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माता-पिता के विवाद में दरक रहा बचपन

Fri, 25 Dec 2020 12:02 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 25 Dec 2020 12:02 AM IST
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Childhood stuck in parental dispute
शामली। माता-पिता के विवाद में बचपन दरक रहा है। माता-पिता के आपसी झगड़े का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है। किसी को मां का प्यार मिलता है तो किसी को पिता का। माता-पिता का एक साथ प्यार पाने से बच्चे वंचित रहते हैं और उनकी सही परवरिश नहीं हो पाती। महिला थाने पर दंपति के बीच विवाद के मामले अक्सर सामने आते हैं। हर थाने पर बनी महिला हेल्प डेस्क में घरेलू हिंसा व अन्य विवाद के मामले सामने आ रहे हैं। महिला थाने पर हर महीने पारिवारिक विवाद से संबंधित औसतन 100 से ज्यादा मामले होते हैं। इनमें 15 से 20 मामले ऐसे होते हैं, जिनमें पति-पत्नी अलग होना चाहते हैं। पति-पत्नी के बीच इस तरह के विवाद के मामलों की पड़ताल की गई। पेश है रिपोर्ट...
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केस एक
मां की ममता से महरूम एक माह की बच्ची
शहर की पंजाबी कालोनी निवासी महिला ने डीएम कार्यालय में शिकायत की थी कि उसकी नवजात बच्ची को ससुराल वाले उसे नहीं दे रहे हैं। यह मामला महिला थाने पहुंचा था। पुलिस के हस्तक्षेप से बच्ची उसकी मां को दिलवा दी गई, लेकिन विवाद के चलते मां ने बच्ची को वापस उसके पिता को सौंप दिया। यह बच्ची अब अपने पिता के पास रह रही है, लेकिन मां का प्यार नहीं मिल रहा है।
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केस दो
एक साल का बच्चा पिता के प्यार से वंचित
शहर के मोहल्ला रामसागर निवासी महिला का पति के साथ विवाद का मामला महिला थाने पहुंचा। एक साल का बच्चा अपने पिता के साथ रहा। महिला पुलिस के समझाने पर भी दोनों के बीच सुलह नहीं हो पाई। इसके बाद पुलिस ने बच्चा उसकी मां को दिलवा दिया, जिससे मासूम को एक साथ माता-पिता का प्यार नहीं मिल पाया।
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कैराना में दंपति विवाद के 39 मामलेे आए
कैराना। कैराना कोतवाली में महिला हेल्प डेस्क पर पिछले दो महीने में 49 मामले पारिवारिक विवाद के सामने आए। इनमें 35 पारिवारिक मामलों का निस्तारण हुआ, जबकि 14 मामले लंबित चल रहे हैं।
बाबरी में 12 मामले आए
बाबरी। बाबरी थाने पर महिला हेल्प डेस्क पर अभी तक 12 मामले सामने आए हैं, जिनमें कई मामले पति-पत्नी के विवाद से संबंधित है। पुलिस का कहना है कि इन मामलों में समझौते की कोशिश की जा रही है।

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कोट
महिला थाने पर हर महीने 15 से 20 मामले ऐसे होते है, जिनमें पति-पत्नी साथ नहीं रहना चाहते। ऐसे में उनके बच्चे मां के पास रहते हैं या फिर पिता के साथ। ऐसी स्थिति में बच्चों के पालन पोषण पर प्रभाव पड़ता है। ऐसे मामलों में दोनों को एक साथ रहने के लिए समझाया जाता है। माता-पिता दोनों का प्यार मिले तभी बच्चे की सही परवरिश होती है।
- नीरज चौधरी, प्रभारी निरीक्षक महिला थाना।
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