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विद्यालयों में दाखिले का बना संकट
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शामली। बेसिक शिक्षा विभाग से संचालित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय एक जुलाई से खुले हुए हैं, लेकिन नए बच्चों के दाखिले का संकट बना हुआ है। इसकी वजह यह है कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए शासन स्तर से विद्यालयों में बच्चों को बुलाने पर पाबंदी लगी है। शिक्षकों को ऑनलाइन या घर-घर जाकर बच्चों के बारे में जानकारी जुटाकर नए दाखिले करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके चलते विद्यालयों में कोरोना से पहले के सालों की तुलना में इस बार नए दाखिलों की संख्या बहुत कम चल रही है। नए दाखिले को लेकर कुछ विद्यालयों में पड़ताल की गई तो 10 से 25 बच्चों के बीच ही एक विद्यालय में दाखिले होना सामने आया है।
प्राथमिक विद्यालय नंबर एक खेड़ीकरमू की प्रधानाध्यापिका सुमन ने बताया कि अभी तक कक्षा एक में 10 नए बच्चों के दाखिले हुए हैं। दाखिले के लिए शिक्षिकाएं घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क किया जा रहा है। अब विद्यालयों में बच्चों की संख्या 168 हो गई है। दो साल पहले जब कोरोना नहीं था, उस समय इतने दिन में 40 से 50 नए बच्चों के दाखिले हो जाते थे।
उच्च प्राथमिक विद्यालय लिलौन की प्रधानाध्यापिका उपमा शर्मा ने बताया कि जुुलाई माह में अब तक 18 नए बच्चों के दाखिले हो चुुके हैं, जबकि अप्रैल में 16 नए दाखिले हुए थे। कोरोना से पहले वाले सालों में 70-80 दाखिले हो जाते थे। नए दाखिले के लिए गांव में घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क करने के साथ ही एनाउंस कराया जा रहा है।
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प्राथमिक विद्यालय लांक नंबर-एक की प्रधानाध्यापिका सुवासिनी ने बताया कि अब तक 25 बच्चों के नए दाखिले हुए हैं। विद्यालय में बच्चों के न आने से नए दाखिले को लेकर समस्या सामने आ रही है। विद्यालय स्टाफ के निजी प्रयास और घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों के नए दाखिले कराए जा रहे हैं।
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प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के ऑनलाइन व घर-घर जाकर नए दाखिले कर नामांकन संख्या बढ़ाने के निर्देश सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को दिए गए हैं। मिशन प्रेरणा डायल अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत शिक्षकों द्वारा अभिभावकों से बात कर नए दाखिले कराए जा रहे हैं। विद्यालयों में नए दाखिले किए जा रहे हैं। - अमित कुमार, जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता (बेसिक)।
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प्राथमिक विद्यालय नंबर एक खेड़ीकरमू की प्रधानाध्यापिका सुमन ने बताया कि अभी तक कक्षा एक में 10 नए बच्चों के दाखिले हुए हैं। दाखिले के लिए शिक्षिकाएं घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क किया जा रहा है। अब विद्यालयों में बच्चों की संख्या 168 हो गई है। दो साल पहले जब कोरोना नहीं था, उस समय इतने दिन में 40 से 50 नए बच्चों के दाखिले हो जाते थे।
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उच्च प्राथमिक विद्यालय लिलौन की प्रधानाध्यापिका उपमा शर्मा ने बताया कि जुुलाई माह में अब तक 18 नए बच्चों के दाखिले हो चुुके हैं, जबकि अप्रैल में 16 नए दाखिले हुए थे। कोरोना से पहले वाले सालों में 70-80 दाखिले हो जाते थे। नए दाखिले के लिए गांव में घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क करने के साथ ही एनाउंस कराया जा रहा है।
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प्राथमिक विद्यालय लांक नंबर-एक की प्रधानाध्यापिका सुवासिनी ने बताया कि अब तक 25 बच्चों के नए दाखिले हुए हैं। विद्यालय में बच्चों के न आने से नए दाखिले को लेकर समस्या सामने आ रही है। विद्यालय स्टाफ के निजी प्रयास और घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों के नए दाखिले कराए जा रहे हैं।
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प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के ऑनलाइन व घर-घर जाकर नए दाखिले कर नामांकन संख्या बढ़ाने के निर्देश सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को दिए गए हैं। मिशन प्रेरणा डायल अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत शिक्षकों द्वारा अभिभावकों से बात कर नए दाखिले कराए जा रहे हैं। विद्यालयों में नए दाखिले किए जा रहे हैं। - अमित कुमार, जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता (बेसिक)।