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खुद की योग्यता को पहचान कर आगे बढ़े बेटियां : संदीप कुमार त्रिपाठी
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झिंझाना। बलवंती देवी कन्या इंटर कॉलेज में अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा अपराजिता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें छात्राओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी गई।
बलवंती देवी कन्या इंटर कॉलेज में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित अपराजिता कार्यक्रम का शुभारंभ एसडीएम ऊन संदीप कुमार त्रिपाठी, विद्यालय डायरेक्टर अंकित तोमर ने किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने महिला सशक्तीकरण पर जोर दिया।
मुख्य अतिथि एसडीएम संदीप कुमार त्रिपाठी ने कहा कि ग्रामीण व शहरी परिवेश में शिक्षा का जो अंतर है, उसे खत्म करना होगा। आज महिलाएं सभी क्षेत्रों में पुरुषों से आगे हैं। हमारे समाज में बहुत से वर्गों में आज भी बदनामी के कारण बहू-बेटियों पर हुए अत्याचार को चहारदीवारी के अंदर ही दफन कर दिया जाता है। अब समय आ गया है कि किसी भी अत्याचार या कुरीतियों का डटकर सामना करना होगा। उन्होंने कहा कि खुद की योग्यता को पहचान कर आगे बढ़ें। साथ ही अपने अधिकारों की समझ भी होनी चाहिए, जिससे विषम हालातों में खुद को सुरक्षित भी रखा जा सके। तमाम दिक्कतों को पराजित कर बेटियों को अपराजिता बनना है।
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कार्यक्रम का संचालन कर रहीं अध्यापिका अदीबा सिद्दीकी ने छात्राओं को समझाया कि पढ़ाई के साथ-साथ अधिकारों की समझ भी रखें। चन्द्रयान 3 में देश की पहली रॉकेट महिला ऋतु करिधाल के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने पूरे विश्व में परचम लहराया है। आगे बढ़ने के लिए जिस तरह से शिक्षित होना जरूरी है, उसी तरह अपने अधिकारों का समझना भी आवश्यक है।
विकास वर्मा ने महिला हेल्पलाइन 181, 1090, 112 के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लड़कियों को मुखर होकर अत्याचार का मुकाबला करना चाहिए। एक समय महिलाओं को अबला माना जाता था, लेकिन समय के परिवर्तन के अनुसार महिलाएं सबला बन और पूरे विश्व को नई राह दिखा रही हैं। प्रत्येक लड़की में कोई न कोई योग्यता होती है, उस योग्यता को पहचानने की आवश्यकता है।
अध्यापिका शिवानी ने कहा कि महिलाओं को अपने विरुद्ध होने वाले अपराधों के प्रति आवाज उठानी चाहिए। प्रदेश सरकार की ओर से महिलाओं के लिए शुरू किए गए महिला हेल्पलाइन नंबर 1090, 1076 के बारे में जानकारी होनी चाहिए। लड़कियों को निडर बनना चाहिए, किसी भी गलत बात का विरोध करना चाहिए।
कार्यक्रम में इंद्रपाल सिंह तोमर प्रबंधक, अध्यापिका साक्षी, ज्योति, सुषमा, उषा, नेहा, अंजना, प्रिया सरोहा, स्वाति, रूपा, शिवानी, प्रियांशु, सेवाराम, मनीष कुमार, दीप कुमार आदि उपस्थित रहे।
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घर को रोशन करती हैं बेटियां
छात्रा वंशिका ने कहा कि जरूरी नहीं की दीपक ही घर को रोशन करें, बेटियां भी घर को रोशन करती हैं। बचपन से ही बेटियां कभी रूप रंग तो, कभी व्यवहार को लेकर टोकी जाती हैं। कहने को तो लड़कों के बराबर हैं, परंतु लड़कियों की जिंदगी इतनी आसान नहीं होती।
-बेटियों को चांद नहीं सूरज बनाओ
छात्रा शशि ने कहा कि बेटियों को चांद जैसा मत बनाओ कि हर कोई घूर-घूर कर देखे। बेटियों को सूरज जैसा बनाओ कि घूरने से पहले उसकी नजरें झुक जाएं।
-बेटों का भी कर्तव्य निभाती हैं बेटियां
छात्रा मधु ने कहा कि बेटियां देश की शान हैं, उन्हें बोझ मत समझो। बेटियां बेटों का भी कर्तव्य निभाती हैं।
-शिक्षा है बेटियों का मुख्य अधिकार
छात्रा राधिका ने कहा कि शिक्षा बेटियों का मुख्य अधिकार है। बेटियों को समाज का हिस्सा समझो और उन्हें आगे बढ़ने दो। पापा की परी से जिम्मेदार बहू बन जाती हैं बेटियां। थोड़े काम में थकने वाली से पूरा घर संभालने वाली हो जाती हैं बेटियां।
-क्यों करते हो बेटियों से मक्कारी
