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क्राइम में यूं ही बदनाम नहीं है कैराना
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Wed, 15 Jun 2016 12:06 AM IST
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अपराध में बदनाम
- फोटो : अमर उजाला
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शामली में अपराध की दुनिया में कैराना यूं ही बदनाम नहीं हो गया। अब दहशत के चलते यहां से लोगों के पलायन पर भले ही कितनी राजनीति क्यों न की जाए, लेकिन कैराना थाने का आपराधिक रिकार्ड ही यहां की गुंडागर्दी की तस्दीक करने के लिए काफी है।
देश विरोधी मंसूबों के चलते खुफिया एजेंसी की नींद उड़ाने वाला इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा भी कैराना कोतवाली से हिस्ट्रशीटर हैं। इन दोनों के साथ ही कैराना कोतवाली में 109 हिस्ट्रीशीटर दर्ज है। आजादी के बाद से बेशक हिंदू-मुस्लिम सौहार्द को लेकर अन्य कस्बों को कैराना ने नसीहत मिली। कैराना के हालत नब्बे के दशक के बाद खराब हुए।
इस दौरान यहां से गठरी उद्योग के माध्यम से इकबाल काना दिलशाद मिर्जा आदि का पाकिस्तान से संपर्क हुआ तो सिलसिला चलने लगा। उसके बाद इन्होंने कैराना के लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनको पाकिस्तानी एजेंट बनाया और अपना नेटवर्क बढ़ाया।
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बाद में इकबाल काना तो पाकिस्तान जाकर सेट हो गया और आज तक देशविरोधी गतिविधियों में शामिल है। कोतवाली में इकबाल काना तथा उसके साथियों के खिलाफ हिस्ट्रीशीट भी खोली गई। 2000 के बाद तो कैराना में गुंडागर्दी बढ़ती चली गई। देश का सबसे हाईलाइट मामला प्रतीक दीवान अपहरण कांड कैराना से जुड़ा और यहीं से उसकी बरामदगी की गई।
इसके अलावा दिल्ली तथा अन्य राज्यों में नकली नोटों की खेप पकड़ी जाना हो या फिर बार्डर पर हथियार पकड़े जाना, हमेशा से खुफिया एजेंसियों की रडार पर कैैराना के रहने का कारक बना रहा। देखते ही देखते ही कैराना कोतवाली में हिस्ट्रीशीटरों की बाढ़ आ आ गई। आज कोतवाली में दर्ज हिस्ट्रीशीटरों की संख्या 109 है।
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देश विरोधी मंसूबों के चलते खुफिया एजेंसी की नींद उड़ाने वाला इकबाल काना और दिलशाद मिर्जा भी कैराना कोतवाली से हिस्ट्रशीटर हैं। इन दोनों के साथ ही कैराना कोतवाली में 109 हिस्ट्रीशीटर दर्ज है। आजादी के बाद से बेशक हिंदू-मुस्लिम सौहार्द को लेकर अन्य कस्बों को कैराना ने नसीहत मिली। कैराना के हालत नब्बे के दशक के बाद खराब हुए।
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इस दौरान यहां से गठरी उद्योग के माध्यम से इकबाल काना दिलशाद मिर्जा आदि का पाकिस्तान से संपर्क हुआ तो सिलसिला चलने लगा। उसके बाद इन्होंने कैराना के लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनको पाकिस्तानी एजेंट बनाया और अपना नेटवर्क बढ़ाया।
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बाद में इकबाल काना तो पाकिस्तान जाकर सेट हो गया और आज तक देशविरोधी गतिविधियों में शामिल है। कोतवाली में इकबाल काना तथा उसके साथियों के खिलाफ हिस्ट्रीशीट भी खोली गई। 2000 के बाद तो कैराना में गुंडागर्दी बढ़ती चली गई। देश का सबसे हाईलाइट मामला प्रतीक दीवान अपहरण कांड कैराना से जुड़ा और यहीं से उसकी बरामदगी की गई।
इसके अलावा दिल्ली तथा अन्य राज्यों में नकली नोटों की खेप पकड़ी जाना हो या फिर बार्डर पर हथियार पकड़े जाना, हमेशा से खुफिया एजेंसियों की रडार पर कैैराना के रहने का कारक बना रहा। देखते ही देखते ही कैराना कोतवाली में हिस्ट्रीशीटरों की बाढ़ आ आ गई। आज कोतवाली में दर्ज हिस्ट्रीशीटरों की संख्या 109 है।