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Shamli News: छात्र की हत्या में दोषी चचेरे भाई को आजीवन कारावास
Tue, 01 Sep 2026 12:52 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Tue, 01 Sep 2026 12:52 AM IST
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कैराना। गांव इस्सोपुर खुरगान में 15 साल पहले दीवार के विवाद में कक्षा 12 के छात्र राजेश की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नवीन कुमार सिंह ने दोष सिद्ध पाए जाने पर मृतक के चचेरे भाई देवी सिंह को आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाई।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजय सिंह पूनिया ने बताया कि 31 अगस्त 2011 को कैराना क्षेत्र के गांव इस्सोपुर खुरगान निवासी सुरेश ने कोतवाली पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि सुबह के समय वह अपने कमरे की दीवार की मोरी (छेद) बंद करके अपने भाई राजेश और माता-पिता के साथ खेत चला गया था। सुबह करीब 10 बजे उसका चाचा लीलू और उसका पुत्र देवी सिंह उनके घर पर आए तथा जबरदस्ती मोरी खोलने लगे। उसकी पत्नी शिक्षा ने विरोध किया तो आरोपियों ने हाथापाई की। इस दौरान उसके माता-पिता और राजेश घर पर वापस आ गए। वह अपने भाई राजेश के साथ उलाहना देने के लिए चाचा लीलू के घर गए थे। इस दौरान चाचा लीलू और उसके बेटे देवी सिंह ने उसके भाई राजेश को घर के अंदर खींच लिया था और गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने पिता-पुत्रों को गिरफ्तार करके चालान कर दिया था। दो नवंबर 2011 को पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिए थे।
अभियोजन पक्ष की ओर से पांच गवाह पेश किए गए। मुकदमे की सुनवाई के दौरान लीलू की मौत हो गई थी। सोमवार को दोनों पक्षों की दलील सुनने और पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नवीन कुमार सिंह ने मुजरिम देवी सिंह को दोष सिद्ध पाए जाने पर आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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मुजरिम देवी सिंह को पहले नाबालिग मानकर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चला था मुकदमा
कैराना। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजय सिंह पूनिया ने बताया कि हत्या के समय मुजरिम देवी सिंह को नाबालिग मानकर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में मुकदमा चला था जबकि उसके पिता लीलू का मुकदमा सत्र न्यायालय में चला था। 2016 में न्यायालय ने देवी सिंह को नाबालिग मानते हुए रिहा कर दिया था। इसके बाद मृतक राजेश के भाई और मुकदमे के वादी सुरेश सुप्रीम कोर्ट की शरण में गए थे। एक अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में मुजरिम देवी सिंह को बालिग मानते हुए सक्षम न्यायालय में दोबारा मुकदमा चलाने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि हत्या के मुकदमे की जल्द सुनवाई पूरी की जाए। इसके बाद हत्या का यह मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में चलाया गया।-- -
न्यायाधीश ने हत्या को जघन्य अपराध लिखा
कैराना। राजेश की हत्या के मामले में न्यायाधीश नवीन कुमार सिंह ने टिप्पणी की है कि हत्या एक जघन्य अपराध है। इसलिए गंभीर अपराध के मामले में मुजरिम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजय सिंह पूनिया ने बताया कि 31 अगस्त 2011 को कैराना क्षेत्र के गांव इस्सोपुर खुरगान निवासी सुरेश ने कोतवाली पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि सुबह के समय वह अपने कमरे की दीवार की मोरी (छेद) बंद करके अपने भाई राजेश और माता-पिता के साथ खेत चला गया था। सुबह करीब 10 बजे उसका चाचा लीलू और उसका पुत्र देवी सिंह उनके घर पर आए तथा जबरदस्ती मोरी खोलने लगे। उसकी पत्नी शिक्षा ने विरोध किया तो आरोपियों ने हाथापाई की। इस दौरान उसके माता-पिता और राजेश घर पर वापस आ गए। वह अपने भाई राजेश के साथ उलाहना देने के लिए चाचा लीलू के घर गए थे। इस दौरान चाचा लीलू और उसके बेटे देवी सिंह ने उसके भाई राजेश को घर के अंदर खींच लिया था और गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस ने पिता-पुत्रों को गिरफ्तार करके चालान कर दिया था। दो नवंबर 2011 को पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिए थे।
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अभियोजन पक्ष की ओर से पांच गवाह पेश किए गए। मुकदमे की सुनवाई के दौरान लीलू की मौत हो गई थी। सोमवार को दोनों पक्षों की दलील सुनने और पत्रावलियों का अवलोकन करने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नवीन कुमार सिंह ने मुजरिम देवी सिंह को दोष सिद्ध पाए जाने पर आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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मुजरिम देवी सिंह को पहले नाबालिग मानकर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में चला था मुकदमा
कैराना। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजय सिंह पूनिया ने बताया कि हत्या के समय मुजरिम देवी सिंह को नाबालिग मानकर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में मुकदमा चला था जबकि उसके पिता लीलू का मुकदमा सत्र न्यायालय में चला था। 2016 में न्यायालय ने देवी सिंह को नाबालिग मानते हुए रिहा कर दिया था। इसके बाद मृतक राजेश के भाई और मुकदमे के वादी सुरेश सुप्रीम कोर्ट की शरण में गए थे। एक अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में मुजरिम देवी सिंह को बालिग मानते हुए सक्षम न्यायालय में दोबारा मुकदमा चलाने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि हत्या के मुकदमे की जल्द सुनवाई पूरी की जाए। इसके बाद हत्या का यह मुकदमा अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में चलाया गया।
न्यायाधीश ने हत्या को जघन्य अपराध लिखा
कैराना। राजेश की हत्या के मामले में न्यायाधीश नवीन कुमार सिंह ने टिप्पणी की है कि हत्या एक जघन्य अपराध है। इसलिए गंभीर अपराध के मामले में मुजरिम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाती है।