छात्रा भूमिका ने कहा कि जब मां है प्यारी, बहन है दुलारी और बीवी है पटरानी तो क्यों करते हो बेटियों से मक्कारी। जीवन है बेटियों का अधिकार, अपनी सोच को बदलो और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ।
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बलवंती देवी कन्या इंटर कॉलेज में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित अपराजिता कार्यक्रम का शुभारंभ एसडीएम ऊन संदीप कुमार त्रिपाठी, विद्यालय डायरेक्टर अंकित तोमर ने किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने महिला सशक्तीकरण पर जोर दिया।
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मुख्य अतिथि एसडीएम संदीप कुमार त्रिपाठी ने कहा कि ग्रामीण व शहरी परिवेश में शिक्षा का जो अंतर है, उसे खत्म करना होगा। आज महिलाएं सभी क्षेत्रों में पुरुषों से आगे हैं। हमारे समाज में बहुत से वर्गों में आज भी बदनामी के कारण बहू-बेटियों पर हुए अत्याचार को चहारदीवारी के अंदर ही दफन कर दिया जाता है। अब समय आ गया है कि किसी भी अत्याचार या कुरीतियों का डटकर सामना करना होगा। उन्होंने कहा कि खुद की योग्यता को पहचान कर आगे बढ़ें। साथ ही अपने अधिकारों की समझ भी होनी चाहिए, जिससे विषम हालातों में खुद को सुरक्षित भी रखा जा सके। तमाम दिक्कतों को पराजित कर बेटियों को अपराजिता बनना है।
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कार्यक्रम का संचालन कर रहीं अध्यापिका अदीबा सिद्दीकी ने छात्राओं को समझाया कि पढ़ाई के साथ-साथ अधिकारों की समझ भी रखें। चन्द्रयान 3 में देश की पहली रॉकेट महिला ऋतु करिधाल के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने पूरे विश्व में परचम लहराया है। आगे बढ़ने के लिए जिस तरह से शिक्षित होना जरूरी है, उसी तरह अपने अधिकारों का समझना भी आवश्यक है।
विकास वर्मा ने महिला हेल्पलाइन 181, 1090, 112 के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लड़कियों को मुखर होकर अत्याचार का मुकाबला करना चाहिए। एक समय महिलाओं को अबला माना जाता था, लेकिन समय के परिवर्तन के अनुसार महिलाएं सबला बन और पूरे विश्व को नई राह दिखा रही हैं। प्रत्येक लड़की में कोई न कोई योग्यता होती है, उस योग्यता को पहचानने की आवश्यकता है।
अध्यापिका शिवानी ने कहा कि महिलाओं को अपने विरुद्ध होने वाले अपराधों के प्रति आवाज उठानी चाहिए। प्रदेश सरकार की ओर से महिलाओं के लिए शुरू किए गए महिला हेल्पलाइन नंबर 1090, 1076 के बारे में जानकारी होनी चाहिए। लड़कियों को निडर बनना चाहिए, किसी भी गलत बात का विरोध करना चाहिए।
कार्यक्रम में इंद्रपाल सिंह तोमर प्रबंधक, अध्यापिका साक्षी, ज्योति, सुषमा, उषा, नेहा, अंजना, प्रिया सरोहा, स्वाति, रूपा, शिवानी, प्रियांशु, सेवाराम, मनीष कुमार, दीप कुमार आदि उपस्थित रहे।
घर को रोशन करती हैं बेटियां
छात्रा वंशिका ने कहा कि जरूरी नहीं की दीपक ही घर को रोशन करें, बेटियां भी घर को रोशन करती हैं। बचपन से ही बेटियां कभी रूप रंग तो, कभी व्यवहार को लेकर टोकी जाती हैं। कहने को तो लड़कों के बराबर हैं, परंतु लड़कियों की जिंदगी इतनी आसान नहीं होती।
-बेटियों को चांद नहीं सूरज बनाओ
छात्रा शशि ने कहा कि बेटियों को चांद जैसा मत बनाओ कि हर कोई घूर-घूर कर देखे। बेटियों को सूरज जैसा बनाओ कि घूरने से पहले उसकी नजरें झुक जाएं।
-बेटों का भी कर्तव्य निभाती हैं बेटियां
छात्रा मधु ने कहा कि बेटियां देश की शान हैं, उन्हें बोझ मत समझो। बेटियां बेटों का भी कर्तव्य निभाती हैं।
-शिक्षा है बेटियों का मुख्य अधिकार
छात्रा राधिका ने कहा कि शिक्षा बेटियों का मुख्य अधिकार है। बेटियों को समाज का हिस्सा समझो और उन्हें आगे बढ़ने दो। पापा की परी से जिम्मेदार बहू बन जाती हैं बेटियां। थोड़े काम में थकने वाली से पूरा घर संभालने वाली हो जाती हैं बेटियां।
-क्यों करते हो बेटियों से मक्कारी
छात्रा भूमिका ने कहा कि जब मां है प्यारी, बहन है दुलारी और बीवी है पटरानी तो क्यों करते हो बेटियों से मक्कारी। जीवन है बेटियों का अधिकार, अपनी सोच को बदलो और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ।