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Shamli News: क्लेम न देने पर इंश्योरेंस कंपनी पर 1.40 लाख रुपये जुर्माना
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शामली। न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने पशु का क्लेम न देने के मामले में सुनवाई की। आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी पर 1.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
गांव कसेरवा कलां निवासी सीमा ने 28 अप्रैल को आयोग में न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी शामली के क्षेत्रीय प्रबंधक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (कारपोरेशन बैंक) शामली के शाखा प्रबंधक व न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मुजफ्फरनगर के प्रबंधक के खिलाफ परिवाद दायर कराया। परिवादी ने बताया कि उसने माइक्रो कामधेनु योजना में यूनियन बैंक से लोन मंजूर कराया था।
लोन स्वीकृति के बाद पशुओं की डेयरी कर रखी थी। इसके बाद इंश्योरेंस कंपनी से बीमा कराया था। प्रत्येक पशु का बीमा तीन साल का था। 12 जनवरी 2021 को उसकी एक गाय मर गई। इस गाय का बीमा 60 हजार रुपये का था। गाय की मौत के संंबंध में इंश्योरेंस कंपनी को जानकारी दी गई और उसके पोस्टमार्टम के कागज व अन्य कागज देने की कोशिश की, लेकिन कंपनी ने लेने से मना कर दिया और बीमा दावा खारिज कर दिया।
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आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने इस मामले की सुनवाई के बाद बीमा कंपनी को आदेशित किया कि परिवाद में वर्णित बीमा क्लेम की धनराशि 60 हजार रुपये,बीमा क्लेम निरस्त किए जाने की तिथि से अंतिम भुगतान की तिथि तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित, परिवादी को हुई मानसिक, आर्थिक एवं शारीरिक क्षतिपूर्ति के रूप में 25 हजार रुपये और परिवाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये परिवादी को अदा करने के लिए आयोग में जमा करें। इंश्योरेंस कंपनी द्वारा की गई सेवा में कमी एवं अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए 45 हजार रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया। अर्थदंड की धनराशि राजकोष में जमा की जाएगी।
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गांव कसेरवा कलां निवासी सीमा ने 28 अप्रैल को आयोग में न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी शामली के क्षेत्रीय प्रबंधक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (कारपोरेशन बैंक) शामली के शाखा प्रबंधक व न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड मुजफ्फरनगर के प्रबंधक के खिलाफ परिवाद दायर कराया। परिवादी ने बताया कि उसने माइक्रो कामधेनु योजना में यूनियन बैंक से लोन मंजूर कराया था।
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लोन स्वीकृति के बाद पशुओं की डेयरी कर रखी थी। इसके बाद इंश्योरेंस कंपनी से बीमा कराया था। प्रत्येक पशु का बीमा तीन साल का था। 12 जनवरी 2021 को उसकी एक गाय मर गई। इस गाय का बीमा 60 हजार रुपये का था। गाय की मौत के संंबंध में इंश्योरेंस कंपनी को जानकारी दी गई और उसके पोस्टमार्टम के कागज व अन्य कागज देने की कोशिश की, लेकिन कंपनी ने लेने से मना कर दिया और बीमा दावा खारिज कर दिया।
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आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता ने इस मामले की सुनवाई के बाद बीमा कंपनी को आदेशित किया कि परिवाद में वर्णित बीमा क्लेम की धनराशि 60 हजार रुपये,बीमा क्लेम निरस्त किए जाने की तिथि से अंतिम भुगतान की तिथि तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित, परिवादी को हुई मानसिक, आर्थिक एवं शारीरिक क्षतिपूर्ति के रूप में 25 हजार रुपये और परिवाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये परिवादी को अदा करने के लिए आयोग में जमा करें। इंश्योरेंस कंपनी द्वारा की गई सेवा में कमी एवं अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए 45 हजार रुपये का अर्थदंड अधिरोपित किया। अर्थदंड की धनराशि राजकोष में जमा की जाएगी।