फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   गेम के चक्कर में अशांत हो गया था निशांत

गेम के चक्कर में अशांत हो गया था निशांत

Sat, 23 Sep 2017 12:47 AM IST
Updated Sat, 23 Sep 2017 12:47 AM IST
विज्ञापन
गेम के चक्कर में अशांत हो गया था निशांत
गेम के चक्कर में अशांत हो गया था निशांत का मन
विज्ञापन

शामली। एलम जैसे छोटे कस्बे के छात्र निशांत की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं तो घटना ने अभिभावकों को भी चिंता में डाल दिया है। कुछ और छात्र भी ऐसे हो सकते हैं, जो इस जानलेवा खेल को खेल रहे हैं। निशांत की कक्षा के एक और छात्र के इस गेम को खेलने की बात उसके सहपाठियों ने ही बताई है। ऐसे में अभिभावकों को जागरूक होकर अपने बच्चों के बारे में जानकारी रखनी चाहिए कि बच्चे पढ़ाई के अलावा आखिर कर क्या रहे हैं।
कस्बा एलम निवासी निशांत उर्फ मिंटू ने बृहस्पतिवार को ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। उसके साथी अनंत और अन्य छात्रों की मानें, तो निशांत का मन पढ़ाई में बिल्कुल नहीं लग रहा था। पिछले कुछ दिनों से उसका व्यवहार भी अजीब हो गया था। क्लास में टीचर गणित की किताब निकालनें को कहती थीं, तो वह हिंदी अथवा संस्कृत की किताब निकाल लेता था। क्लास में बैठकर भी वह अपने दोस्त शिवम के साथ मोबाइल फोन पर व्यस्त रहता था। इतना ही नहीं एलम से बस में स्कूल जाते समय और वहां से स्कूल की छुट्टी होने पर घर लौटते समय भी मोबाइल पर गेम खेलने का मोह कम नहीं हो रहा था और यह उसे आत्मघाती कदम उठाने की ओर ले गया।
विज्ञापन


बेहतर शिक्षा दिलाने के साथ ही बच्चों के सुरक्षित भविष्य के बारे में भी समाज को सोचना चाहिए। अभिभावकों और अध्यापकों की इसमें बड़ी भूमिका हो सकती है। वह बच्चों को समझाएं कि तकनीकी युग में क्या क्या उनके लिए फायदेमंद है और क्या खराब है। स्कूल प्रबंधनों को इसमें गंभीरता दिखानी होगी। ताकि बच्चों को अच्छे और बुरे का ज्ञान हो और वह किसी विपदा में फंसने से बच सकें। ---- इंद्र विक्रम सिंह, जिलाधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

----
बच्चों को अच्छे बुरे के बारे में बताया जाए। बच्चों की काउंसलिंग जरूरी है। फोन रखने पर प्रतिबंध तो नहीं लग सकता, लेकिन उन्हें जागरूक करके किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सकता है। स्कूल अध्यापकों की जिम्मेदारी भी है कि बच्चों को समझाएं। -- सूर्यवीर सिंह, चेयरमैन बीएसएम स्कूल
-----
ब्लू व्हेल गेम खतरनाक है। स्कूल अध्यापक और अभिभावकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वह बच्चों को समझाएं कि ऐसे खतरनाक गेम ना खेलें। 10 से 14 साल तक के बच्चों को समझाएं कि उनके लिए क्या ठीक है, क्या गलत है। --- एके गोयल, प्रधानाचार्य, सिल्वर बेल्स स्कूल

----
स्कूल की तरफ से अभिभावकों को बता दिया गया है कि बच्चों को एंड्रायड फोन इस्तेमाल और खासकर सोशल मीडिया व्हाटसअप के प्रयोग से बचाकर रखना चाहिए। क्योंकि ब्लू व्हेल के अलावा भी ज्यादा समय मोबाइल पर गेम्स खेलने से बच्चों पर दुष्प्रभाव पड़ता है। --- यशपाल पंवार, डायरेक्टर सेंट आरसी साइंटिफिक स्कूल कैराना
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed