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बुखार से जा रही जान, स्वास्थ्य विभाग बना उदासीन
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शामली। जनपद में बुखार के पांव पसारने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग गंभीर नजर नहीं आ रहा है। जनपद में बुखार के केस रोज सामने आ रहे है। सरकारी और निजी अस्पतालों में बुखार के मरीजों की भीड़ लगी है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में कई लोगों को डेंगू पॉजिटिव होने की पुष्टि हो चुकी है। इसके बावजूद विभाग की तरफ से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे है।
जनपद में बुखार का प्रकोप चल रहा है। अभी तक वायरल, टायफाइड और मलेरिया के मरीज ही अस्पतालों में पहुंच रहे थे। मगर, अब डेंगू बुखार के मरीज भी अस्पताल में पहुंच रहे है। बच्चों में भी डेंगू के केस सामने आ रहे है। सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ लगी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग वायरल बुखार बताकर पल्ला झाड़ रहा है। यह हाल तो तब है कि जब सरकारी आंकड़ों में तीन लोगों में डेंगू होने की पुष्टि हो चुकी है। शुक्रवार को सीएचसी में उपचार कराने पहुंचे बुखार पीड़ित 10 वर्षीय नाहिद निवासी बराला को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों ने बालक को टायफाइड बुखार बताकर पल्ला झाड़ लिया। जनपद में एक सप्ताह में बुखार से तीन महिलाओं की मौत हो चुकी है, जिनमें दो महिलाओं की मौत परिजनों ने डेंगू बुखार से होना बताया है। स्वास्थ्य टीम ने उनके परिजनों से मिलकर अभी तक कोई जानकारी नहीं ली है।
सितंबर माह में आई दिल्ली से स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम की जांच के दौरान सीएचसी शामली के कूलरों के अलावा आवासीय कालोनी और रेलवे स्टेशन पर कूलर में डेंगू के लार्वा मिले थे। इसके बाद भी विभाग नहीं चेता। इसका नतीजा ये हुआ कि जनपद में डेंगू के केस सामने आने लगे है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डा. शिखर गुप्ता ने बताया कि ज्यादातर वायरल बुखार चल रहा है। इसके साथ ही बच्चों में डेंगू के केस भी आ रहे है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग बुखार से बचाव के लिए एंटी लार्वा का छिड़काव कराने और गांवों में कैंप लगाकर उपचार कराने के दावे कर रहा है।
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डेंगू बुखार के लक्षण
सर्दी के साथ तेज बुखार और उल्टी होना
सिर दर्द के साथ आंखों में भी तेज दर्द होना
शरीर पर लाल भूरे रंग के चकते होना
प्लेटलेट्स तेजी से कम होना
सावधानियां एवं बचाव
कूलर, मिट्टी के बर्तन, गमलों आदि में पानी जमा न होने दें।
घर और आसपास साफ-सफाई रखे।
जलभराव न होने दें, नालियों में मिट्टी का तेल डाले।
पूरी बाजू वाले कपड़े पहने, मच्छरदानी का प्रयोग करें।
बुखार होने पर जूस और पानी अधिक पीएं।
चिकित्सक की सलाह लेकर उपचार कराएं।
जनपद में जहां से भी बुखार होने की जानकारी मिलती है, उन गांवों में कैंप लगाकर उपचार किया जा रहा है। साथ ही एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। बुखार पीड़ितों के उपचार के साथ जांच के लिए रक्त नमूने लिए जा रहे है। स्लाइड बनाई जाती है। डेंगू बुखार से बचाव के लिए पालिका और स्वास्थ्य टीम घर-घर जाकर कूलर आदि में पानी की जांच कर लोगों को जागरूक कर रही है। जनपद में बुखार पूरी तरह से नियंत्रण में है। डेंगू बुखार से अभी तक किसी की मौत नहीं हुई है। - डा. श्रीकांत, एसीएमओ/ नोडल अधिकारी संक्रामक रोग।
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जनपद में बुखार का प्रकोप चल रहा है। अभी तक वायरल, टायफाइड और मलेरिया के मरीज ही अस्पतालों में पहुंच रहे थे। मगर, अब डेंगू बुखार के मरीज भी अस्पताल में पहुंच रहे है। बच्चों में भी डेंगू के केस सामने आ रहे है। सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ लगी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग वायरल बुखार बताकर पल्ला झाड़ रहा है। यह हाल तो तब है कि जब सरकारी आंकड़ों में तीन लोगों में डेंगू होने की पुष्टि हो चुकी है। शुक्रवार को सीएचसी में उपचार कराने पहुंचे बुखार पीड़ित 10 वर्षीय नाहिद निवासी बराला को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों ने बालक को टायफाइड बुखार बताकर पल्ला झाड़ लिया। जनपद में एक सप्ताह में बुखार से तीन महिलाओं की मौत हो चुकी है, जिनमें दो महिलाओं की मौत परिजनों ने डेंगू बुखार से होना बताया है। स्वास्थ्य टीम ने उनके परिजनों से मिलकर अभी तक कोई जानकारी नहीं ली है।
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सितंबर माह में आई दिल्ली से स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम की जांच के दौरान सीएचसी शामली के कूलरों के अलावा आवासीय कालोनी और रेलवे स्टेशन पर कूलर में डेंगू के लार्वा मिले थे। इसके बाद भी विभाग नहीं चेता। इसका नतीजा ये हुआ कि जनपद में डेंगू के केस सामने आने लगे है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डा. शिखर गुप्ता ने बताया कि ज्यादातर वायरल बुखार चल रहा है। इसके साथ ही बच्चों में डेंगू के केस भी आ रहे है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग बुखार से बचाव के लिए एंटी लार्वा का छिड़काव कराने और गांवों में कैंप लगाकर उपचार कराने के दावे कर रहा है।
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डेंगू बुखार के लक्षण
सर्दी के साथ तेज बुखार और उल्टी होना
सिर दर्द के साथ आंखों में भी तेज दर्द होना
शरीर पर लाल भूरे रंग के चकते होना
प्लेटलेट्स तेजी से कम होना
सावधानियां एवं बचाव
कूलर, मिट्टी के बर्तन, गमलों आदि में पानी जमा न होने दें।
घर और आसपास साफ-सफाई रखे।
जलभराव न होने दें, नालियों में मिट्टी का तेल डाले।
पूरी बाजू वाले कपड़े पहने, मच्छरदानी का प्रयोग करें।
बुखार होने पर जूस और पानी अधिक पीएं।
चिकित्सक की सलाह लेकर उपचार कराएं।
जनपद में जहां से भी बुखार होने की जानकारी मिलती है, उन गांवों में कैंप लगाकर उपचार किया जा रहा है। साथ ही एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। बुखार पीड़ितों के उपचार के साथ जांच के लिए रक्त नमूने लिए जा रहे है। स्लाइड बनाई जाती है। डेंगू बुखार से बचाव के लिए पालिका और स्वास्थ्य टीम घर-घर जाकर कूलर आदि में पानी की जांच कर लोगों को जागरूक कर रही है। जनपद में बुखार पूरी तरह से नियंत्रण में है। डेंगू बुखार से अभी तक किसी की मौत नहीं हुई है। - डा. श्रीकांत, एसीएमओ/ नोडल अधिकारी संक्रामक रोग।