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उपभोक्ता फोरम ने इंश्योरेंश कंपनी पर लगाया जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Sun, 21 Aug 2016 12:40 AM IST
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- फोटो : फाइल फोटो
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शामली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम ने एक लाइफ इंश्योरेंश कंपनी के खिलाफ एक लाख 82 हजार 779 का जुर्माना लगाते हुए एक माह में जुर्माने की धनराशि अदा करने के आदेश दिए हैं।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में शहर के पंजाबी कालोनी रेलपार निवासी सेवाराम ने मेरठ करनाल रोड स्थित एक लाइफ इंश्योरेंश कंपनी लिमिटेड के शाखा प्रबंधक को आरोपी बनाकर वाद दायर करते हुए अवगत कराया कि 19 जून 2014 को एक लाइफ इंश्योरेंश कंपनी में अपनी पत्नी शोभारानी की बीमा पॉलिसी कराई थी।
पत्नी शोभारानी की बीमा पॉलिसी के समय कंपनी ने मेडिकल जांच कराकर बांड जारी किया था। कंपनी ने पॉलिसी के समय बताया कि प्रीमियम 39 हजार 481 रुपये का दस गुणा चार लाख रुपये क्लेम के रुप में मिलेगा, लेकिन पत्नी शोभारानी की 31 जनवरी को शामली के कैराना रोड स्थित एक निजी नर्सिंग होम में मृत्यु हो गई थी। जिसकी सूचना मय रिकार्ड के कंपनी को दी गई थी।
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पीड़ित ने चार लाख रुपये मय ब्याज और 85 हजार रुपये क्षतिपूर्ति, 15 हजार रुपये वाद खर्चा मिलाकर पांच लाख रुपये की मांग की थी। कंपनी ने उसकी
पत्नी को डायबिटीज का मरीज बताकर क्लेम निरस्त कर दिया था।
फोरम में वाद स्वीकार करने के बाद चेयरमैन एसकेएस यादव, सदस्य श्रवण कुमार ने सुनवाई करते हुए आरोपी इंश्योरेेंश कंपनी के शाखा प्रबंधक को एक लाख 69 हजार 779 रुपये 6 अप्रैल 2016 से देय भुगतान की अवधि में सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से तथा 3000 रुपये वाद व्यय एवं दस हजार मानसिक क्षति के रूप में एक माह के अंदर दिए जाने के आदेश दिए हैं। आदेश का पालन न होने पर बारह प्रतिशत ब्याज के साथ अदा कराना होगा।
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में शहर के पंजाबी कालोनी रेलपार निवासी सेवाराम ने मेरठ करनाल रोड स्थित एक लाइफ इंश्योरेंश कंपनी लिमिटेड के शाखा प्रबंधक को आरोपी बनाकर वाद दायर करते हुए अवगत कराया कि 19 जून 2014 को एक लाइफ इंश्योरेंश कंपनी में अपनी पत्नी शोभारानी की बीमा पॉलिसी कराई थी।
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पत्नी शोभारानी की बीमा पॉलिसी के समय कंपनी ने मेडिकल जांच कराकर बांड जारी किया था। कंपनी ने पॉलिसी के समय बताया कि प्रीमियम 39 हजार 481 रुपये का दस गुणा चार लाख रुपये क्लेम के रुप में मिलेगा, लेकिन पत्नी शोभारानी की 31 जनवरी को शामली के कैराना रोड स्थित एक निजी नर्सिंग होम में मृत्यु हो गई थी। जिसकी सूचना मय रिकार्ड के कंपनी को दी गई थी।
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पीड़ित ने चार लाख रुपये मय ब्याज और 85 हजार रुपये क्षतिपूर्ति, 15 हजार रुपये वाद खर्चा मिलाकर पांच लाख रुपये की मांग की थी। कंपनी ने उसकी
पत्नी को डायबिटीज का मरीज बताकर क्लेम निरस्त कर दिया था।
फोरम में वाद स्वीकार करने के बाद चेयरमैन एसकेएस यादव, सदस्य श्रवण कुमार ने सुनवाई करते हुए आरोपी इंश्योरेेंश कंपनी के शाखा प्रबंधक को एक लाख 69 हजार 779 रुपये 6 अप्रैल 2016 से देय भुगतान की अवधि में सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से तथा 3000 रुपये वाद व्यय एवं दस हजार मानसिक क्षति के रूप में एक माह के अंदर दिए जाने के आदेश दिए हैं। आदेश का पालन न होने पर बारह प्रतिशत ब्याज के साथ अदा कराना होगा।