फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   Dasharatha-Kaikei dialogues are in Urdu

उर्दू में होते है दशरथ-कैकेई संवाद

Sun, 06 Oct 2019 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 06 Oct 2019 11:54 PM IST
विज्ञापन
Dasharatha-Kaikei dialogues are in Urdu
शामली के कांधला में रामलीला का मंचन करते कलाकार। - फोटो : SHAMLI
उर्दू में होते है दशरथ-कैकेई संवाद
विज्ञापन

कांधला (शामली)। कैकेयी के संवाद: कैसी जलालत कैसी खारी दिल किस बात पर रंजीदा है,
क्या राम ही तुम्हारा पुत्र है, भरत को बाजार से खरीदा है।
दशरथ: तेगे जबान को म्यान में रख क्यो शोर मचा कर बखती है, दिल और जिगर तो चीर दिया क्यों कटे पर नमक छिड़कती हो।
वो औरत महवर से हमें डिगाती है, जो सत्य हमारा जीवन क्यू उससे हमें गिराती है।
कस्बा कांधला की ऐतिहासिक रामलीला की कई खासियतें है। इसमें श्रीराम और लक्ष्मण का अभिनय करने वाले कलाकार मथुरा से बुलाए जाते हैं। सबसे बड़ी खासियत यह है कि कोप भवन में दशरथ और कैकेई संवाद उर्दू में किया जाता है। इसे देखने के लिए दोनोें वर्गों के दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ती है।
कांधला में रामलीला का मंचन करीब 122 वर्ष पूर्व मोहल्ला रायजादगान स्थित मां शाकंभरी देवी भवन से शुरू हुआ था। रामलीला के डायरेक्टर रहे मुनिया पंडित ने बताया कि उनके पूर्वजों ने देवी भवन में चारपाई पर चादर तानकर लीला मंचन का कार्य शुरू किया था। तीन साल बाद रामलीला में भीड़ बढ़ने लगी तो मोहल्ला राय जादगान मंडप स्थल पर करीब 50 वर्षों तक लीला मंचन किया गया। इसके बाद से कैराना रोड स्थित रामलीला मंडप पंचवटी स्थल पर रामलीला का मंचन चल रहा है। रामलीला में श्रीराम और लक्ष्मण का अभिनय करने के लिए मथुरा के कलाकार बुलाने की पुरानी परंपरा आज भी चल रही है। बाकी कलाकार स्थानीय होते है। पुराने कलाकारों में पंडित रामेश्वर, तेलूराम, इंद्रसेन, सतप्रकाश, आनंद प्रकाश, बिजेंद्र अहम भूमिका निभाते थे। सतप्रकाश आलराउंडर थे, वे सभी पात्रों के अभिनय कर लेते थे। मगर, मुख्य रूप से दशरथ का अभिनय करते थे। बिजेन्द्र जैन, पंडित दिलीप सिंह खर-दूषण और आनंद प्रकाश रावण और मेहरचंद सिंघल कुंभकर्ण का अभिनय कई वर्षों से करते आ रहे है।
विज्ञापन

इस रामलीला की सबसे खास बात यह है कि यहां कोप भवन में दशरथ और कैकेई संवाद उर्दू में किया जाता है। रामलीला कमेटी के प्रबंधक प्रबंधक रामकुमार सिंघल ने बताया कि उनके पूर्वजों के मुताबिक उस वक्त ज्यादातर लेखन उर्दू में ही होता था। यहीं वजह है कि पूरी रामलीला का सार उर्दू में लिया गया था, जिसे उसी भाषा में पढ़कर लीला मंचन किया जाता था। समय के साथ किताबों की हालत कमजोर पड़ जाने पर उसका हिंदी रूपांतरण कराया गया। आज भी राजा दशरथ और कैकेई संवाद के अधिकतम वाक्य उर्दू में ही बोले जाते है। यहीं वजह है कि कस्बे और गांव देहात से हिंदू समाज के साथ मुस्लिम समाज के लोग भी रामलीला देेखने आते है और भरपूर आनंद उठाते है। रामलीला समिति के प्रबंधक रामकुमार, अध्यक्ष दिनेश चंद गुप्ता ने बताया कि दिल्ली में आईएएस रहे कांधला निवासी गंगादास रामलीला का मंचन देखने के लिए आते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

दिन में काम, रात में रामलीला
मोहल्ला रायजादगान निवासी जॉनी कई वर्षों से रामलीला में सीता का अभिनय कर रहे है। निजी स्कूल के संचालक होने के साथ ही घर की पूरी जिम्मेदारी उन पर होने के कारण दिन में व्यस्त रहते है। इसके बाद वे रात को रामलीला में अभिनय करते है। दशरथ का अभिनय करने वाले सर्वेश वर्मा सर्राफ व्यापारी है। वे दिन में अपनी दुकान देखने के साथ ही रात को दशरथ का अभियन करते है। हनुुमान का अभिनय आठ वर्षों से पूर्व सभासद पिंटू गोयल निभा रहे है। वे आयरन स्टोर की दुकान करते है। कस्बा निवासी श्यामकुमार सिंघल 35 वर्षों से कैकेई का अभिनय कर रहे है। उनकी बुक शॉप है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed