{"_id":"6419ee28e8838cc75e029bb8","slug":"change-in-weather-can-spoil-health-be-careful-shamli-news-c-14-mrt1036-162531-2023-03-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shamli News: पांच साल से शासन नहीं भेज रहा प्रश्न पत्राें के लिए बजट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shamli News: पांच साल से शासन नहीं भेज रहा प्रश्न पत्राें के लिए बजट
विज्ञापन
- बिना बजट के ही परीक्षा कराने के लिए शिक्षा विभाग को छपवाने पड़ रहे है प्रश्न पत्र
- हर साल प्रश्न पत्र छपवाने के लिए खर्च होती है 2.39 लाख की धनराशि
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। परिषदीय स्कूलाें में कक्षा एक से आठ तक के छात्र-छात्राओं की परीक्षा कराने के लिए शासन से पिछले पांच साल से कोई बजट तक नहीं आ रहा है। शिक्षा विभाग भी हर वर्ष मांग भेज रहा है, लेकिन शासन से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। इसकी वजह से विभाग को बिना बजट के ही छात्रों की परीक्षा कराने के लिए स्वयं के खर्च पर ही प्रश्न पत्रों को छपवाकर परीक्षा करानी पड़ रही है।
जनपद में कक्षा एक से आठ तक 596 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व चार कस्तूरबा विद्यालय हैं। इन स्कूलों में 88 हजार के करीब छात्र-छात्राएं पढ़ते है। इनकी हर वर्ष परीक्षा होती है। परीक्षा कराने के लिए शिक्षा विभाग को शासन से बजट मिलता है। बजट मिलने के बाद वह प्रश्न पत्रों को छपवाने के बाद स्कूलों में भेज देते है। लेकिन पिछले पांच साल से शासन से बजट नहीं आ रहा है। कोरोना काल में प्रश्न पत्र छप गए थे, लेकिन शासन ने परीक्षा न कराने का निर्णय लिया। जिसके बाद प्रश्न पत्र रद्दी हो गए। दो साल परीक्षा नहीं हुई और फिर वर्ष 2021-22 में परीक्षा कराने के लिए बजट मांगा गया, लेकिन बजट नहीं आया।
इस वर्ष भी बजट के नाम शिक्षा विभाग को खाली हाथ रहना पड़ा। हर वर्ष प्रश्न पत्र छपवाने में शिक्षा विभाग को दो लाख 39 हजार 219 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जिस स्थान पर प्रश्न पत्र छप रहे है वह भी शिक्षा विभाग से लगातार बकाया जमा करने का दबाव बना रहा है।
विज्ञापन
वर्जन......
शासन से बजट नहीं आने के कारण उनको उधार ही प्रश्न पत्रों को छपवाना पड़ रहा है। जैसे ही बजट आएगा तो वह प्रेस संचालक का भुगतान कर देंगे। इस बार तो प्रश्न पत्र छप गए है। अमित कुमार, जिला समन्वयक, शामली।
विज्ञापन
- हर साल प्रश्न पत्र छपवाने के लिए खर्च होती है 2.39 लाख की धनराशि
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। परिषदीय स्कूलाें में कक्षा एक से आठ तक के छात्र-छात्राओं की परीक्षा कराने के लिए शासन से पिछले पांच साल से कोई बजट तक नहीं आ रहा है। शिक्षा विभाग भी हर वर्ष मांग भेज रहा है, लेकिन शासन से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। इसकी वजह से विभाग को बिना बजट के ही छात्रों की परीक्षा कराने के लिए स्वयं के खर्च पर ही प्रश्न पत्रों को छपवाकर परीक्षा करानी पड़ रही है।
जनपद में कक्षा एक से आठ तक 596 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व चार कस्तूरबा विद्यालय हैं। इन स्कूलों में 88 हजार के करीब छात्र-छात्राएं पढ़ते है। इनकी हर वर्ष परीक्षा होती है। परीक्षा कराने के लिए शिक्षा विभाग को शासन से बजट मिलता है। बजट मिलने के बाद वह प्रश्न पत्रों को छपवाने के बाद स्कूलों में भेज देते है। लेकिन पिछले पांच साल से शासन से बजट नहीं आ रहा है। कोरोना काल में प्रश्न पत्र छप गए थे, लेकिन शासन ने परीक्षा न कराने का निर्णय लिया। जिसके बाद प्रश्न पत्र रद्दी हो गए। दो साल परीक्षा नहीं हुई और फिर वर्ष 2021-22 में परीक्षा कराने के लिए बजट मांगा गया, लेकिन बजट नहीं आया।
विज्ञापन
इस वर्ष भी बजट के नाम शिक्षा विभाग को खाली हाथ रहना पड़ा। हर वर्ष प्रश्न पत्र छपवाने में शिक्षा विभाग को दो लाख 39 हजार 219 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जिस स्थान पर प्रश्न पत्र छप रहे है वह भी शिक्षा विभाग से लगातार बकाया जमा करने का दबाव बना रहा है।
विज्ञापन
वर्जन......
शासन से बजट नहीं आने के कारण उनको उधार ही प्रश्न पत्रों को छपवाना पड़ रहा है। जैसे ही बजट आएगा तो वह प्रेस संचालक का भुगतान कर देंगे। इस बार तो प्रश्न पत्र छप गए है। अमित कुमार, जिला समन्वयक, शामली।