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पुलिस कार्रवाई के दावे, महिला हिंसा पर अंकुश नहीं

Wed, 24 Nov 2021 11:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 24 Nov 2021 11:48 PM IST
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Claims of police action, no curb on violence against women
शामली। महिला हिंसा की रोकथाम शासन की प्राथमिकता में है। महिला अपराध रोकने और जागरूक करने के लिए कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस कार्रवाई करती है, लेकिन इसके बाद भी महिला हिंसा के मामले सामने आते रहते हैं। जिले में इस साल अब तक महिला अपराध से संबंधित लगभग 155 मामले सामने आए हैं।
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महिलाओं की सुरक्षा और जागरूकता को लेकर मिशन शक्ति अभियान चल रहा है। इन कार्यक्रमों में महिलाओं को शासन की तरफ से जारी हेल्पलाइन नंबर 1090, 1098, डायल 112 आदि की जानकारी देकर जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही महिलाओं और बालिकाओं को आत्मरक्षा के लिए भी प्रेरित किया जाता है। पुलिस विभाग की तरफ से गांवों में बीट प्रणाली लागू कर महिला बीट का गठन किया गया है, जो गांवों में पूर्व में हुए महिला संबंधी अपराधों की जानकारी लेकर कार्रवाई करती है और पीड़िता को न्याय दिलाती है। छेड़खानी की घटनाओं को रोकने के लिए एंटी रोमियो टीम स्कूल-कालेजों के आसपास सक्रिय रहती है। इतना होने के बाद भी भी महिला हिंसा के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं।
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हाल ही में शहर में मंगलवार को कालेज आते जाते दो छात्राओं से छेड़छाड़ का मामला सामने आया। एक सप्ताह पहले डिग्री कालेज में पढ़ने वाली छात्रा ने सीनियर क्लास के छात्रों पर छेड़खानी व भद्दे कमेंट करने की शिकायत सीओ सिटी से की थी। इस तरह के मामले पूर्व में भी सामने आ चुके हैं।
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जिले में इस साल जनवरी से अब तक महिला अपराध से संबंधित करीब 155 मामले सामने आए हैं। एएसपी ओपी सिंह का कहना है कि महिला संबंधी अपराधों में त्वरित कार्रवाई की जाती है। महिला अपराधों की रोकथाम के महिला बीट प्रणाली, मिशन शक्ति अभियान आदि कार्यक्रमों में महिला हेल्प लाइन व आत्म सुरक्षा की जानकारी देकर जागरूक किया जाता है।

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संस्कारों की कमी, धैर्य खोना भी हिंसा की वजह
ऐच्छिक ब्यूरो और महिला थाने पर महिला हिंसा के मामलों में एकल परिवार होना, संस्कारों की कमी और छोटी-छोटी बातों को लेकर धैर्य खोना आदि कारण सामने आते है। मोबाइल और सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा व्यस्त होना भी एक कारण होता है। ऐसे मामलों में महिलाओं से मारपीट व उत्पीड़न शुरू होता है। ऐच्छिक ब्यूरो और महिला थाने पर दोनों पक्षों को बुलाकर पहले समझाया जाता है। ज्यादातर मामलों में सुलह हो जाती है, जिनमें सुलह नहीं होती, उनमें पुलिस कार्रवाई की जाती है। ऐच्छिक ब्यूरो की सदस्य समाजसेवी वीना अग्रवाल का कहना है कि पारिवारिक विवादों में दोनों परिवारों को बुलाकर समझाया जाता है। अधिकतर मामलों में समझाने पर दोनों परिवारों में सुलह हो जाती है।
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