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नहीं चुका पाए उधार, मुश्किलें बढ़ गईं हजार
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प्रदीप वर्मा
कैराना। किसान ने रकम उधार लेकर रबी की फसल बोई थी। किसी ने गेहूं बोया और किसी ने सब्जी लगाई। मगर लॉकडाउन की मार से किसान बुरी तरह टूट गया। रही सही कसर मौसम ने पूरी कर दी। हालत ये हो गई कि औने पौने दाम में फसल बेचनी पड़ी। मंडी ले जाने का भाड़ा और मजदूरी भी नहीं निकली। रबी की फसल बोने को लिया गया कर्ज भी नहीं चुका सके। हालत ये है कि अब धान की फसल बोने को भी बहुत से किसानों पर रुपये नहीं है। अमर उजाला टीम ने किसानों से बात कर इसकी पड़ताल की। पेश है रिपोर्ट।
ना बहनोई का उधार गया, ना ईद पर नए कपडे़ बने
कैराना के आर्यपुरी देहात निवासी किसान मांगा ने बताया कि कोरोना फैलने से पहले 15 बीघा जमीन में फूल गोभी की फसल लगाई थी। जिसके लिए बहनोई से 50 हजार रुपये उधार लिए थे, सोचा था फसल बेचकर कुछ रुपये कमा लूंगा। बहनोई का कर्जा उतार दूंगा। ईद पर बच्चों के नए कपड़े बनवाऊंगा, लेकिन लॉकडाउन में बाजार बंद हो गए। सब्जी मंडी भी दो तीन घंटे को खुल रही थी। पांच छह रुपये किलो में बेचनी पड़ी। मंडी तक लाने का किराया निकालना मुश्किल हो रहा था। धान की फसल बोनी थी, इसलिए गोभी की फसल नष्ट करनी पड़ी। ना बहनोई का कर्जा उतरा और ना ही बच्चों के ईद के नए कपड़े बने। अब धान की बुवाई को भी पैसा नहीं है। इधर उधर से उधार उठाने का प्रयास कर रहा हूं।
गेहूं भी उधार बिका, धान बोने को भी पैसा नहीं
आर्यपुरी देहात बस्ती के किसान इमरान ने बताया कि उसने 11 बीघा जमीन में गेहूं की फसल बोई थी। चौक बाजार में एक आढ़ती से 10 बैग खाद के उधार लिए थे। लॉक डाउन के चलते मजदूर नहीं मिले। इस वजह से गेहूं की फसल समय पर नहीं कटी। इस दौरान बरसात और ओले गिर गए और गेहूं का दाना खराब हो गया। पहले उनके खेत में एक बीघा फसल में पांच क्विंटल अनाज होता था, लेकिन इस बार केवल दो क्विंटल अनाज ही पैदा हुआ। पड़ोस में ही 10 क्विंटल अनाज बेचा था, लेकिन पड़ोसी भी परेशान है उसने भी अभी तक पैसा नहीं दिया। अब हालत ये है कि धान की फसल बोने को रुपये नहीं है। कुछ लोगों से बात की लेकिन सबने अपनी मजबूरी जता दी।
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मंदे में बेचना पड़ा गेहूं, अब खेत खाली
कैराना के किसान फुरकान कहते हैं कि उन दो भाइयों ने 25 बीघा जमीन में गेहूं की फसल बोई थी। बहन की शादी भी करनी थी। गेहूं की फसल के लिए आढ़ती से पैसे उधार लिए थे। कोरोना संक्रमण के चलते फसल तैयार होने पर मजदूर नहीं मिले। जिस कारण गेहूं समय पर नहीं कटा। इसके बाद बारिश और ओलों ने फसल खराब कर दी। क्रय केंद्र पर दाना खराब बताया नहीं लिया गया। मंदे में ही उधार में गेहूं दे दिया। अब धान बोने को भी उनके पास कुछ नहीं है। खेत खाली है और हालत पतली।
