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कोरोना ने बदल दी बच्चों की दिनचर्या, रखे ख्याल
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कोरोना ने बदल दी बच्चों की दिनचर्या, रखें ख्याल
शामली। कोरोना ने बच्चों की दिनचर्या बदल दी है। संक्रमण के डर से बच्चे घर में कैद होकर रह गए हैं। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ऐसी परिस्थिति में हमें बच्चों की सेहत और दिनचर्या पर ध्यान देना होगा, ताकि उनके स्वास्थ्य पर किसी तरह का प्रतिकूल असर न पड़ सके। चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार करें, ताकि उन्हें अकेलापन महसूस न हो।
पिछले साल लॉकडाउन की तरह इस बार भी कोरोना संक्रमण फैलने के कारण कोरोना कर्फ्यू रहा। स्कूल बंद हो गए और बच्चे घर में कैद हो गए। इस हालात में बच्चों की दिनचर्या में बदलाव देखने को मिला है। सबसे ज्यादा वक्त बच्चे मोबाइल, टीवी, लैपटॉप पर चिपके रहते हैं। देर रात तक जागते हैं और सुबह देर तक सोते हैं। उनका खानपान बदल गया है। जंक फूड्स ज्यादा खा रहे हैं। कुल मिलाकर स्कूल में जो समय पढ़ाई के साथ दोस्तों के साथ बीतता था, वह समय अब घर में ही बिताना पड़ रहा है। बच्चे इसे लेकर अंदर ही अंदर परेशान नजर आते हैं। आईएमए शामली के अध्यक्ष डॉ. अकबर खान का कहना है कि खानपान में बदलाव और एक्टीविटी न होने की वजह से बच्चों में मोटापा और सुस्ती के मामले बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चे स्कूल जाते थे तो कुछ नया सीखते थे, दोस्तों से अपनी बात साझा करते थे और हंसते बोलते थे, लेकिन घर में ये सब न होने से उनका शारीरिक व मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है। इसलिए अभिभावकों और माता-पिता को बच्चों की इच्छाओं का ख्याल रखना चाहिए। उनके दोस्त बनें और डांटने के बजाए प्यार से समझाएं। उनके साथ खेलें और उनके साथ बातों को साझा करें।
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बच्चों के साथ ये करें अभिभावक
- बच्चों को योगा व व्यायाम कराएं।
- जंक फूड्स खाने से बचाव करें।
- पौष्टिक एवं संतुलित आहार दें।
- मोबाइल, टीवी या लैपटॉप देखने का समय निर्धारित करें।
- इंडोर गेम रस्सा कूदना, कैरम, लूडो आदि खेलें।
- बच्चों के साथ बैठें, खेले और उनकी बात समझें।
- घर में उछलकूद या दौड़ रहे हैं तो करने दें।
बच्चों को हर समय किसी न किसी बात पर डांटने के बजाय प्यार से समझाएं।
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शामली। कोरोना ने बच्चों की दिनचर्या बदल दी है। संक्रमण के डर से बच्चे घर में कैद होकर रह गए हैं। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ऐसी परिस्थिति में हमें बच्चों की सेहत और दिनचर्या पर ध्यान देना होगा, ताकि उनके स्वास्थ्य पर किसी तरह का प्रतिकूल असर न पड़ सके। चिकित्सकों का कहना है कि बच्चों के साथ दोस्ताना व्यवहार करें, ताकि उन्हें अकेलापन महसूस न हो।
पिछले साल लॉकडाउन की तरह इस बार भी कोरोना संक्रमण फैलने के कारण कोरोना कर्फ्यू रहा। स्कूल बंद हो गए और बच्चे घर में कैद हो गए। इस हालात में बच्चों की दिनचर्या में बदलाव देखने को मिला है। सबसे ज्यादा वक्त बच्चे मोबाइल, टीवी, लैपटॉप पर चिपके रहते हैं। देर रात तक जागते हैं और सुबह देर तक सोते हैं। उनका खानपान बदल गया है। जंक फूड्स ज्यादा खा रहे हैं। कुल मिलाकर स्कूल में जो समय पढ़ाई के साथ दोस्तों के साथ बीतता था, वह समय अब घर में ही बिताना पड़ रहा है। बच्चे इसे लेकर अंदर ही अंदर परेशान नजर आते हैं। आईएमए शामली के अध्यक्ष डॉ. अकबर खान का कहना है कि खानपान में बदलाव और एक्टीविटी न होने की वजह से बच्चों में मोटापा और सुस्ती के मामले बढ़ रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि बच्चे स्कूल जाते थे तो कुछ नया सीखते थे, दोस्तों से अपनी बात साझा करते थे और हंसते बोलते थे, लेकिन घर में ये सब न होने से उनका शारीरिक व मानसिक विकास प्रभावित हो रहा है। इसलिए अभिभावकों और माता-पिता को बच्चों की इच्छाओं का ख्याल रखना चाहिए। उनके दोस्त बनें और डांटने के बजाए प्यार से समझाएं। उनके साथ खेलें और उनके साथ बातों को साझा करें।
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बच्चों के साथ ये करें अभिभावक
- बच्चों को योगा व व्यायाम कराएं।
- जंक फूड्स खाने से बचाव करें।
- पौष्टिक एवं संतुलित आहार दें।
- मोबाइल, टीवी या लैपटॉप देखने का समय निर्धारित करें।
- इंडोर गेम रस्सा कूदना, कैरम, लूडो आदि खेलें।
- बच्चों के साथ बैठें, खेले और उनकी बात समझें।
- घर में उछलकूद या दौड़ रहे हैं तो करने दें।
बच्चों को हर समय किसी न किसी बात पर डांटने के बजाय प्यार से समझाएं।