधन सुधारने होंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) के पूर्व मुख्य तकनीकी अधिकारी एवं कृषि अर्थशास्त्री डा. बीरपाल सिंह के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जिन किसानों के पास बिजली के निजी नलकूप हैं वे खेतों में नमी बनाए रखते हैं इसलिए उन्होंने 6.35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गेहूं का अधिक उत्पादन लिया।
कृषि अर्थशास्त्री डॉ. बीरपाल सिंह ने पूर्वी यमुना नहर कमांड क्षेत्र (ताजेवाला से लोनी तक) में किए गए अध्ययन में पाया कि जिन खेतों की सिंचाई नहर से हो रही है, वहां उत्पादन कम हो रहा है। वह बताते हैं कि उत्पादन के अनेक निवेशों में जल प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण है। यदि खाद-उर्वरकों और अच्छे बीज के बावजूद पानी नहीं है तो अन्य निवेशों का कोई महत्व नहीं है। अध्ययन में पता लगा कि जिस साधन से किसान को सिंचाई जल समय पर मिलता है, उसी साधन से फसल अच्छी हो जाती है। नहर से सिंचाई करने वालों को समय पर पर्याप्त जल नहीं मिलता और खेतों में नमी नहीं रहती इसलिए फसल उत्पादन गिरता है। वह बताते हैं कि नहर से सींचे गए खेतों में गेहूं का उत्पादन 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हुआ, जबकि निजी बिजली नलकूप से सींचे जाने वाले खेतों में 46.35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि अध्ययन का उद्देश्य ‘सिंचाई जल उपयोग दक्षता’ का पता लगाना था। इसकी रिपोर्ट कमिश्नर कमांड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी को भेजी थी। इस अध्ययन को देशभर से प्राप्त रिपोर्टों में से प्रथम स्थान पर रखा गया है।
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किराये पर कम गहरी सिंचाई करते हैं किसान
अध्ययन के मुताबिक खुद के बिजली के नलकूप वाले किसान अधिकतम उत्पादन करने के लिए खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखते हैं, जबकि जो किसान किराये पर सिंचाई करते हैं वे कम गहरी सिंचाई करते हैं, जिससे उत्पादन गिरता है। इसलिए फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए सतही जल संसाधनों (नहर, तालाब, पोखर आदि) में सुधार की जरूरत है।
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भूजल स्तर पर बढ़ रहा भार
सतही जल संसाधनों का बेहतर प्रबंध नहीं होने से इसका सीधा असर भूजल स्तर पर पड़ रहा है। सिंचाई एवं अन्य कार्यों के लिए भूजल का खूब दोहन हो रहा है। डॉ. बीरपाल सिंह के मुताबिक पृथ्वी पर कुल जल 146 करोड़ घन किलोमीटर के लगभग है, जो हमारे 70 प्रतिशत धरातल को ढके है। इसके बावजूद प्रति व्यक्ति पानी की मात्रा लगातार घट रही है। भारत में 1955 में प्रति व्यक्ति 5200 घनमीटर पानी उपलब्ध था, जो अब घटकर 2200 घन मीटर रह गया और अनुमान है कि वर्ष 2025 में केवल 1500 घनमीटर ही रह जाएगा। यदि सतही जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन नहीं हुआ तो भूजल का दोहन तेजी से बढ़ता जाएगा।
सिंचाई के साधनों से उत्पादन और शुद्ध आय
साधन उत्पादन क्विंटल प्रति हेक्टेयर शुद्ध आय प्रति हेक्टेयर
नहर 40 - 10625
किराया नलकूप 42.66 - 11500
डीजल नलकूप 44.34 - 11540
निजी बिजली नलकूप 46.35 - 13040