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कैराना। किसान ने रकम उधार लेकर रबी की फसल बोई थी। किसी ने गेहूं बोया और किसी ने सब्जी लगाई। मगर लॉकडाउन की मार से किसान बुरी तरह टूट गया। रही सही कसर मौसम ने पूरी कर दी। हालत ये हो गई कि औने पौने दाम में फसल बेचनी पड़ी। मंडी ले जाने का भाड़ा और मजदूरी भी नहीं निकली। रबी की फसल बोने को लिया गया कर्ज भी नहीं चुका सके। हालत ये है कि अब धान की फसल बोने को भी बहुत से किसानों पर रुपये नहीं है। अमर उजाला टीम ने किसानों से बात कर इसकी पड़ताल की। पेश है रिपोर्ट।
ना बहनोई का उधार गया, ना ईद पर नए कपडे़ बने
कैराना के आर्यपुरी देहात निवासी किसान मांगा ने बताया कि कोरोना फैलने से पहले 15 बीघा जमीन में फूल गोभी की फसल लगाई थी। जिसके लिए बहनोई से 50 हजार रुपये उधार लिए थे, सोचा था फसल बेचकर कुछ रुपये कमा लूंगा। बहनोई का कर्जा उतार दूंगा। ईद पर बच्चों के नए कपड़े बनवाऊंगा, लेकिन लॉकडाउन में बाजार बंद हो गए। सब्जी मंडी भी दो तीन घंटे को खुल रही थी। पांच छह रुपये किलो में बेचनी पड़ी। मंडी तक लाने का किराया निकालना मुश्किल हो रहा था। धान की फसल बोनी थी, इसलिए गोभी की फसल नष्ट करनी पड़ी। ना बहनोई का कर्जा उतरा और ना ही बच्चों के ईद के नए कपड़े बने। अब धान की बुवाई को भी पैसा नहीं है। इधर उधर से उधार उठाने का प्रयास कर रहा हूं।
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गेहूं भी उधार बिका, धान बोने को भी पैसा नहीं
आर्यपुरी देहात बस्ती के किसान इमरान ने बताया कि उसने 11 बीघा जमीन में गेहूं की फसल बोई थी। चौक बाजार में एक आढ़ती से 10 बैग खाद के उधार लिए थे। लॉक डाउन के चलते मजदूर नहीं मिले। इस वजह से गेहूं की फसल समय पर नहीं कटी। इस दौरान बरसात और ओले गिर गए और गेहूं का दाना खराब हो गया। पहले उनके खेत में एक बीघा फसल में पांच क्विंटल अनाज होता था, लेकिन इस बार केवल दो क्विंटल अनाज ही पैदा हुआ। पड़ोस में ही 10 क्विंटल अनाज बेचा था, लेकिन पड़ोसी भी परेशान है उसने भी अभी तक पैसा नहीं दिया। अब हालत ये है कि धान की फसल बोने को रुपये नहीं है। कुछ लोगों से बात की लेकिन सबने अपनी मजबूरी जता दी।
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मंदे में बेचना पड़ा गेहूं, अब खेत खाली
कैराना के किसान फुरकान कहते हैं कि उन दो भाइयों ने 25 बीघा जमीन में गेहूं की फसल बोई थी। बहन की शादी भी करनी थी। गेहूं की फसल के लिए आढ़ती से पैसे उधार लिए थे। कोरोना संक्रमण के चलते फसल तैयार होने पर मजदूर नहीं मिले। जिस कारण गेहूं समय पर नहीं कटा। इसके बाद बारिश और ओलों ने फसल खराब कर दी। क्रय केंद्र पर दाना खराब बताया नहीं लिया गया। मंदे में ही उधार में गेहूं दे दिया। अब धान बोने को भी उनके पास कुछ नहीं है। खेत खाली है और हालत पतली।