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78.60 करोड की लागत से मामौर झील के पास सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण शुरू

Wed, 08 Dec 2021 12:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 08 Dec 2021 12:27 AM IST
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Construction of sewage treatment plant started at a cost of 78.60 crores
कैराना में मामौर झील के पास बनने वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की नीव की खुदाई करती जेसीबी व कर्मचा - फोटो : SHAMLI
कैराना। नमामि गंगे योजना के तहत जल निगम ने मामौर झील के पास 78.60 करोड़ की लागत में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए सुभाष इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारी जेसीबी से प्लांट की नींव खोदने में लगे है।
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नमामि गंगे योजनांतर्गत मामौर झील के गंदे पानी से निजात दिलाने के लिए जल निगम ने मामौर झील के पास कृषि उद्यान फार्म के सामने 8,400 वर्ग मीटर भूमि पर 78.60 करोड़ की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कार्य सुभाष इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड ने शुरू कर दिया है। मंगलवार को कंपनी के कर्मचारियों ने जेसीबी मशीन से नींव की खुदाई का कार्य शुरू कर दिया। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में कैराना से जाने वाले नाले का गंदा पानी व मामौर झील का गंदा पानी बड़े पाइपों से पहुंचाया जाएगा। जहां पर प्लांट में पानी को शुद्ध करने के बाद उसे पाइपों से यमुना नदी में छोड़ा जाएगा। साथ ही गंदे पानी से निकलने वाले मैले से खाद बनाई जाएगी। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट 2023 तक बनकर तैयार हो जाएगा। जिसके बाद आसपास के गांव मामौर, मवी, पंजीठ, हैदरपुर, काकौर आदि में दूषित भूजल की समस्या का निदान हो जाएगा।
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इन्होंने कहा-
नमामि गंगे योजना के तहत मामौर झील के पास 8400 वर्ग मीटर जमीन पर 78.60 करोड़ के बजट में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कार्य शुरू किया गया है। उक्त प्लांट 2023 तक सुचारू रूप से काम करना शुरू कर देगा।-आरके जैन अधिशासी अभियंता, जल निगम शामली
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इनसेट....
प्रतिदिन डेढ़ करोड़ लीटर पानी का होगा शोधन
जल निगम के अधिशासी अभियंता आरके जैन ने बताया कि मामौर झील के पास बनने वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट 15 एमएलडी की क्षमता का होगा जिसमें प्रतिदिन डेढ़ करोड़ लीटर गंदे पानी को शुद्ध करके यमुना में छोड़ा जाएगा। किसान अगर चाहेंगे तो उन्हें भी सिंचाई के लिए पानी दिया जाएगा।

इनसेट...
दशकों से चली आ रही समस्या से मिलेगी निजात
कैराना। बरसात के दिनों में मामौर झील से पानी की निकासी न होने के कारण झील अक्सर ओवरफ्लो होकर टूट जाती है। झील का गंदा पानी आसपास के किसानों की हजारों बीघा फसलों को बर्बाद करता है। इसके अलावा कैराना से झील तक नाले से गंदा पानी जाता है। कच्चे नाले के कारण जमीन में भी रिसता रहता है। जिस कारण ग्रामीण पेयजल दूषित होने व इससे गांव में हेप्टाइटिस सी (काला पीलिया) व कैंसर बीमारी फैलने की शिकायत करते रहते हैं। पंजीठ व मामौर में काला पीलिया का अधिक प्रकोप देखने को मिलता है। वहीं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनने के बाद ग्रामीणों को दूषित पानी से राहत मिलेगी।
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