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Shamli News: क्रिटिकल केयर अस्पताल में मिलेगी गंभीर रोगी और घायलों के उपचार की सुविधा
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शामली में जिला अस्पताल के पास निर्माणाधीन क्रिटिकल केयर अस्पताल । संवाद
- फोटो : mathura
- अवशेष बजट न मिलने से अगले वर्ष मार्च 2026 तक निर्माण कार्य होगा पूरा
- 50 बेड के बनने वाले तीन मंजिला अस्पताल के भवन का 70 प्रतिशत कार्य हो चुका पूरा
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिला अस्पताल के बराबर में क्रिटिकल केयर अस्पताल में गंभीर रोगियाें और दुर्घटना में घायलों के उपचार की सुविधा मिलेगी। अस्पताल के तीन मंजिला भवन का निर्माण कार्य इस साल में पूरा होना था, लेकिन कार्यदायी संस्था यूपी सिडको ने शासन से अवशेष बजट न मिलने से निर्माण कार्य प्रभावित होना बताया है। कार्यदायी संस्था का कहना है कि शासन को बजट के लिए दो बार मांग पत्र भेजा जा चुका है। कार्यदायी संस्था ने मार्च 2026 तक निर्माण कार्य पूरा करने का समय मांगा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत पूर्वी यमुना नहर पटरी के किनारे 4200 वर्ग मीटर भूमि पर 50 बेड क्रिटिकल केयर अस्पताल के भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण कार्य इसी साल अक्तूबर में पूरा होना था, लेकिन अभी तक करीब 70 प्रतिशत निर्माण कार्य हो पाया है। इस साल में अस्पताल चालू करने की योजना थी, लेकिन इसकी उम्मीद कम है।
यूपी सिडको के अधिशासी अभियंता विनोद कुमार ने बताया कि क्रिटिकल केयर अस्पताल के भवन के निर्माण के लिए 18.35 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हैं। अभी तक शासन से आठ करोड़ पांच लाख की धनराशि ही अवमुक्त हुई है। शेष बजट की धनराशि के लिए 30 अप्रैल व 12 जून को दो बार मांग पत्र एनएचएम के महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं लखनऊ को भेजा जा चुका है। बजट न मिलने से निर्माण कार्य की प्रगति धीमी चल रही हैं।
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बजट अवमुक्त न होने से उन्होंने मार्च 2026 तक निर्माण कार्य पूरा करने का समय मांगा है। उन्होंने बताया कि तीन मंजिला भवन बन चुका है। दीवारों पर सीमेंट के प्लास्टर व टाइल्स आदि लगाने का कार्य चल रहा है। भवन की फिनिशिंग और चहारदीवारी आदि का कार्य अभी शेष है। शासन से अवशेष बजट मिलते ही भवन निर्माण का कार्य जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
-- ओपीडी नहीं होगी, गंभीर मरीजों को मिलेगी उपचार की सुविधा
एनएचएम के जिला कार्यक्रम प्रबंधक आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि क्रिटिकल केयर अस्पताल में मरीजों की ओपीडी नहीं होगी। अस्पताल में गंभीर बीमारियों और दुर्घटना में गंभीर घायलों का इलाज किया जाएगा। भवन का निर्माण कार्य पूरा होने पर इसे स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर किया जाएगा। शासन स्तर से जिला अस्पताल से अलग विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी। अस्पताल चालू होने से गंभीर मरीजों को बाहर रेफर नहीं करना पड़ेगा। अभी तक जिला अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों को मेरठ मेडिकल रेफर किया जाता है।
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- 50 बेड के बनने वाले तीन मंजिला अस्पताल के भवन का 70 प्रतिशत कार्य हो चुका पूरा
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिला अस्पताल के बराबर में क्रिटिकल केयर अस्पताल में गंभीर रोगियाें और दुर्घटना में घायलों के उपचार की सुविधा मिलेगी। अस्पताल के तीन मंजिला भवन का निर्माण कार्य इस साल में पूरा होना था, लेकिन कार्यदायी संस्था यूपी सिडको ने शासन से अवशेष बजट न मिलने से निर्माण कार्य प्रभावित होना बताया है। कार्यदायी संस्था का कहना है कि शासन को बजट के लिए दो बार मांग पत्र भेजा जा चुका है। कार्यदायी संस्था ने मार्च 2026 तक निर्माण कार्य पूरा करने का समय मांगा है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत पूर्वी यमुना नहर पटरी के किनारे 4200 वर्ग मीटर भूमि पर 50 बेड क्रिटिकल केयर अस्पताल के भवन का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण कार्य इसी साल अक्तूबर में पूरा होना था, लेकिन अभी तक करीब 70 प्रतिशत निर्माण कार्य हो पाया है। इस साल में अस्पताल चालू करने की योजना थी, लेकिन इसकी उम्मीद कम है।
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यूपी सिडको के अधिशासी अभियंता विनोद कुमार ने बताया कि क्रिटिकल केयर अस्पताल के भवन के निर्माण के लिए 18.35 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हैं। अभी तक शासन से आठ करोड़ पांच लाख की धनराशि ही अवमुक्त हुई है। शेष बजट की धनराशि के लिए 30 अप्रैल व 12 जून को दो बार मांग पत्र एनएचएम के महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं लखनऊ को भेजा जा चुका है। बजट न मिलने से निर्माण कार्य की प्रगति धीमी चल रही हैं।
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बजट अवमुक्त न होने से उन्होंने मार्च 2026 तक निर्माण कार्य पूरा करने का समय मांगा है। उन्होंने बताया कि तीन मंजिला भवन बन चुका है। दीवारों पर सीमेंट के प्लास्टर व टाइल्स आदि लगाने का कार्य चल रहा है। भवन की फिनिशिंग और चहारदीवारी आदि का कार्य अभी शेष है। शासन से अवशेष बजट मिलते ही भवन निर्माण का कार्य जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
एनएचएम के जिला कार्यक्रम प्रबंधक आशुतोष श्रीवास्तव ने बताया कि क्रिटिकल केयर अस्पताल में मरीजों की ओपीडी नहीं होगी। अस्पताल में गंभीर बीमारियों और दुर्घटना में गंभीर घायलों का इलाज किया जाएगा। भवन का निर्माण कार्य पूरा होने पर इसे स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर किया जाएगा। शासन स्तर से जिला अस्पताल से अलग विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्टाफ की नियुक्ति की जाएगी। अस्पताल चालू होने से गंभीर मरीजों को बाहर रेफर नहीं करना पड़ेगा। अभी तक जिला अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों को मेरठ मेडिकल रेफर किया जाता है।