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सिलसिलेवार अपराधों से बिगड़े हालात

Fri, 17 Jun 2016 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
अमर उजाला ब्यूरो, शामली Updated Fri, 17 Jun 2016 12:46 AM IST
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crime increase change the situation
शिवकुमार की मां से बातचीत, घटना को याद कर फफक पड़ी प्रकाशवती - फोटो : अमर उजाला
शामली के कैराना में अगस्त 2014 में रंगदारी ना देने पर तीन व्यापारियों की हत्या करने से जिले भर के व्यापारियों में आक्रोश पैदा हो गया था। 16 अगस्त को कैराना के व्यापारी विनोद की हत्या हुई, जिसके बाद 24 अगस्त को शिवकुमार और राजेंद्र की हत्या हुई। तब जिले भर के व्यापारियों ने आंदोलन किया। इतना ही नहीं, व्यापारियों ने सामूहिक रूप से अपने प्रतिष्ठान बंद करके सांसद हुकुम सिंह को चाबियां भी सौंपने की बात कही थी। तब नेताओं से लेकर पुलिस प्रशासन भी व्यापारियों की इस पीड़ा को ठीक से समझ नहीं पाया था। 
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वारदातों को अंजाम देने वाला मुकीम काला गिरोह भी पुलिस की पकड़ से दूर रहा, जिसका नुकसान यह हुआ कि उन वारदातों के बाद भी कैराना, कांधला और शामली में रंगदारी की धमकियां दी गई। यहां तक कि मुकीम काला के नाम पर छुटभैया बदमाशों ने भी रंगदारी वसूलने के उद्देश्य से व्यापारियों को धमकाना शुरू कर दिया था।
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कौन सुनेगा हमारी, बहुत  दर्द  भरी कहानी है 
शामली। 'हमारी कौन सुनेगा, बहुत दर्द भरी कहानी है, मेरे बेटे ने किसी का क्या बिगाड़ा था, जो उसे मार दिया। इतना बोलते ही प्रकाशवती की आंखों से आंसू छलक पड़े और गला रुंध आया। बेटे शिवकुमार की मौत का वो मंजर याद करके आज भी प्रकाशवती सिहर उठती हैं। कैराना स्थित टीचर्स कालोनी निवासी प्रकाशवती के बेटे शिवकुमार और उसके ममेरे भाई राजेंद्र की 24 अगस्त 2014 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात कैराना में पानीपत रोड स्थित उनकी दुकान पर अंजाम दी गई थी। वारदात को हुए करीब दो साल बीत गए हैं, मगर अब तक शिवकुमार और राजेंद्र के परिवार को प्रदेश सरकार की तरफ से किसी तरह की सहायता नहीं मिली। घटना के होने पर व्यापारियों ने आंदोलन भी किया था। तब सत्ताधारी पार्टी के एक राज्यमंत्री ने पीड़ितों के पास पहुंचकर आश्वासन दिया था कि पीड़ित परिवार की पूरी मद्द की जाएगी, मगर वह वादे खोखले ही साबित हुए। बृहस्पतिवार को शिवकुमार की मां प्रकाशवती से इस बारे में बात की गई, तो उनके गुस्से का गुब्बार सहसा ही जुबां पर आ गया। वह बोलीं कि हमारा तो सबकुछ उजड़ गया। जवान बेटा खोया है हमने, पर हमारा दर्द किसी ने महसूस नहीं किया। 
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सदमे में चल बसे शिवकुमार के पिता 
शिवकुमार की हत्या होने पर उनके पिता रामेश्वर प्रसाद को गहरा आघात लगा था। प्रकाशवती बताती हैं कि बेटे की मौत के सदमे की वजह से 11 महीने बाद ही उनकी मृत्यु हो गई। वहीं, शिवकुमार की पत्नी अपने तीनों बच्चों (दो बेटी और एक बेटा) को लेकर यहां से चली गई। वह कहां गई, इस बारे में प्रकाशवती ने बताने से इंकार कर दिया।
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