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Shamli News: सभी जूनियर हाईस्कूलों में पावर एंजिल बनेंगी बेटियां
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शामली। परिषदीय विद्यालयों की प्रत्येक बालिका में पावर एंजिल्स तो हर बालक में मॉनिटर के गुण विकसित किए जाएंगे। इसके लिए उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मीना मंच तथा प्राथमिक विद्यालयों में बाल संसद का गठन किया जाएगा। इसका उद्देश्य छह से 14 वर्ष की आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं को मानसिक एवं सामाजिक रूप से पूरी तरह से दक्ष बनाना है।
मीना मंच के माध्यम से बालिकाओं में नेतृत्व तथा अभिव्यक्ति की क्षमता संवर्द्धन करने के साथ-साथ उन्हें विभिन्न कौशल में पारंगत बनाना है। सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में मीना मंच का संचालन होगा। इसी प्रकार से बालकों में उनके आसपास के परिवेश के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करने के लिए प्राथमिक विद्यालयों में बाल संसद का गठन कर उसे सक्रिय किया जाएगा।
मीना मंच की सक्रिय बालिकाओं में से प्रत्येक कक्षा के लिए एक बालिका को पावर एंजिल्स के रूप में चिह्नित किया जाएगा। यह पावर एंजिल अपनी कक्षा के हर छात्रा से निरंतर संपर्क रखेंगी। उसकी कक्षा में अनुपस्थित रहने वाली छात्रा के अभिभावक से संपर्क कर उसकी समस्या का समाधान कराएगी। इसी तरह प्राथमिक विद्यालयों में बाल संसद से जुड़े बच्चों को विद्यालय के विभिन्न कार्यों के संचालन में सहभागी बनाया जाएगा। इसमें जिम्मेदारियों को बांटते हुए बच्चों को बदल-बदल कर चयन किया जाएगा।
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बीएसए लता राठौर ने बताया कि प्रधानाध्यापकों को प्रभावी ढंग से निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया गया है।
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मीना मंच के माध्यम से बालिकाओं में नेतृत्व तथा अभिव्यक्ति की क्षमता संवर्द्धन करने के साथ-साथ उन्हें विभिन्न कौशल में पारंगत बनाना है। सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में मीना मंच का संचालन होगा। इसी प्रकार से बालकों में उनके आसपास के परिवेश के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करने के लिए प्राथमिक विद्यालयों में बाल संसद का गठन कर उसे सक्रिय किया जाएगा।
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मीना मंच की सक्रिय बालिकाओं में से प्रत्येक कक्षा के लिए एक बालिका को पावर एंजिल्स के रूप में चिह्नित किया जाएगा। यह पावर एंजिल अपनी कक्षा के हर छात्रा से निरंतर संपर्क रखेंगी। उसकी कक्षा में अनुपस्थित रहने वाली छात्रा के अभिभावक से संपर्क कर उसकी समस्या का समाधान कराएगी। इसी तरह प्राथमिक विद्यालयों में बाल संसद से जुड़े बच्चों को विद्यालय के विभिन्न कार्यों के संचालन में सहभागी बनाया जाएगा। इसमें जिम्मेदारियों को बांटते हुए बच्चों को बदल-बदल कर चयन किया जाएगा।
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बीएसए लता राठौर ने बताया कि प्रधानाध्यापकों को प्रभावी ढंग से निर्देशों का पालन करने का निर्देश दिया गया है।